भोपाल–रामगंज मंडी नई रेल लाइनः MP–राजस्थान सीधे रेल नेटवर्क से जुड़ने को तैयार
भोपाल–रामगंज मंडी नई रेल लाइन में 169 किमी काम पूरा। MP और राजस्थान सीधे रेल नेटवर्क से जुड़ेंगे, इस साल पूरा होने की उम्मीद।
भोपाल। मध्यप्रदेश और राजस्थान को सीधे रेल नेटवर्क से जोड़ने वाली बहुप्रतीक्षित भोपाल–रामगंज मंडी नई रेल लाइन परियोजना अब निर्णायक मोड़ पर पहुंचती दिख रही है। निर्माण कार्य लगातार प्रगति पर है और इसके पूरा होने से दोनों राज्यों के सीमावर्ती इलाकों में विकास की रफ्तार तेज़ होने की उम्मीद है।
276 किमी में से 169 किमी काम पूरा, इस साल के अंत तक पूरी होने की उम्मीद
कुल 276 किलोमीटर लंबी इस नई रेल लाइन में से अब तक 169 किलोमीटर का काम पूरा हो चुका है. शेष 107 किलोमीटर रेलखंड का निर्माण इस साल के अंत तक पूरा करने का लक्ष्य रखा गया है। पश्चिम मध्य रेलवे के सीनियर डीसीएम सौरभ कटारिया ने बताया कि इस परियोजना के तहत कुल 27 स्टेशन विकसित किए जा रहे हैं। इनमें रामगंज मंडी, जुल्मी, झालावाड़, झालरापाटन, जूनाखेड़ा, अमेठा, अकलेरा, पचोला, घटोली, नयागांव, भोजपुर, देवपुरा, खिलचीपुर, राजगढ़, नरसिंहपुर, ब्यावरा, पीपलखेड़ा, सोनकच्छ, नरसिंहगढ़, जमुनियागंज, कुरावर, श्यामपुर, दुराहा, जरखेड़ा, मुगलियाहाट, संत हिरदाराम नगर और निशातपुरा डी केबिन शामिल हैं।
3,035 करोड़ की लागत, कई बड़े स्ट्रक्चर शामिल
भोपाल–रामगंज मंडी नई रेल लाइन परियोजना की अनुमानित लागत करीब 3,035 करोड़ रुपये बताई गई है। कुल 276 किलोमीटर में से निशातपुरा डी केबिन से ब्यावरा तक 111 किलोमीटर रेलखंड भोपाल मंडल के अंतर्गत आता है, जबकि रामगंज मंडी से नरसिंहपुर तक 165 किलोमीटर का खंड कोटा मंडल के अधीन है। इस परियोजना में कुल 4 टनल, 4 महत्वपूर्ण ब्रिज, 34 मुख्य पुल और 171 अंडरपास बनाए जा रहे हैं जो इंजीनियरिंग के लिहाज से भी इसे खास बनाते हैं। रेलवे अधिकारियों के मुताबिक, यह लाइन यात्रियों के साथ-साथ माल परिवहन के लिहाज से भी बेहद अहम साबित होगी।
कहां तक पूरा हुआ काम
रेलवे के अनुसार अभी तक निशातपुरा डी केबिन से श्यामपुर तक 42 किलोमीटर और कोटा मंडल के अंतर्गत रामगंज मंडी से खिलचीपुर तक 127 किलोमीटर रेल लाइन का कार्य पूरा किया जा चुका है। बाकी बचे हिस्से पर काम तेजी से जारी है स्थानीय स्तर पर माना जा रहा है कि इस रेल लाइन के शुरू होने से भोपाल, मालवा और हाड़ौती क्षेत्र के बीच दूरी कम होगी और व्यापार, रोजगार व पर्यटन को भी सीधा फायदा मिलेगा।