राहत और साहसिक सुधार केंद्रित होगा नया बजट

डॉ. जयंतीलाल भंडारी

Update: 2026-01-28 04:39 GMT

इन दिनों पूरे देश की निगाहें वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण के द्वारा एक फरवरी को प्रस्तुत किए जाने वाले आगामी वित्त वर्ष 2026-27 के बजट की ओर लगी हुई है। सीतारमण का यह नौवां बजट होगा। उम्मीद की जा रही है कि यह बजट एक ऐसा ऐतिहासिक बजट होगा, जिसमें 2047 तक भारत को विकसित देश बनाने के दृष्टिकोण से खपत और व्यय बढ़ाकर विकास दर बढ़ाने, गरीब, युवा, महिलाएं, किसान और मध्यम वर्ग के लिए राहत के प्रभावी प्रावधानों के साथ रक्षा, सूक्ष्म, लघु व मध्यम उद्योग (एमएसएमई), हरित ऊर्जा और आर्थिक सुधारों पर बड़े ऐलान दिखाए देंगे। साथ ही वित्त मंत्री राहत और विकास के बीच संतुलन बनाते हुए राजकोषीय घाटे को वित्त वर्ष 2026-27 में सकल घरेलू उत्पाद (जीडीपी) के 4.3 फीसदी के स्तर पर सीमित रखने और 7.5 फीसदी विकास दर पाने की रणनीति के साथ आगे बढ़ते हुए दिखाई देगी।

इसमें कोई दो मत नहीं हैं कि वित्त मंत्री सीतारमण के समक्ष वर्ष 2026-27 का चजट तैयार करते समय चुनौतियों की श्रृंखला सामने रही है। चालू वित्त वर्ष 2025-26 में ट्रंप टैरिफ की चुनौती का अमेरिका को होने वाले देश के निर्यात पर प्रतिकूल असर हुआ है। वैश्विक परिदृश्य पर मौजूद सैन्य संघर्ष और आर्थिक गुटबाजी की चुनौतियों का भी देश की जीडीपी पर असर हुआ है। अब वर्ष 2026-27 में राज्यों के साथ संसाधनों के बंटवारे को लेकर सोलहवें वित्त आयोग की सिफारिशों को लागू किए जाने पर भी अर्थव्यवस्था पर प्रभाव होगा। इन चुनौतियों के बावजूद इस समय वित्त मंत्री सीतारमण की मुठियों में विभिन्न वर्गों को राहत देने और विकास की विभिन्न योजनाओं के लिए प्रभावी आवंटन हेतु कर संग्रहण संबंधी मजबूत परिदृश्य मौजूद है। चालू वित्त वर्ष के तहत 7.4 फीसदी विकास दर प्राप्ति के संकेत अच्छे आर्थिक परिदृश्य के प्रतीक है। चालू वित्त वर्ष में आयकर रिटर्न भरने वाले आयकरदाताओं की संख्या और आयकर की प्राप्ति में प्रभावी वृद्धि हुई है। चालू वित्त वर्ष में अप्रैल से दिसंबर 2024 तक आयकर सहित प्रत्यक्ष कर संग्रहण 17 लाख करोड़ रुपए से अधिक रहा है, जो कि पिछले साल की इसी अवधि के मुकाबले 8 फीसदी से भी ज्यादा है.

उम्मीद की जा रही है कि वित्त मंत्री आगामी वित्त वर्ष में पूंजीगत व्यय को बढ़ाकर 12 से 12.5 लाख करोड़ रुपए के स्तर पर पहुंचाते हुए दिखाई देंगी। वित्त मंत्री आगामी बजट के तहत गरीब, युवा, महिलाएं, किसानों और मध्यम वर्ग के कल्याण के नए उपायों के साथ विकास योजनाओं पर भी अपने आवंटन को बढ़ते हुए दिखाई दे सकती हैं। नए बजट में महिलाओं के लिए विशेष क्रेडिट कार्ड, ऋण तथा बीमा प्लान की घोषणाएं हो सकती हैं। नए बजट में क्ति मंत्री रोजगार, कृषि उत्पादकता बहाने, ग्रामीण विकास, सिंचाई तथा वेयरहाउसिंग संबंधी प्रोत्साहन, पीएलआई योजना का दायरा बढ़ाने, रियल एस्टेट सेक्टर और आचास सेक्टर को प्रोत्साहन, डिजिटल क्रांति को आगे बढ़ाने, पीएम सूर्य मुफ्त बिजली योजना तथा स्वच्छ ऊर्जा के लिए अधिक आवंटन करते हुए दिखाई दे सकती हैं।

प्रधानमंत्री कौशल मुद्रा योजना की शुरुआत संभावित है। ग्रामीण उद्यमिता को बढ़ाने के लिए शिक्षण-प्रशिक्षण पर अधिक आवंटन संभावित है। सार्वजनिक बुनियादी इंचे में निवेश, रेलवे, शहरी बुनियादी ढांचे में सुधार और क्षमता संवर्धन के साथ दीर्घावधि वृद्धि को बनाए रखने, वैश्विक क्षमता निर्माण और एकीकरण के लिए विभिन्न क्षेत्रों में मिशन मोड के नए सुधार नए बजट के माध्यम से आगे बढ़ते हुए दिखाई दे सकेंगे। साथ ही आगामी बजट के माध्यम से वित्त मंत्री सीतारमण तेज विकास के लिए जरूरी और वित्तीय सुधारों को लागू करने, ग्रामीण अर्थव्यवस्था को मजबूत बनाने, उद्योग जगत की लाजिस्टिक्स लागत घटाने, रोजगार सृजित करने वाले मैन्यूफैक्चरिंग सेक्टर पर फोकस करने संबंधी बुनियादी रणनीतियां प्रस्तुत करते हुए दिखाई देंगी।

यह भी संभावना उभरकर दिखाई दे रहीं है कि आगामी बजट में वित्त मंत्री युवाओं के बीच रोजगार बढ़ाने, कार्यबल में महिलाओं की भागीदारी बढ़ाने, डिजिटल कौशल प्रशिक्षण कार्यक्रमों को रोजगार बाजार की उभरती जस्पतों के अनुरूप बालने, निजी निवेश को प्रोत्साहित करने, वित्तीय समावेशन को बेहतर करने और विदेशी निवेश को आकर्षित करने संबंधी प्रभावों प्रावधानों से सज्यते हुए दिखाई दे सकती हैं। वित्त मंत्री सीतारमण नए बजट में किसान क्रेडिट कार्ड के तहत उधार की सीमा बढ़ाने और खाद्य महंगाई पर काबू पाने के लिए आपूर्ति संबंधी नए कदमों के साथ आगे बढ़ती हुई दिखाई दे सकती हैं। वित्त मंत्री तेज रोजगारोन्मुखी निर्यात क्षेत्रों से निर्यात बढ़ाकर नए रोजगार अवसरों को निर्मित कर सकती है। माइक्रो फाइनेंस इंस्टीट्‌यूशंस (एमएफआई) को मजबूत बनाने के लिए विशेष फंड बनाने, विकसित भारत के लक्ष्य के मद्देनजर डिजिटल अर्थव्यवस्था के लिए प्रोत्साहन के प्रावधान तथा रक्षा क्षेत्र के लिए अधिक आवंटन दिखाई दे सकता है। इस समय चीन, पाकिस्तान के साथ-साथ बांग्लादेश से भी बाहरी सुरक्षा को खतरे बड़े हैं. ऐसे में सुरक्षा क्षमता बढ़ाने के लिए अधिक धन की जरूरत स्पष्ट दिखाई दे रही है।

विभिन्न क्षेत्रों की उत्पादकता को बेहतर करने में आर्टिफिशल इंटेलिजेंस की भूमिका भी कर बजट के माध्यम से प्रभावी बनाई जाने की संभावनाएं हैं। इसके अलावा वित्त मंत्री अमेरिका द्वारा लगाए गए 50 फीसदी टैरिफ से प्रभावित निर्यात क्षेत्रों को भी राहत देने के मद्देनजर नए निर्यात प्रोत्साहनों की उमर पर भी आगे बढ़ते हुए दिखाई देंगी। निश्चित रूप से वित्त मंत्री सीतारमण मजबूत वित्तीय मुट्ठी से आयकर के नए और पुराने दोनों टैक्स रिजीम की व्यवस्थाओं के तहत करदाताओं व मध्यम वर्ग को अभूतपूर्व राहतों से लाभावित कर सकती है। वित्त मंत्री आगामी बजट के माध्यम से टैक्स में कटौती और वित्तीय प्रोत्साहनों से आयकरदाता और मध्यम वर्ग की क्रयशक्ति बढ़ाकर मांग में वृद्धि करके अर्थव्यवस्था को गतिशील करने को रणनीति पर आगे बढ़ते हुए दिखाई दे सकती हैं। वित्त मंत्री कर सुधारों की डगर पर भी आगे बढ़ते हुए दिखाई दे सकती हैं। सरकार वित्त वर्ष 2026-27 के आम चजट में सीमा शुल्क के लिए माफी योजना की घोषणा कर सकती है ताकि पुराने विवादित मामलों का निपटारा किया जा सके।

आगामी बजट 2026-27 इसलिए भी खास है, क्योंकि यह पुराने टैक्स युग से नाए टैक्स युग की दहलीज पर खड़ा बजट है। सरकार 1 अप्रैल 2026 से करीब 60 साल पुराने टैक्स कानून की जगह नया इनकम टैक्स कानून 2025 लागू करने जा रही है। साथ ही नई श्रम संहिताएं भी आगामी वित्तीय वर्ष में लागू होने जा रही हैं। इसमें कोई दो मत नहीं है कि वर्ष 2026-27 का बजट कोई साधारण वार्षिक बजट नहीं होगा, यह बजट देश के आर्थिक परिदृश्य को एक ऐतिहासिक मोड़ देने वाला बजट होगा। वर्ष 2026-27 बजट के द्वारा वित्त मंत्री को मध्यम वर्ग की वर्षों पुरानी क्रयशक्ति बढ़ाने की अपेक्षाओं, निवेशकों की आकांक्षाओं और सरकार की राहत के साथ तेज विकास की रणनीति के मद्देनजर संतुलित, दूरदर्शी और संवेदनशील बजट के लिए सूझबूझ पूर्ण तालमेल के साथ आगे बढ़ना होगा।

उम्मीद करें कि एक फरवरी को वित्त मंत्री सीतारमण के द्वारा पेश होने वाला वर्ष 2026-27 का बजट आम आदमी के लिए राहत, बाजार के लिए रफ्तार और विकसित भारत के लिए साहसिक सुधारों को आगे बढ़ाने वाला ऐतिहासिक बजट होगा। उम्मीद करें कि यह एक ऐसा बजट भी होगा, जिसमें वित्त मंत्री 2026-27 के तहत राजकोषीय घाटे की जीडीपी के 4.3 फीसदी तक लाने के लक्ष्य के मद्देनजर राजकोषीय अनुशासन का पालन करते हुए भी दिखाई देंगी

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