उत्तर प्रदेश का स्थापना दिवस: बुलंदियों के क्षितिज पर उत्तर प्रदेश

अरविंद जयतिलक

Update: 2026-01-24 05:34 GMT

आज उत्तर प्रदेश का स्थापना दिवस है। आजादी के ढाई वर्ष बाद 24 जनवरी 1950 को उत्तर प्रदेश राज्य के गठन की अधिसूचना जारी हुई थी। भौगोलिक दृष्टि से उत्तर प्रदेश प्राचीन ‘गोंडवाना लैंड’ का एक हिस्सा है। कैम्ब्रियन युग में विन्यस्त क्रम की शैलों ने इसे धरातलीय स्वरूप प्रदान किया। भौगोलिक विविधताओं और सांस्कृतिक समृद्धियों से आच्छादित उत्तर प्रदेश 1836 से 1877 तक ‘उत्तर-पश्चिम प्रांत’ और 1877 से 1937 तक ‘संयुक्त प्रांत, आगरा एवं अवध’ के नाम से जाना गया। 1937 में इसे नया नाम ‘संयुक्त प्रांत’ मिला।

1858 तक उत्तर प्रदेश की राजधानी आगरा थी, 1858 से 1921 तक इलाहाबाद और फिर 1921 में लखनऊ राजधानी बना। गौर करें तो भरपूर मानव संसाधन, उर्वर भूमि और प्राकृतिक समृद्धि से संपन्न होने के बावजूद उत्तर प्रदेश आर्थिक मोर्चे पर वह अपेक्षित मुकाम हासिल नहीं कर पाया, जो देश के कई अन्य राज्यों ने किया। सामान्यतः देखा जाता है कि जिस राज्य में कानून-व्यवस्था मजबूत होती है और अवसंरचना का तेजी से विस्तार होता है, वहां विकास का पहिया तेजी से घूमता है। इससे निवेश बढ़ता है, प्रतिव्यक्ति आय में इजाफा होता है और राज्य समृद्धि की ओर अग्रसर होता है।

विकास का पहिया चार प्रमुख इंजनों के बूते आगे बढ़ता है। पहला, निजी निवेश यानी नई परियोजनाओं में निजी क्षेत्र का निवेश। दूसरा, सार्वजनिक खर्च, अर्थात बुनियादी ढांचे और विकास परियोजनाओं में सरकार का निवेश। तीसरा, आंतरिक खपत यानी वस्तुओं और सेवाओं की खपत। और चौथा, बाह्य खपत यानी वस्तुओं का निर्यात। अच्छी बात यह है कि उत्तर प्रदेश की मौजूदा सरकार इन चारों इंजनों को गतिशील करती हुई दिखाई दे रही है।

यह इसलिए संभव हो पाया है क्योंकि राज्य में कानून का शासन स्थापित हुआ है और अपराधियों के हौसले पस्त हुए हैं। उत्तर प्रदेश सरकार ने अवसंरचना को मजबूती देने के लिए बिजनेस रिफॉर्म एक्शन प्लान पर अमल किया है, जिससे निवेशकों को आकर्षित करने में मदद मिल रही है। सरकार ने अपनी नीतियों के तहत ‘निवेश मित्र’ पोर्टल तैयार कर उस पर 227 सेवाएं शामिल की हैं, जिससे उद्यमियों को निवेश के लिए प्रोत्साहन मिला है।

सरकार की ‘एक जिला एक उत्पाद’ नीति से स्थानीय स्तर पर रोजगार को बढ़ावा मिला है और निर्यात में तेजी आई है। इस मिशन के तहत हर वर्ष हजारों करोड़ रुपये के उत्पादों का निर्यात हो रहा है, जिससे लोगों की आमदनी बढ़ रही है। उत्तर प्रदेश सरकार ने 2018 में राजधानी लखनऊ में इन्वेस्टर्स समिट का आयोजन शुरू किया, जो अब लगातार जारी है। इसके सकारात्मक परिणाम भी सामने आए हैं। पिछले वर्ष के वैश्विक निवेशक सम्मेलन के दौरान प्राप्त 40 लाख करोड़ रुपये से अधिक के निवेश प्रस्ताव राज्य में दुनियाभर के निवेशकों की बढ़ती रुचि का प्रमाण हैं।

मौजूदा सरकार उत्तर प्रदेश को महाराष्ट्र और गुजरात की तर्ज पर विकसित करने के उद्देश्य से अब तक पांच ग्राउंड ब्रेकिंग सेरेमनी का आयोजन कर चुकी है। इससे तकरीबन चार लाख से अधिक लोगों को नए उद्योगों के माध्यम से रोजगार मिला है। एक आंकड़े के मुताबिक उत्तर प्रदेश में अब तक 15 लाख करोड़ रुपये से अधिक का निवेश हो चुका है। पांच लाख करोड़ रुपये से अधिक की 8300 से ज्यादा परियोजनाएं वाणिज्यिक परिचालन में हैं, जबकि दस लाख करोड़ रुपये की 8100 से अधिक परियोजनाएं निर्माणाधीन हैं।

देखा जाए तो उत्तर प्रदेश सरकार ने निवेश बढ़ाने और ‘ईज ऑफ डूइंग बिजनेस’ में सुधार के क्षेत्र में उल्लेखनीय प्रगति की है। आज उत्तर प्रदेश ‘ईज ऑफ डूइंग बिजनेस’ के मामले में महाराष्ट्र के बाद देश में दूसरे स्थान पर है। सूक्ष्म, लघु और मध्यम उद्योगों को बढ़ावा देने के लिए सरकार ने कारोबारियों को विशेष प्रोत्साहन दिया है। राज्य में करीब 90 लाख से अधिक एमएसएमई इकाइयां हैं, जो लगभग डेढ़ करोड़ लोगों को रोजगार देती हैं। यह देश की कुल 6.33 करोड़ एमएसएमई इकाइयों का लगभग 14 प्रतिशत है।

अर्थव्यवस्था के लिहाज से 2017 में पांचवें स्थान पर रहने वाला उत्तर प्रदेश आज तमिलनाडु, कर्नाटक और गुजरात को पीछे छोड़ते हुए देश की दूसरी सबसे बड़ी अर्थव्यवस्था बन चुका है। आंकड़ों पर नजर डालें तो 2016-17 में उत्तर प्रदेश का सकल राज्य घरेलू उत्पाद 12.75 लाख करोड़ रुपये था, जो 2024-25 में बढ़कर 25 लाख करोड़ रुपये हो गया है। अनुमान है कि 2025-26 में यह 30.8 लाख करोड़ रुपये तक पहुंच जाएगा। यानी 2017 के बाद इसमें 80 प्रतिशत से अधिक की वृद्धि होने की संभावना है।

इसी तरह 2012 से 2017 के बीच राज्य की प्रतिव्यक्ति आय 48,520 रुपये थी, जो अब बढ़कर 1,08,572 रुपये हो चुकी है। 2012 से 2017 के दौरान जहां केवल 302 किलोमीटर एक्सप्रेस-वे का निर्माण हुआ था, वहीं 2017 से 2025 के बीच करीब दो हजार किलोमीटर से अधिक एक्सप्रेस-वे निर्माणाधीन हैं।

बुंदेलखंड में रक्षा औद्योगिक गलियारा पांच हजार हेक्टेयर क्षेत्र में छह शहरों लखनऊ, कानपुर, आगरा, अलीगढ़, झांसी और चित्रकूट में विकसित किया जा रहा है। उम्मीद है कि इससे बुंदेलखंड के विकास को गति मिलेगी और स्थानीय लोगों को बड़े पैमाने पर रोजगार मिलेगा।

गौर करें तो उत्तर प्रदेश में क्षेत्रीय असंतुलन अन्य राज्यों की तुलना में अधिक रहा है। इस असंतुलन को पाटने के लिए एक्सप्रेस-वे जैसे बुनियादी ढांचे का विकास सबसे अहम होता है। सरकार ने इस दिशा में पहल करते हुए पूर्वांचल एक्सप्रेस-वे, जो राजधानी लखनऊ से गाजीपुर तक जुड़ा है, को धरातल पर उतारा है। इससे पूर्वांचल को विशेष लाभ मिला है। गंगा एक्सप्रेस-वे का निर्माण भी अंतिम चरण में है।

किसी भी राज्य के विकास के लिए कनेक्टिविटी सबसे अहम संसाधन होती है। कनेक्टिविटी बढ़ने से विकास को गति मिलती है। इसे ध्यान में रखते हुए उत्तर प्रदेश सरकार अंतरराष्ट्रीय हवाई अड्डों की संख्या बढ़ा रही है। हाल ही में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने कुशीनगर अंतरराष्ट्रीय हवाई अड्डे का उद्घाटन किया और जेवर इंटरनेशनल एयरपोर्ट का शिलान्यास किया। उत्तर प्रदेश में करीब एक दर्जन से अधिक हवाई अड्डों को विकसित किया जा रहा है।

दर्जनों शहरों में मेट्रो रेल परियोजनाओं की योजना तैयार की जा चुकी है। लखनऊ, नोएडा, कानपुर और गाजियाबाद जैसे बड़े शहरों में बढ़ती आबादी को देखते हुए मेट्रो सेवाओं का विस्तार तेजी से किया जा रहा है।

उत्तर प्रदेश की सरकार न केवल विकास के नए कीर्तिमान स्थापित कर रही है, बल्कि सनातन भारतीय संस्कृति, मूल्य, प्रतिमान और परंपराओं को भी पूरी निष्ठा के साथ संरक्षित कर रही है। चाहे भगवान श्रीराम की नगरी अयोध्या को भव्य स्वरूप देना हो या मुरली मनोहर कान्हा की नगरी मथुरा और वृंदावन को विराटता प्रदान करना, सरकार पूरी प्रतिबद्धता से जुटी हुई है। वैभव और वैराग्य के देवता महादेव की नगरी काशी हो या प्रयागराज और चित्रकूट धाम सभी की गरिमा और दिव्यता के प्रति उत्तर प्रदेश सरकार अटूट निष्ठा रखती है।

सभी तीर्थ और धाम दैवीय ऊर्जा से सराबोर हैं और भारतीय जनमानस को सहज रूप से आकर्षित कर रहे हैं। गत वर्ष तीर्थराज प्रयागराज में महाकुंभ का आयोजन हुआ। 144 वर्षों बाद विशेष शुभ मुहूर्त बना था। इस महाकुंभ में करोड़ों श्रद्धालुओं ने स्नान किया और दुनियाभर से लोग प्रयागराज पहुंचे। उत्तर प्रदेश सरकार ने श्रद्धालुओं के ठहरने, रहने और खाने-पीने की उत्तम व्यवस्था की थी।

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