संगम स्नान में राजनीतिक डुबकी

डॉ. अतुल गोयल

Update: 2026-01-21 06:27 GMT

माघ मेला 2026 का माहौल कुछ अलग ही दृश्य पेश कर रहा था! जहां पवित्र संगम की लहरें तो शांत बह रही थीं, लेकिन राजनीति की लहरों ने तूफान मचा दिया। यह कोई बॉलीवुड की कॉमेडी फिल्म की तरह नहीं था 'शंकराचार्य 1 एस. सिस्टम: एजेंडा एक्सप्रेस'!

स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद सरस्वती जी, जो राम मंदिर की प्राण-प्रतिष्ठा को 'जल्दबाजी' बताकर पहले ही भाजपा की आंखों में किरकिरी बन चुके थे, अब माघ मेला में कांग्रेस के 'एजेंडे' को पूरा करने की कोशिश में लगे। एजेंडा क्या? वो तो बस 'भाजपा को असहज करना' थाजैसे कोविड के दौरान गंगा में तैरती लाशों का जिक्र, महाकुंभ की कुप्रबंधन की बातें, और अब राजसी स्नान की परंपरा को 'अपमान' का मुद्दा बनाना।

कांग्रेस वाले तो खुश, पवन खेड़ा जी प्रेस कॉन्फ्रेंस में बोले, 'ये भाजपा की दोहरी नीति है!' मानो शंकराचार्य जी कांग्रेस के 'अनऑफिशियल स्पोक्सपर्सन' बन गए हों।

प्रयास? वो रथ पर सवार होकर 200 अनुयायियों के साथ संगम पहुंचे, बिना पूर्व अनुमति के, पीक ऑवर में जैसे कोई वीआईपी पार्टी क्रैशर हो। उन्होंने व्यवस्था बिगाड़ने की भरपूर कोशिश की बैरिकेड्स तोड़े, रास्ता ब्लॉक किया तीन घंटे तक, और आम श्रद्धालुओं को परेशान किया। प्रशासन ने अनुरोध किया, 'भगदड़ का खतरा हो सकता है,' लेकिन स्वामीजी के शिष्य बोले, 'नहीं, हम पैदल नहीं जाएंगे,' जैसे कोई जिद्दी बच्चा ऑटो की बजाय लिमो में स्कूल जाना चाहे।

अब आता है क्लाइमैक्स योगी जी का चिर-परिचित तरीका, लाठीचार्ज का हास्यास्पद हिस्सा। पुलिस ने कहा, 'भीड़ ज्यादा है, रथ से उतरकर पैदल जाओ।' लेकिन शिष्य अड़े रहे, बहस हुई, धक्का-मुक्की शुरू। अचानक लाठियां चलीं, वो भी ऐसे जैसे कोई पुरानी हिंदी फिल्म में विलेन के गुंडे आ जाते हैं।

शंकराचार्य जी का रथ रुक गया, शिष्य चिल्लाए, 'अपमान! अपमान!' और स्वामी जी बिना स्नान किए लौट आए मौनी अमावस्या पर! कल्पना कीजिए, पवित्र डुबकी की बजाय 'राजनीतिक डुबकी' हो गई।

कांग्रेस ने तुरंत भाजपा पर हमला बोला, 'संतों का अपमान!' प्रशासन ने समझाया, 'नियम तो सबके लिए बराबर हैं, संत हों या आम आदमी।' शिष्यों में 15 घायल हुए, एफआईआर की मांग हुई। हास्य ये कि पूरा ड्रामा 'परंपरा बचाओ' के नाम पर था, जबकि असल में ये राजनीतिक 'एजेंडा पुष्टि' लग रहा था।

अंत में, संगम की लहरें शायद यही सोच रही होंगी 'इंसान राजनीति में डुबकी लगाते हैं, हम तो सिर्फ पवित्र गंगा हैं!'

ये घटना बताती है कि धार्मिक मेले में भी राजनीति की 'लाठी' चल सकती है, और हास्य ये कि एजेंडा पूरा होने की बजाय बस एक नया विवाद पैदा हो गया। माघ मेला अब 'मागा मेला' बन गया, जहां हर कोई अपना 'एजेंडा' मांग रहा है।

स्वामी शंकराचार्य अविमुक्तेश्वरानंद सरस्वती (ज्योतिर्मठ) के कांग्रेस की ओर झुकाव या समर्थन के अन्य प्रमाणों की बात करें तो, विभिन्न स्रोतों से मिली जानकारी के आधार पर कुछ प्रमुख उदाहरण सामने आते हैं।

स्वामी ध्यान दें कि ये आरोप मुख्य रूप से उनके आलोचकों (जैसे स्वामी गोविंदानंद सरस्वती) द्वारा लगाए गए हैं, और स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद ने इन्हें खारिज किया है। प्रियंका गांधी ने 13 सितंबर 2022 को एक पत्र लिखा, जिसमें अविमुक्तेश्वरानंद को 'पूज्य शंकराचार्य अविमुक्तेश्वरानंद सरस्वती जी' संबोधित किया। इस पत्र को उन्होंने सुप्रीम कोर्ट में अपनी शंकराचार्य पद की दावेदारी के समर्थन में पेश किया।

आलोचकों का दावा है कि यह कांग्रेस का प्रत्यक्ष समर्थन दर्शाता है, और कांग्रेस ने उन्हें 'शंकराचार्य' मानकर राजनीतिक लाभ उठाने की कोशिश की। स्वामी गोविंदानंद ने उन्हें 'कांग्रेस का खिलौना' बताया।

2014 और 2019 के लोकसभा चुनावों में स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद ने वाराणसी में नरेंद्र मोदी के खिलाफ कांग्रेस उम्मीदवारों के पक्ष में प्रचार किया। वे एक सामान्य बूथ-लेवल कार्यकर्ता की तरह भाषण देते थे और मोदी को 'राम मंदिर न बनाने वाला' बताते थे।

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