यूपी में वो प्लेन हादसा जिसमें 'महाराज' की गई थी जान, शोक में डूब गया था सिंधिया परिवार
बारामती विमान हादसे ने एक बार फिर 25 साल पहले हुए प्लेन हादसे की याद ताजा कर दी है। इसमें माधवराव सिंधिया की मौत हो गई थी, जिसने ग्वालियर को शोक में डुबो दिया।
ग्वालियरः महाराष्ट्र के बारामती में बुधवार की सुबह हुए भीषण विमान हादसे ने देश की राजनीति को गहरे शोक में डुबो दिया। लैंडिंग से पहले हुए इस क्रैश में राज्य के डिप्टी सीएम अजीत पवार समेत पांच लोगों की दर्दनाक मौत हो गई। यह हादसा सिर्फ एक दुर्घटना नहीं था, बल्कि उसने एक बार फिर भारतीय राजनीति के उस जख्म को हरा कर दिया, जो 30 सितंबर 2001 को ग्वालियर राजघराने के महाराज माधवराव सिंधिया के निधन के साथ लगा था।
इतिहास गवाह है कि जब-जब आसमान टूटा है, तब-तब देश ने अपने बड़े नेताओं को खोया है। बारामती का यह हादसा उसी पीड़ा की याद दिलाता है, जिसने कभी पूरे ग्वालियर को सात दिनों तक मौन में डुबो दिया था।
30 सितंबर 2001 को आसमान से टूटा था ग्वालियर का ताज
माधवराव सिंधिया 30 सितंबर 2001 को एक निजी विमान से उत्तर प्रदेश के मैनपुरी में आयोजित रैली को संबोधित करने जा रहे थे। उनके साथ विमान में कुछ नेता, पत्रकार और दो पायलट मौजूद थे। लेकिन यूपी के भैंसरोली गांव के पास सी-90 एयरक्राफ्ट अचानक क्रैश हो गया। इस भयावह हादसे में विमान में सवार माधवराव सिंधिया समेत सभी लोगों की मौके पर ही मौत हो गई।
बारिश, आग और बिखरा हुआ मलबा
जिस दिन विमान गिरा, उस दिन गांव में बारिश हो रही थी। बताया जाता है कि गिरने के बाद जमीन से टक्कर इतनी भयानक थी कि विमान का आधा हिस्सा अंदर में धंस गया, जबकि बाकी हिस्से में आग लग गई। चारों ओर धुआं, मलबा और सन्नाटा था मानो समय थम गया हो।
अटल बिहारी वाजपेयी हुए थे बेहद भावुक
हादसे की खबर मिलते ही तत्कालीन प्रधानमंत्री अटल बिहारी वाजपेयी सक्रिय हो गए थे। सिंधिया परिवार से उनका गहरा लगाव था। उन्होंने हादसे की जानकारी ली थी। वहीं, सिंधिया के निधन की खबर उनके लिए भी निजी क्षति जैसी थी। बाद में वे स्वयं अंतिम संस्कार में शामिल होने ग्वालियर पहुंचे थे।
ऐसे हुई थी महाराज के शव की पहचान
हादसे के बाद पुलिस और स्थानीय लोगों ने शवों को बाहर निकाला। भीषण आग के चलते बुरी तरह जले शवों की पहचान करना मुश्किल था। हालांकि माधवराव सिंधिया के शव की पहचान उनके गले में पहने मां दुर्गा के सोने के लॉकेट और उनके जूतों से की गई। यह दृश्य परिवार और पूरे देश के लिए दिल को चीर देने वाला था।
अंतिम यात्रा में आंसुओं का सैलाब
माधवराव सिंधिया की अंतिम यात्रा में ऐसा जनसैलाब उमड़ा, जिसे ग्वालियर ने पहले कभी नहीं देखा था। देश ही नहीं, विदेशों से भी लोग उन्हें अंतिम विदाई देने पहुंचे। विदेशी लोगों के आने के चलते शहर के सभी होटल भर गए थे, कई लोगों को घरों और सड़कों पर रात गुजारनी पड़ी।
राजनीति से समाज तक शोक
माधवराव सिंधिया ने राजनीति की शुरुआत जनसंघ से की थी और पहली बार ग्वालियर से सांसद बने थे। बाद में वे कांग्रेस में शामिल हुए। वे राजमाता विजयाराजे सिंधिया के पुत्र और ग्वालियर रियासत के महाराज थे। उनके निधन के बाद उनके बेटे ज्योतिरादित्य सिंधिया राजनीति में आए, जिन्होंने कांग्रेस से शुरुआत की और वर्तमान में भाजपा में रहते हुए केंद्र सरकार में मंत्री हैं।
7 दिन बंद रहा ग्वालियर
सिंधिया परिवार के करीबी वरिष्ठ पत्रकार केशव पांडेय के अनुसार, “महाराज का निधन ग्वालियर के लिए असहनीय आघात था। लोगों ने खुद ही दुकानें बंद कर दी थीं। करीब सात दिनों तक शहर पूरी तरह बंद रहा। कई घरों में चूल्हे तक नहीं जले।”
150 सांसद, एक मौन शहर
अंतिम संस्कार में कांग्रेस के शीर्ष नेतृत्व सहित करीब 150 सांसद शामिल हुए थे। प्रधानमंत्री अटल बिहारी वाजपेयी भी श्रद्धांजलि देने पहुंचे थे। उस दिन ग्वालियर सिर्फ एक शहर नहीं, बल्कि शोक में डूबा पूरा देश था।