आबकारी लायसेंस के नवीनीकरण की दरें बढ़ाए जाने का...
भोपाल/विशेष संवाददाता। आबकारी विभाग द्वारा नई आबकारी नीति 2019-20 के लिए 20 प्रतिशत वृद्धि के साथ जारी किए गए लायसेंस नवीनीकरण और मदिरा की दरों और ड्यूटी का निर्धारण किए बिना लाटरी प्रक्रिया से शराब समूहों के आवंटन को लेकर दायर एक याचिका पर मंगलवार 19 मार्च को इंदौर उच्च न्यायालय की युगल पीठ ने आबकारी विभाग का पक्ष तो सुना, लेकिन निर्णय नहीं दिया। माना जा रहा है कि शराब ठेकेदारों की ओर से उच्च न्यायालय की एकल पीठ में दायर एक अन्य याचिका की सुनवाई के बाद न्यायालय दोनों ही मामलों में अपना निर्णय 25 मार्च के बाद सुना सकता है।
उल्लेखनीय है कि मध्यप्रदेश में सरकार बदलते ही नई सरकार में आबकारी विभाग ने ठेकेदारों के साथ विगत वर्ष हुए उस अनुबंध को तोड़ दिया है, जिसमें कहा गया था कि वित्तीय वर्ष 2018-19 में शराब समूहों की बोली लगाने वाले ठेकेदार निर्धारित शर्तों के आधार पर एवं उसी दर पर अगले वित्तीय वर्ष 2019-20 में भी संचालित करना चाहेंगे तो उन समूहों के लिए लॉटरी नहीं निकाली जाएगी। नई सरकार बदलते ही आई नई आबकारी नीति में प्रदेश में शराब समूहों को संचालित कर रहे ठेकेदारों को निर्देश दिए गए कि वर्तमान वर्ष में शराब समूहों को संचालित करने वाले शराब ठेकेदार अगर अगले वित्तीय वर्ष 2019-20 में अपने शराब समूहों को संचालित करना चाहते हैं तो उन्हें लायसेंस नवीनीकरण की राशि 20 प्रतिशत बढ़ाकर देनी होगी। आदेश में कहा गया कि 20 प्रतिशत राशि वद्धि के साथ लायसेंस नवीनीकरण के लिए जिन जलों के ठेकेदारों से 70 प्रतिशत या उससे अधिक राजस्व नहीं मिलेगा, ऐसे जिलों में लॉटरी के माध्यम से समूहों का पुन: आवंटन किया जाएगा। आबकारी विभाग के इस तरह के आदेश पर आपत्ति दर्ज कराते हुए इंदौर में एक व्यक्ति द्वारा उच्च न्यायालय की युगल पीठ में याचिका दायर की गई थी। इस याचिका पर न्यायालय के नोटिस का जवाब आबकारी विभाग को 19 मार्च को प्रस्तुत करना था। आबकारी विभाग यह मानकर चल रहा था कि न्यायालय उनके पक्ष में निर्णय देगा। इस कारण आबकारी आयुक्त ने विगत दिवस 70 प्रतिशत से कम राजस्व वाले सभी जिला आबकारी अधिकारियों/आबकारी उपायुक्तों और जिलाधीशों को निर्देशित किया कि फुटकर बिक्री की दुकानों/एकल समूहों 01 अप्रेल 2019 से 31 मार्च 2020 तक की अवधि के लिए 18 मार्च 2019 को सुबह 10:30 बजे से 19 मार्च की दोपहर 2:30 बजे तक लॉटरी में हिस्सा लेने वाले ठेकेदारों के फार्म जमा किए जाएं तथा शाम 3 बजे के बाद से लॉटरी निकाले जाने की कार्रवाई शुरू की जाए।
विभाग ठेकेदारों के फार्म तो जमा करा चुका है, लेकिन लॉटरी अभी नहीं खोली जा रही है। सूत्र बताते हैं कि न्यायालय के नोटिस में पेंच निकालकर अधिकारी लॉटरी फार्म जमा करने की तरह ही लॉटरी खोलने के प्रयास में भी हैं। लेकिन ऐसा किया तो यह न्यायालय के आदेश की अवमानना हो सकती है। इस कारण अधिकारी संशय में हैं कि एक अप्रेल से आवंटन किए जाने हैं। इस दौरान वह आखिर क्या निर्णय लें।
वहीं शासन के निर्णय के विरुद्ध शराब ठेकेदारों द्वारा भी इंदौर उच्च न्यायालय की एकल पीठ में एक अन्य याचिका भी दायर की है। इस याचिका पर 25 मार्च के बाद सुनवाई होनी है। इन दोनों ही मामलों में निर्णय होने में देरी होने से आबकारी विभाग के अधिकारी भारी तनाव में हैं।
इनका कहना है
विभाग ने अपना पक्ष न्यायालय में रख दिया है। निर्णय हेतु न्यायालय ने अभी तारीख नहीं दी है। हालांकि लॉटरी और आवंटन की विभागीय प्रक्रिया जारी रखी जाएगी। अंतिम फैसला न्यायालय के निर्णय के बाद लिया जाएगा।
-रजनीश श्रीवास्तव
आबकारी आयुक्त मप्र शासन