AI से जैविक आतंकवाद का खतरा: बिल गेट्स की चेतावनी ने बढ़ाई चिंता

बिल गेट्स ने चेतावनी दी है कि ओपन-सोर्स AI टूल्स का गलत इस्तेमाल कर गैर-सरकारी समूह जैविक आतंकवाद के हथियार विकसित कर सकते हैं।

Update: 2026-01-10 10:30 GMT

भोपाल। आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस को लेकर दुनिया जहां संभावनाओं की बात कर रही है वहीं माइक्रोसॉफ्ट के सह-संस्थापक बिल गेट्स ने इसका एक डरावना पहलू सामने रखा है. उनका कहना है कि अगर एआई पर नियंत्रण नहीं रखा गया तो इसका इस्तेमाल जैविक आतंकवाद जैसे गंभीर खतरों के लिए किया जा सकता है ।

ओपन-सोर्स AI बन सकता है खतरे की जड़

बिल गेट्स ने अपने सालाना पत्र ‘Footnotes with Optimism’ में चेतावनी दी कि गैर-सरकारी समूह ओपन-सोर्स एआई टूल्स की मदद से जैविक हथियार विकसित करने की कोशिश कर सकते हैं एआई भले ही समाज को अभूतपूर्व तरीके से बदल रहा हो, लेकिन इसके गलत इस्तेमाल की कीमत पूरी मानवता को चुकानी पड़ सकती है।

महामारी से भी बड़ा खतरा?

गेट्स ने अपने पत्र में 2015 की एक पुरानी TED टॉक का जिक्र भी किया जिसमें उन्होंने महामारी को लेकर दुनिया की तैयारी पर सवाल उठाए थे उन्होंने लिखा- अगर हम कोविड-19 के लिए बेहतर तरीके से तैयार होते, तो मानवीय पीड़ा को काफी हद तक कम किया जा सकता था

उनके अनुसार प्राकृतिक महामारी के मुकाबले अब इससे भी बड़ा खतरा यह है कि कोई समूह जानबूझकर एआई की मदद से जैविक हथियार तैयार कर दे ।

AI पर फैसले सोच-समझकर लेने की जरूरत

बिल गेट्स का मानना है कि कृत्रिम बुद्धिमत्ता के विकास नियंत्रण और उपयोग को लेकर मानवता को बेहद सतर्क रहना होगा. उन्होंने कहा कि एआई के विकास की कोई तय सीमा नहीं है ।गेट्स ने लिखा- मेरा मानना है कि यह प्रगति तब तक नहीं रुकेगी, जब तक यह मानव स्तर से आगे न निकल जाए ।

सिर्फ सुरक्षा नहीं, नौकरियां भी खतरे में

जैविक हथियारों के जोखिम के साथ-साथ गेट्स ने रोजगार बाजार में आने वाले बड़े बदलाव की ओर भी इशारा किया. उनका कहना है कि एआई की तेज रफ्तार प्रगति पहले ही सॉफ्टवेयर डेवलपमेंट जैसे क्षेत्रों में नौकरियों की मांग को प्रभावित करने लगी है ।

जैविक हथियार क्या होते हैं?

जैविक हथियारों में बैक्टीरिया, वायरस या विषैले पदार्थों का इस्तेमाल किया जाता है. जिससे इंसानों, जानवरों और खेती को नुकसान पहुंचाया जा सकता है । जब यह काम देश करते हैं, तो इसे जैविक युद्ध कहा जाता है और जब गैर-राज्य समूह करते हैं तो इसे जैविक आतंकवाद माना जाता है। इसके अलावा जैविक पदार्थों की अवैध तस्करी भी भविष्य के लिए एक गंभीर चुनौती बनती जा रही है ।

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