भोजपुर में महाशिवरात्रि पर तीन दिन तक गूंजेगा आस्था का स्वर, 15 से महादेव-भोजपुर महोत्सव
महाशिवरात्रि पर भोजपुर में 15 से 17 फरवरी तक महादेव-भोजपुर महोत्सव, लोकगायन, नृत्य नाटिका, भजन और कवि सम्मेलन होंगे।
भोपाल। महाशिवरात्रि के पावन अवसर पर इस बार भोजपुर की ऐतिहासिक धरा एक बार फिर शिवभक्ति, लोकआस्था और कला-सौंदर्य की जीवंत छवियों से भर उठेगी। मध्यप्रदेश शासन के संस्कृति विभाग द्वारा आयोजित तीन दिवसीय ‘महादेव-भोजपुर महोत्सव’ का शुभारंभ 15 फरवरी से होगा। भोजपुर शिव मंदिर प्रांगण में होने वाला यह आयोजन केवल एक सांस्कृतिक कार्यक्रम नहीं, बल्कि आस्था और अभिव्यक्ति का ऐसा संगम है, जहां लोकजीवन, संगीत और साधना एक साथ सांस लेते दिखाई देते हैं।
महादेव की नगरी में सांस्कृतिक उत्सव
संस्कृति विभाग और जिला प्रशासन रायसेन के सहयोग से आयोजित यह महोत्सव 15 से 17 फरवरी 2026 तक प्रतिदिन शाम 6.30 बजे से आयोजित किया जाएगा। शिव-शक्ति, लोक परंपरा और शास्त्रीय-सुगम कलाओं का यह उत्सव भोजपुर मंदिर परिसर को तीन दिनों तक सांस्कृतिक चेतना के केंद्र में बदल देगा।
15 फरवरी: लोकगायन और भक्ति की गूंज
महोत्सव के पहले दिन सागर से आए ऋषि विश्वकर्मा अपने लोकगायन से वातावरण को भक्तिरस में सराबोर करेंगे। इसके बाद सागर के ही उमेश नामदेव द्वारा प्रस्तुत बधाई और बरेदी लोकनृत्य लोकजीवन की सहज खुशियों को मंच पर उतारेंगे। संध्या का प्रमुख आकर्षण मुंबई के प्रसिद्ध भजन गायक लखबीर सिंह लक्खा होंगे, जिनकी शिवभक्ति से भरी प्रस्तुति भक्तों को देर तक स्मरण रहेगी।
16 फरवरी: नृत्य नाटिका और सुगम संगीत
दूसरे दिन भोपाल की शीला त्रिपाठी लोकगायन प्रस्तुत करेंगी। इसके बाद मुंबई की भावना शाह और साथी कलाकारों द्वारा शिव महिमा पर आधारित नृत्य नाटिका का मंचन किया जाएगा, जिसमें भाव, नृत्य और संगीत का सुंदर समन्वय देखने को मिलेगा। रात्रि की अंतिम प्रस्तुति में मुंबई की सुप्रसिद्ध पार्श्व गायिका महालक्ष्मी अय्यर अपने सुगम संगीत से श्रोताओं को भावलोक की यात्रा पर ले जाएंगी।
17 फरवरी: शिवभक्ति और कवि सम्मेलन
महोत्सव के अंतिम दिन भोपाल के बलराम पुरोहित लोकगायन के माध्यम से शिवभक्ति की अनुभूति कराएंगे। इसके बाद आकृति जैन और उनके सहयोगी कलाकारों द्वारा प्रस्तुत शिव-केंद्रित नृत्य नाटिका आध्यात्मिक ऊर्जा से वातावरण को आलोकित करेगी। समापन अवसर पर आयोजित अखिल भारतीय कवि सम्मेलन में अशोक चक्रधर, दिनेश बावरा, प्रताप फौजदार, गजेन्द्र सोलंकी, रुचि चतुर्वेदी, पूनम वर्मा और मनु वैशाली जैसे प्रतिष्ठित कवि अपनी रचनाओं से काव्यरस की अविरल धारा बहाएंगे।
आस्था, कला और लोकचेतना का संगम
भोजपुर का यह महोत्सव न केवल सांस्कृतिक पहचान को सशक्त करता है, बल्कि नई पीढ़ी को लोकपरंपराओं से जोड़ने का भी काम करता है। शिव मंदिर की प्राचीन शिलाओं के बीच जब सुर, ताल और शब्द गूंजते हैं, तब भोजपुर सिर्फ एक स्थल नहीं, एक अनुभूति बन जाता है।