ब्राउन या व्हाइट शुगर, कौन-सी है हेल्थ के लिए बेस्ट?

व्हाइट या ब्राउन शुगर कौनसी हेल्थ के लिए ज्यादा फायदेमंद, क्या सच में ब्राउन शुगर खानें से डायबिटीज नहीं होती?

Update: 2026-02-06 11:35 GMT

क्या आप भी शुगर को लेकर कंफ्यूज हैं? ब्राउन शुगर या व्हाइट शुगर कौन-सी आपकी हेल्थ के लिए ज़्यादा बेहतर होती है? इस आर्टिकल में हम बताएंगे कि कौन-सी शुगर आपकी हेल्थ के लिए अच्छी है और क्या सच में ब्राउन शुगर को खाने से डायबिटीज का प्रॉब्लम नहीं होता? 

घर में शादी हो या घर में कोई खुशखबरी हो मिठाई से ही मुंह मिठा होता है। हम सब की जिंदगी में शुगर लगभग रोज ही खाते हैं। सुबह की चाय हो या रात के डिनर में डेजर्ट। कुछ भी शुगर के बिना नहीं बनता और हेल्दी लाइफस्टाइल तो सभी जीना चाहते हैं। लेकिन सवाल यह उठता है कि हमारी बॉडी के लिए व्हाइट शुगर या ब्राउन शुगर कौन सी शुगर अच्छी होती है। कुछ लोगों को लगता है कि ब्राउन शुगर ज्यादा नेचुरल और फायदेमंद होती है, लेकिन सच्चाई कुछ और ही है।

डायबिटीज पेशेंट के लिए कौनसी शुगर खतरा?  

व्हाइट शुगर और ब्राउन शुगर में कलर और टेस्ट का फर्क होने के बावजूद, ये दोनों शुगर बॉडी पर लगभग एक जैसा असर डालती हैं। दोनों ही शुगर डायबिटीज़ के पेशेंट के लिए नुकसानदायक (harmful) होती हैं, क्योंकि दोनों में कैलोरी और कार्बोहाइड्रेट की मात्रा लगभग सिमिलर होती है। डायबिटीज़ के पेशेंट को इन दोनों में से किसी भी शुगर को अपनी डाइट में शामिल नहीं करना चाहिए, क्योंकि इन्हें खाने से ब्लड शुगर लेवल बढ़ सकता है।

व्हाइट और ब्राउन शुगर कैसे बनती हैं?

व्हाइट और ब्राउन शुगर दोनों गन्ने से तैयार की जाती हैं। अंतर सिर्फ प्रोसेसिंग का होता है।

  • व्हाइट शुगर को पूरी तरह रिफाइन किया जाता है। जिससे मोलासेस निकाल दिया जाता है। वहीं ब्राउन शुगर में रिफाइंड शुगर होती है। जिसमें बाद में सीमित मात्रा (limited quantity) में मोलासेस मिलाया जाता है।
  • मोलासेस की वजह से ब्राउन शुगर का कलर ब्राउन, टेक्सचर नम (moist) और टेस्ट हल्का कैरामेल जैसा होता है। हालांकि न्यूट्रिशन के लिहाज से दोनों में कोई बड़ा फर्क नहीं होता।

क्या ब्राउन शुगर ज्यादा न्यूट्रिशन होती है?

अक्सर यह माना जाता है कि ब्राउन शुगर में मिनरल्स होते हैं, लेकिन इनकी क्वांटिटी इतनी कम होती है कि इससे बॉडी को कोई खास फायदा नहीं मिलता। यानी ब्राउन शुगर को न्यूट्रिशन तत्वों (elements) का अच्छा सोर्स मानना सही नहीं है। दोनों की न्यूट्रिशन वैल्यू में बहुत ज़्यादा अंतर नहीं होता हैं। क्योंकि दोनों में कार्बोहाइड्रेट और कैलोरी लगभग सिमिलर होती है। उदाहरण के लिए आपको बता दें, अगर आप 1 चम्मच व्हाइट शुगर खाते हैं, तो आपकी बॉडी में 16 कैलोरी जाती हैं। वहीं 1 चम्मच ब्राउन शुगर खाने से लगभग 15 से17 कैलोरी आपकी बॉडी में जाती हैं। 

ब्लड शुगर पर दोनों का असर

व्हाइट और ब्राउन शुगर दोनों ही ब्लड शुगर लेवल को बड़ी तेजी से बढा देती हैं। इनमें ग्लूकोज और कार्बोहाइड्रेट की मात्रा लगभग इक्वल होती है। ब्राउन शुगर में थोड़े मिनरल्स जैसे आयरन और कैल्शियम होते हैं, लेकिन ये ब्लड शुगर को कंट्रोल नहीं करते और ज्यादा सेवन करने पर इंसुलिन रेजिस्टेंस का खतरा बढ़ता है।

वजन बढ़ने से क्या है कनेक्शन?

जब हम व्हाइट या ब्राउन शुगर खाते हैं, तो यह जल्दी पचकर ब्लड शुगर लेवल बढ़ाती है। अगर शुगर से मिली ऊर्जा खर्च नहीं होती, तो वह फैट के रूप में बॉडी में जमा हो जाती है और दोनों ही शुगर वेट गेन होता है। 

चाय-कॉफी में ब्राउन शुगर लेना सही है?

चाय या कॉफी में ब्राउन शुगर डालने से सिर्फ टेस्ट बदलता है। हेल्थ के हिसाब से इनको खानें से कोई खास फायदा नहीं होता। बेहतर होगा कि शुगर की क्वांटिटी को ही कम किया जाए। ज्यादा शुगर अपका वेट बढ़ायेगी, डायबिटीज की प्रॉब्लम भी हो सकती है और हार्ट से जुड़ी बीमारियां भी हो सकती है। 

डॉक्टरों का कहाना है कि जितना हो सके शुगर डेली डाइट में कम कर दें। दिन में 1 से 2 चम्मच से ज्यादा एडेड शुगर नहीं लेनी चाहिए। बेहतर हेल्थ के लिए शुगर के कलर बदलने से ज्यादा जरूरी है उसकी क्वांटिटी को कंट्रोल करना हैं। 

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