उज्जैन में 12 फरवरी से शुरू होगा 139 दिवसीय विक्रमोत्सव 2026
महाशिवरात्रि पर संगीतकार प्रीतम करेंगे महादेव की आराधना, 30 जून तक चलेंगी 41 से अधिक सांस्कृतिक गतिविधियां
भोपाल। सृष्टि सृजनकर्ता महादेव की आराधना के साथ उज्जैन में विक्रमोत्सव 2026 का भव्य शुभारंभ होने जा रहा है। यह 139 दिवसीय महोत्सव 12 फरवरी से 30 जून 2026 तक आयोजित किया जाएगा, जो सांस्कृतिक, सामाजिक और आर्थिक गतिविधियों का एक अद्वितीय संगम होगा। महोत्सव का औपचारिक शुभारंभ 15 फरवरी को होगा, जबकि प्रथम चरण की शुरुआत महाशिवरात्रि के अवसर पर सुप्रसिद्ध संगीतकार प्रीतम द्वारा महादेव की आराधना से की जाएगी।
संस्कृति विभाग के अपर मुख्य सचिव शिवशेखर शुक्ला ने शनिवार को भोपाल में आयोजित प्रेस वार्ता में यह जानकारी दी। उन्होंने बताया कि विक्रमोत्सव का यह आयोजन केवल एक उत्सव नहीं, बल्कि भारतीय कालगणना, सांस्कृतिक चेतना और जल संरक्षण जैसे विषयों को समर्पित एक राष्ट्रीय अभियान है।
सृष्टि निर्माण दिवस से जल गंगा संवर्धन अभियान तक
महाराजा विक्रमादित्य शोधपीठ के निदेशक श्रीराम तिवारी ने बताया कि विक्रमोत्सव का दूसरा प्रमुख चरण 19 मार्च से 30 जून 2026 तक चलेगा, जिसमें जल गंगा संवर्धन अभियान के तहत पंच महाभूतों में से जल तत्व के संरक्षण और संवर्धन पर विशेष ध्यान दिया जाएगा। इस दौरान देशभर से आए 4 हजार से अधिक कलाकार 41 से ज्यादा बहुआयामी गतिविधियों में अपनी प्रस्तुतियां देंगे।
देश-दुनिया की सांस्कृतिक गतिविधियों का संगम
विक्रमोत्सव 2026 के अंतर्गत शिवरात्रि मेलों का समायोजन, महाकाल वन मेला, कृषि मेला, कलश यात्रा, विक्रम व्यापार मेला, शिवोत्सव, शिवपुराण, अनादि पर्व, विक्रम नाट्य समारोह, पुतुल (कठपुतली) समारोह, चित्र प्रदर्शनियां, संगोष्ठियां, वैचारिक संगम, कवि सम्मेलन, ड्रोन शो और ख्यात कलाकारों की संगीतमय प्रस्तुतियां शामिल होंगी।
इस अवसर पर संगीतकार प्रीतम और विशाल मिश्रा की प्रस्तुतियां भी विशेष आकर्षण रहेंगी। साथ ही भारतीय कालगणना पर आधारित विक्रम पंचांग सहित कई महत्वपूर्ण पुस्तकों का लोकार्पण किया जाएगा।
दशहरा मैदान में लगेगा महाकाल वन मेला
विक्रमोत्सव के तहत 12 से 16 फरवरी तक उज्जैन के दशहरा मैदान में महाकाल वन मेला आयोजित किया जाएगा। इस मेले में हर्बल उत्पादों की प्रदर्शनी, पारंपरिक औषधीय ज्ञान का प्रदर्शन, आयुर्वेदिक चिकित्सकों द्वारा नि:शुल्क स्वास्थ्य परीक्षण और सांस्कृतिक कार्यक्रम आयोजित किए जाएंगे।
60 से अधिक शिव मंदिरों में महादेव पर्व
महाशिवरात्रि के अवसर पर प्रदेश के 60 से अधिक प्रमुख शिव मंदिरों में महादेव पर्व के अंतर्गत मेलों का आयोजन किया जाएगा। इसमें मंदिरों की साज-सज्जा, स्वच्छता अभियान और सांस्कृतिक गतिविधियां शामिल रहेंगी।
पौराणिक और ऐतिहासिक विषयों पर प्रदर्शनियां
महाराजा विक्रमादित्य शोधपीठ और कालिदास संस्कृत अकादमी परिसर में पौराणिक, आध्यात्मिक, ऐतिहासिक और जनजातीय विषयों पर आधारित 7 विशेष प्रदर्शनियां लगाई जाएंगी। इनमें सम्राट विक्रमादित्य, अयोध्या, आर्य भारत, महाभारतकालीन अस्त्र-शस्त्र, 84 महादेव, जनजातीय देवलेख और राममाला प्रमुख हैं।
विक्रम नाट्य समारोह और पुतुल महोत्सव
दस दिवसीय विक्रम नाट्य समारोह में राष्ट्रीय नाट्य विद्यालय की चर्चित प्रस्तुतियां – अभिज्ञान शाकुंतलम्, चारुदत्तम, भरतवाक्य, जटायु वधम सहित अन्य नाटकों का मंचन होगा। वहीं 25 से 28 फरवरी के बीच आयोजित पुतुल समारोह में भारत की विभिन्न कठपुतली शैलियों के माध्यम से ऐतिहासिक और पौराणिक कथाओं की प्रस्तुति दी जाएगी।
कवि सम्मेलन और शिव पुराण आयोजन
1 मार्च को जनजातीय भाषाओं और बोलियों का अखिल भारतीय कवि सम्मेलन आयोजित होगा। अंतरराष्ट्रीय महिला दिवस की पूर्व संध्या पर नारी शक्ति कवयित्री सम्मेलन भी आयोजित किया जाएगा। 13 से 17 मार्च तक शिव पुराण पर आधारित चित्र प्रदर्शनी, लोकनृत्य और नृत्य नाटिकाओं का आयोजन होगा।
अंतरराष्ट्रीय पौराणिक फिल्म महोत्सव
13 से 17 मार्च 2026 तक उज्जैन में आयोजित होने वाले अंतरराष्ट्रीय पौराणिक फिल्म महोत्सव में 25 से अधिक देशों की फिल्मों का प्रदर्शन किया जाएगा। इसमें महाभारत पर आधारित फिल्मों को विशेष स्थान दिया जाएगा।
देश का सबसे बड़ा सम्मान– सम्राट विक्रमादित्य अलंकरण
मध्यप्रदेश शासन द्वारा ₹1 करोड़ 1 लाख की राशि वाला सम्राट विक्रमादित्य अंतरराष्ट्रीय अलंकरण स्थापित किया गया है, जो देश का सबसे बड़ा सम्मान होगा। इसके अलावा 21 लाख रुपये का राष्ट्रीय सम्मान और तीन राज्य स्तरीय सम्मान भी प्रदान किए जाएंगे।