भोपाल/राजनीतिक संवाददाता। राज्य सरकार द्वारा अन्य पिछड़ा वर्ग को आरक्षण बढ़ाने का असर होने वाले लोकसभा चुनावों की दावेदारी में असर आने लगा है। खासकर अन्य पिछडा वर्ग बहुल जिलों की लोकसभा सीटों पर इस वर्ग के दावेदार दम ठोंकने लगे हैं। कांग्रेस जहां अपने इस कदम का राजनीतिक लाभ लेने की तैयारी में है, वहीं भाजपा भी अन्य पिछडा वर्ग चेहरे को मौका देकर कांग्रेस के अन्य पिछडा वर्ग कार्ड में काट लगा सकती है।
अभी तक भाजपा और कांग्रेस सहित किसी भी प्रमुख दल ने प्रदेश की 29 सीटों पर अपने प्रत्याशी तय नहीं किए हैं। इस बीच मुख्यमंत्री कमलनाथ द्वारा पिछडे वर्ग का आरक्षण 14 से बढ़ाकर 27 प्रतिशत कर दिया है। कांग्रेस ने विधानसभा चुनाव के पूर्व इसका वचन दिया था। इसे आनन-फानन में लोकसभा चुनाव के ठीक पहले पूरा कर मुख्यमंत्री नाथ ने विरोधियों के लिए परेशानी खड़ी कर दी है। मुख्यमंत्री के इस कदम से प्रदेश के राजनीतिक समीकरण भी बदल गए हैं। इससे भाजपा सहित सभी विपक्षी दलों को परेशानी में डालने का काम भी कांग्रेस ने किया है। आनन-फानन में राज्यपाल की मुहर भी इस अध्यादेश पर लगवाने के बाद अब कांग्रेस अपने फैसलों में भी इस आरक्षण का लाभ देने की तैयारी में है। इससे कांग्रेस में हलचल बढऩा लाजिमी है। खासकर अन्य पिछडा वर्ग के नेता अपने लिए मौके तलाशने लगे हैं। पार्टी में अन्य पिछडा वर्ग बाहुल सीटों पर टिकट का दावा करने वाले भी बढ़ गए हैं। वहीं भाजपा को भी कांग्रेस के इस कदम का काट ढूंढना मजबूरी हो गई है। यदि कांग्रेस अन्य पिछडा वर्ग चेहरोंं को नया रोस्टर सामने रखकर मौका देती है तो भाजपा को भी इसी नक्शे कदम पर चलना मजबूरी हो जाएगा। जानकारी के अनुसार प्रदेश की 29 सीटों में से आठ सीटों पर अन्य पिछड़ा वर्ग के मतदाताओं की हिस्सेदारी 50 फीसदी से अधिक है। इनमें भोपाल, जबलपुर, दमोह, खजुराहो, खंडवा, होशंगाबाद, सागर, मंदसौर शामिल हैं। जबकि विंध्य की सतना और रीवा में करीब 48 फीसदी मतदाता अन्य पिछडा वर्ग के आते हैं। ऐसे में कांग्रेस ने अन्य पिछडा वर्ग नेताओं को आश्वासन देना भी शुरू कर दिया हे कि क्षेत्र की जरूरत और जातिगत समीकरण देखते हुए मौका दिया जाएगा। वैसे भी करीब आधा दर्जन सीटों पर पहले से ही अन्य पिछडा वर्ग चेहरों के नाम ही कांग्रेस ने दिल्ली भेजे हैं। ऐसे में भाजपा को अपनी पूरी कवायद में बदलाव करना पड़ सकता है।
खंडवा में अरुण यादव, दमोह में कुसमारिया हो सकते हैं चेहरा
खंडवा की ओबीसी बहुल लोकसभा सीट के लिए कांग्र्रेस मे पूर्व प्रदेशाध्यक्ष अरुण यादव का सिंगल नाम ही स्क्रीनिंग कमेटी में गया है। इसके अलावा भाजपा से आए रामकृष्ण कुसमारिया को दमोह या खजुराहो से मौका दिया जाना तय माना जा रहा है। नए समीकरण बनने से उनका दावा और मजबूत हो रहा है। वहीं मंदसौर से भी कांग्रेस ने पहले से ही पिछडा वर्ग के चेहरे को आगे कर रखा है। हालांकि सतना से पूर्व नेता प्रतिपक्ष अजय सिंह का एक मात्र नाम है। वहीं रीवा से भी अधिकांश दावेदार सामान्य वर्ग से हैं। ऐसे में विंध्य की दोनों अन्य पिछडा वर्ग बाहुल सीट पर कांग्रेस को मजबूरी में ही सामान्य वर्ग के प्रत्याशी उतारना पड़ सकते हैं। सूत्रों के मुताबिक अन्य पिछडा वर्ग बाहुल सीटों में से करीब छह पर कांग्रेस इसी वर्ग के प्रत्याशियों को मौका दे सकती है। वहीं प्रदेश की अन्य सीटोंं पर भी अन्य पिछडा वर्ग नेताओंं को मौका देकर कांग्रेस नए रोस्टर को ताकत दे सकती है। किसी भी हालत में तय आरक्षण को कमजोर नहीं रहने दिया जाएगा। ताकि विपक्षी दल को सवाल उठाने का मौका नहीं मिल सके।