बाजार में आए अरारोट युक्त रंग, नहीं होगा त्वचा को नुकसान

Update: 2019-03-16 19:07 GMT

जीएसटी ने बढ़ाए रंग और पिचकारी के दाम

ग्वालियर/न.सं.। होली का त्यौहार वसंत ऋतु में मनाया जाता है। हिन्दू पंचांग के अनुसार फाल्गुन मास की पूर्णिमा को यह त्यौहार मनाया जाता है। होली का नाम सुनते ही रंगों की याद आ जाती है। अधिकतर लोग त्वचा खराब होने के कारण होली के रंगों से बचते हैं, लेकिन इस बार इन रंगों से डरने की कोई जरूरत नहीं है। बाजार में इस बार अरारोट मिक्स गुलाल के विभिन्न रंग आए हुए हैं, जिनसे त्वचा भी खराब नहीं होती है और होली खेलने का आनंद भी लिया जा सकता है। बाजार में आए यह रंग सुगंधित भी हैं।

जीएसटी लगने से रंग हुए 40 प्रतिशत महंगे

होली के त्यौहार के लिए अब मात्र चार दिन ही शेष रह गए हैं। होली के लिए बाजार भी सजकर तैयार हो गए हैं। रंगों पर 18 प्रतिशत जीएसटी लगने, उत्पाद कम होने और कच्चा माल महंगा होने के कारण यह रंग 40 प्रतिशत तक महंगे हो गए हैं। जो रंग पिछले वर्ष 400 रुपए किलो था, वह आज 560 रुपए किलो तक महंगे हो गए हैं। जो गुलाल 100 रुपए किलो था, वह 140 रुपए किलो महंगा हो गया है।

बच्चों के लिए बाजार में मिक्की माउस की पिचकारी

होली खेलने का सबसे अधिक मजा छोटे-छोटे बच्चे जरूर लेते हैं। छोटे बच्चे रंगों के साथ रंग-बिरंगी पिचकारियों को भी अधिक पसंद करते हैं। होली के त्यौहार पर बच्चों के लिए बाजार में कार्टूनिस्ट मिक्की माउस, डोरिमोन, एंग्रीवर्डस, स्पाइडरमेन, बार्बीडोल, बाहुबली एवं मास्क जैसी पिचकारियां आई हुई हैं। यह पिचकारियां देखने में बहुत ही आकर्षक हैं। इन पिचकारियों की कीमत 5 से 500 रुपए तक है। जीएसटी के कारण पिचकारियां भी महंगी हैं।

इनका कहना है

'इस बार के रंग अरारोट मिक्स हैं, जो त्वचा को किसी प्रकार की हानि नहीं पहुंचाएंगे। जीएसटी के कारण रंग 40 प्रतिशत तक महंगे हैं।'

-व्ही.आर. अष्ठाना, रंग विक्रेता

'बच्चों के लिए 5 रुपए से लेकर 500 रुपए तक की पिचकारी है। बच्चों के लिए कार्टूनिस्ट पिचकारियों मंगवाई गई हैं। बड़ों के लिए इस बार खास रंग भी आए है।'

-गोपालदास, पिचकारी विक्रेता 

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