विश्व की इकलौती अष्टमुखी पशुपतिनाथ लोक का लोकार्पण, उज्जैन के तर्ज पर हुआ निर्माण
मंदसौर में 25 करोड़ से बने पशुपतिनाथ लोक का लोकार्पण, अष्टमुखी महादेव प्रतिमा बनी श्रद्धा का केंद्र।
मंदसौर: मध्यप्रदेश के धार्मिक और सांस्कृतिक इतिहास में 29 जनवरी 2026 का दिन एक नई पहचान जोड़ गया। मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने मंदसौर में शिवना नदी के पावन तट पर बने पशुपतिनाथ लोक का लोकार्पण किया। करीब 25 करोड़ रुपये की लागत से निर्मित यह भव्य लोक अब श्रद्धालुओं के लिए एक नए आध्यात्मिक केंद्र के रूप में उभरा है।
अष्टमुखी भगवान पशुपतिनाथ मंदिर परिसर में विकसित यह लोक न केवल आस्था का प्रतीक है, बल्कि स्थापत्य और शिल्पकला का भी अद्भुत उदाहरण है। लोकार्पण के साथ ही पशुपतिनाथ लोक का शंखनाद हुआ और श्रद्धालुओं के लिए इसके द्वार खोल दिए गए।
महाकाल लोक की तर्ज पर विकसित भव्य कॉरिडोर
15 बीघा क्षेत्र में फैला पशुपतिनाथ लोक, उज्जैन के महाकाल लोक की तर्ज पर डिजाइन किया गया है। राजस्थान के लाल पत्थरों पर की गई बारीक नक्काशी इसकी भव्यता को और भी खास बनाती है। प्रवेश करते ही अयोध्या शैली के विशाल द्वार भक्तों का स्वागत करते हैं।
लोक के भीतर शिव लीलाओं पर आधारित आकर्षक म्यूरल वॉल, सुंदर गार्डन, पवित्र सरोवर और भक्तों के विश्राम के लिए सुव्यवस्थित स्थान बनाए गए हैं। 22 फीट ऊंचा त्रिनेत्र और रुद्राक्ष पूरे परिसर का मुख्य आकर्षण हैं। सुरक्षा व्यवस्था के लिए आधुनिक सीसीटीवी निगरानी की गई है।
विश्व की इकलौती अष्टमुखी महादेव प्रतिमा
पशुपतिनाथ मंदिर की सबसे बड़ी पहचान यहां स्थापित अष्टमुखी भगवान शिव की प्रतिमा है, जो दुनिया में अपनी तरह की इकलौती मानी जाती है। एक ही विशाल पत्थर को तराशकर बनाई गई यह प्रतिमा करीब 46 क्विंटल वजनी है और प्राचीन भारतीय शिल्पकला का उत्कृष्ट उदाहरण है।
नेपाल के काठमांडू स्थित पशुपतिनाथ मंदिर में जहां चतुर्मुखी प्रतिमा है, वहीं मंदसौर की यह अष्टमुखी प्रतिमा मानव जीवन की आठ अवस्थाओं और भावों को दर्शाती है, जो इसे अत्यंत दुर्लभ बनाती है।
1500 साल पुराना इतिहास और संरक्षण
इतिहासकारों के अनुसार यह दिव्य प्रतिमा लगभग 1500 वर्ष पुरानी (575 ईस्वी, विक्रम संवत 575) है। सन 1940 में शिवना नदी से यह प्रतिमा चमत्कारिक रूप से प्रकट हुई थी, जिसके दर्शन पहले उदाजी धोबी को हुए थे।
करीब 21 वर्षों तक प्रतिमा नदी तट पर रही, इसके बाद 1961 में मंदिर का निर्माण कर विधिवत प्राण-प्रतिष्ठा की गई। हाल ही में भारतीय पुरातत्व सर्वेक्षण (ASI) द्वारा प्रतिमा का संरक्षण कार्य कराया गया है। प्रतिमा की पुरानी आभा लौटाने के लिए बंगाल के विशेषज्ञों की सेवाएं ली गईं।
फिलहाल संरक्षण कार्य के चलते गर्भगृह में प्रवेश बंद है, लेकिन श्रद्धालु बाहर से दर्शन कर सकते हैं। करीब 2 साल 4 महीने की मेहनत और 100 मजदूरों के श्रम से पशुपतिनाथ लोक को आकार दिया गया है।
पशुपतिनाथ: कल्याण और मोक्ष का प्रतीक
हिंदू धर्म में भगवान शिव को पशुपति, यानी समस्त जीवों का स्वामी कहा गया है। पुराणों के अनुसार पशुपतिनाथ का स्वरूप कल्याणकारी है और उनके दर्शन से पापों का नाश तथा आध्यात्मिक शांति प्राप्त होती है।
मान्यता है कि मंदसौर की अष्टमुखी प्रतिमा भगवान शिव के आठ रूपों के साथ धर्म, अर्थ, काम और मोक्ष के मार्ग को भी दर्शाती है। श्रद्धालुओं का विश्वास है कि यहां दर्शन मात्र से जन्म-मरण के बंधन से मुक्ति और मानसिक शांति प्राप्त होती है।