डेली नहाना क्यों है जरूरी? सिर्फ सफाई ही नहीं, ये हैं मेंटल और फिजिकल फायदे
आखिर क्यों बोला जाता है कि रोज नहाना चाहिए? हमारें जीवन में नहाने का क्या है महत्व? जानें इस आर्टिकल में।
आज की तेज़-तर्रार जिंदगी में हर काम जल्दबाजी में किया जा रहा है, और अक्सर खुद के लिए समय निकालना भी मुश्किल हो गया है। इतनी बिजी लाइफ होने की वजह से इंसान खाना भी आराम से नहीं खा पाता है। खाने के साथ-साथ सही से नहाने तक के लिए लोगों के पास समय नहीं है। नहाना सिर्फ शरीर की सफाई ही नहीं करता, बल्कि मन को भी तरोताजा करता है। पानी की नर्म लहरों से तन और मन दोनों की एनर्जेटिक महसूस करते है। आयुर्वेद के अनुसार, नहाना एक छोटा सा संस्कार है जो हमें ताज़गी, स्वास्थ्य और अंदर से शुद्धता देता है।
अक्सर लोग सोचते हैं कि नहाना सिर्फ एक डेली का काम है, जो बॉडी की सफाई करता है। लेकिन आयुर्वेद में स्नान को केवल शारीरिक (फिजिकल) स्वच्छता (क्लीनलीनेस) तक ही नहीं माना गया। इसे 'संस्कार' और 'चिकित्सा' दोनों माना गया है, जो बॉडी के साथ-साथ माइंड की भी सफाई (क्लीनिंग) करता है।
तन से लेकर मन तक स्नान करने के लाभ
रोजाना नहाने से न सिर्फ बॉडी की गंदगी दूर करता है, बल्कि मन भी एनर्जी और फ्रेशनेस से भर जाता है। इसके और भी कई लाभ हैं:
- डाइजेशन सिस्टम ( पाचन ) में भी सुधार होता है।
- आलस (सुस्ती) दूर होता है और थकान (तिरेदनेस) कम होती है।
- इससे मन हैप्पी (प्रसन्न) और पॉजिटिव (सकारात्मक) बना रहता है।
- नेगेटिव एनर्जी दूर रहती है।
- ब्लड सर्कुलेशन (रक्त संचार) को बेहतर करता है।
आयुर्वेद में कहा गया है कि रोजाना नहाने से मेटाबॉलिज्म (अग्नि) बैलेंस्ड रहता है और बॉडी टेम्परेचर कंट्रोल्ड रहता है। जब शरीर पर पानी पड़ता है, तो ब्लड सर्कुलेशन तेज़ होता है और डाइजेशन पावर एक्टिव होती है।
मेन्टल हेल्थ पर असर
नहाने से मेन्टल हेल्थ अच्छी होती है। तनाव (टेंशन) कम होता है और बॉडी में कोर्टिसोल का लेवल कम होता है। साथ ही एंडोर्फिन हार्मोन का लेवल बढ़ता है, जो मन को खुश और आरामदायक (कम्फर्टेबले) बनाता है। यदि नींद की समस्या हो, तो गुनगुने पानी से नहाने से नर्वस सिस्टम शांत होता है और नींद अच्छी आती है। यदि आप पूर्ण रूप से स्नान न कर पाए, तो कम से कम पैरों को गुनगुने पानी में कुछ समय डुबोकर रखना भी फायदेमंद होता है।
सही स्नान का तरीका
आयुर्वेद में स्नान के तीन मुख्य नियम (रूल) बताए गए हैं:
अभ्यंग (तेल से मालिश): नहाने से 15 मिनट पहले हल्का तेल लगाकर मालिश करें। यह बॉडी को सॉफ्ट और रिलैक्स्ड बनाता है।
उबटन का प्रयोग: ये आयुर्वेद की एक ट्रेडिशनल प्रोसेस है। जिसमें शरीर की मालिश होती है, गरम तेल और जड़ी-बूटियों के उबटन से, फिर शुद्धिकरण स्नान किया जाता है।
मंत्रोच्चार: स्नान के दौरान सकारात्मक (पॉजिटिव) मंत्र का उच्चारण करें, यह न केवल मानसिक (मेन्टल) शांति देता है बल्कि पॉजिटिव एनर्जी बनाये रखता है।
हमारे जीवन में खाना, पानी, नींद और हवा की तरह रोजाना नहाना भी बहुत जरूरी है। नहाने से हमें सिर्फ ताजगी (फ्रेशनेस) और स्वच्छता (क्लीनलीनेस) ही नहीं मिलती, बल्कि यह हमारी एनर्जी और एक्ससिटेमेंट को भी बढ़ाता है। जीवन में हर काम महत्वपूर्ण होता है, लेकिन अगर हम अपने सभी काम सही समय पर और अच्छे ढंग से कर लेते हैं, तो हमें अपने लिए थोड़ी देर निकालकर नहाना नहीं भूलना चाहिए। यह हमारे फिजिकल और मेन्टल हेल्थ के लिए बेहद जरूरी हैं।