अमेरिका को करारा जवाब: ‘सर’ वाले दावे से लेकर 500 प्रतिशत टैरिफ तक उड़ाईं धज्जियां
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को लेकर अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के बयानों और भारत पर 500 प्रतिशत टैरिफ की संभावित धमकी के बीच भारत ने दो टूक और सख्त प्रतिक्रिया दी है। विदेश मंत्रालय ने न केवल ट्रंप के उस दावे को खारिज किया, जिसमें उन्होंने कहा था कि प्रधानमंत्री मोदी ने उन्हें ‘सर’ कहकर संबोधित किया, बल्कि ऊर्जा खरीद और भारत-अमेरिका व्यापार समझौते को लेकर किए गए अमेरिकी दावों को भी तथ्यहीन बताया।
ट्रंप ने हाल ही में दावा किया था कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने उनसे मुलाकात की इच्छा जताते हुए कहा था—“सर, क्या मैं आपसे मिल सकता हूं?” इस बयान पर भारत के विदेश मंत्रालय ने साफ शब्दों में कहा कि यह दावा वास्तविकता से परे है। विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता रणधीर जायसवाल ने साप्ताहिक मीडिया ब्रीफिंग में कहा, “प्रधानमंत्री मोदी और राष्ट्रपति ट्रंप के बीच मित्रतापूर्ण और आपसी सम्मान पर आधारित संबंध हैं। दोनों नेताओं ने हमेशा राजनयिक मर्यादाओं के तहत एक-दूसरे को संबोधित किया है।” उन्होंने स्पष्ट किया कि इस तरह के व्यक्तिगत संबोधन को लेकर की गई टिप्पणियां भारत-अमेरिका संबंधों की वास्तविक प्रकृति को नहीं दर्शातीं।
अपाचे हेलीकॉप्टर पर डोनाल्ड ट्रंप का दावा और हकीकत
ट्रंप ने कहा कि भारत ने अमेरिका से 68 अपाचे हेलीकॉप्टर का ऑर्डर दिया था और डिलीवरी में देरी को लेकर प्रधानमंत्री मोदी उनसे मिलने आए थे। हालांकि, आधिकारिक आंकड़े इस दावे को गलत साबित करते हैं। तथ्यों के अनुसार, भारत ने अमेरिका से कुल 28 एएच-64ई अपाचे गार्जियन हेलीकॉप्टर खरीदे हैं, जिनकी डिलीवरी दिसंबर 2025 तक पूरी होनी है। इसके अलावा भारत ने 15 सीएच-47एफ चिनूक हेलीकॉप्टर भी खरीदे थे, जिनकी डिलीवरी 2019-20 के बीच पूरी हो चुकी है।
500 प्रतिशत टैरिफ की धमकी पर भारत की दो टूक
अमेरिका में एक बिल के तहत भारत, चीन और ब्राजील जैसे देशों पर 500 प्रतिशत तक टैरिफ लगाने की चर्चा है। यह बिल अमेरिकी सीनेटर लिंडसे ग्राहम ने पेश किया है, जिसे ट्रंप का समर्थन हासिल है। अमेरिका का आरोप है कि भारत रूस से सस्ता तेल खरीदकर उसके युद्ध प्रयासों को फंड कर रहा है। इस पर विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता रणधीर जायसवाल ने स्पष्ट किया कि भारत की ऊर्जा नीति पूरी तरह बाजार आधारित है। उन्होंने कहा कि ऊर्जा से जुड़े भारत के फैसले वैश्विक बाजार की परिस्थितियों को ध्यान में रखकर लिए जाते हैं।
ट्रेड डील को लेकर अमेरिकी मंत्री का दावा भी खारिज
अमेरिकी वाणिज्य मंत्री हॉवर्ड लुटनिक ने दावा किया था कि प्रधानमंत्री मोदी ने राष्ट्रपति ट्रंप से फोन पर बात नहीं की, इसलिए भारत-अमेरिका ट्रेड डील आगे नहीं बढ़ पाई। विदेश मंत्रालय ने इस बयान को भी सिरे से खारिज कर दिया।
रणधीर जायसवाल ने कहा, “यह कहना गलत है कि बातचीत फोन कॉल की कमी की वजह से रुकी। भारत और अमेरिका 13 फरवरी 2025 से द्विपक्षीय व्यापार समझौते पर बातचीत कर रहे हैं। दोनों देशों के बीच कई दौर की चर्चा हुई है और कई बार हम समझौते के काफी करीब पहुंचे हैं।” उन्होंने यह भी स्पष्ट किया कि 2025 में प्रधानमंत्री मोदी और राष्ट्रपति ट्रंप के बीच आठ बार फोन पर बातचीत हो चुकी है, जिनमें रणनीतिक साझेदारी, व्यापार और वैश्विक मुद्दों पर चर्चा हुई।
दबाव की राजनीति स्वीकार नहीं
भारत ने साफ कर दिया है कि वह तथ्यों, आपसी सम्मान और राष्ट्रीय हितों के आधार पर ही अपने फैसले करेगा। विदेश मंत्रालय के सख्त और स्पष्ट रुख से यह संकेत मिला है कि भारत दबाव की राजनीति को स्वीकार करने वाला नहीं है।