ट्रंप की दादागिरी पर विश्व जनमत प्रहार करे

आचार्य श्रीहरि

Update: 2026-01-09 02:56 GMT

वेनेजुएला प्रकरण ने दुनिया को डरा दिया है। दुनिया में जिसकी लाठी, उसकी भैंस” की कहावत को सच कर दिया गया है। डोनाल्ड ट्रंप ने वेनेजुएला पर सैन्य हमला कर राष्ट्रपति निकोलस मादुरो और उनकी पत्नी का अपहरण कर लिया है। अपहरण कर निकोलस मादुरो और उनकी पत्नी को अमेरिका लाया गया है। कहने का अर्थ यह है कि वेनेजुएला के राष्ट्रपति निकोलस मादुरो इस समय अमेरिका के कब्जे में हैं।

डोनाल्ड ट्रंप ने न केवल वेनेजुएला की संप्रभुता को रौंदा है और राष्ट्रपति निकोलस मादुरो का अपहरण किया है, बल्कि उसने संयुक्त राष्ट्र संघ और विश्व न्यायालय की संहिता को भी कुचल दिया है। विश्व जनमत के सामने उसने हिटलरशाही का उदाहरण भी प्रस्तुत किया है। अमेरिका ने घोषणा की है कि उसके सैनिकों ने बेहद सफल कार्रवाई की है। आम नागरिकों को कोई नुकसान नहीं पहुंचाया गया है। सिर्फ वेनेजुएला के राष्ट्रपति भवन को सैन्य निशाना बनाया गया और सावधानीपूर्वक सैन्य कार्रवाई में निकोलस मादुरो और उनकी पत्नी को गिरफ्तार कर लिया गया।

अमेरिका ने यह भी घोषणा की है कि निकोलस मादुरो और उनकी पत्नी के साथ न्याय किया जाएगा, अन्याय नहीं। उनके अपराधों के लिए उन्हें सजा दी जाएगी, लेकिन उन्हें टैंकों या गोलियों से नहीं उड़ाया जाएगा और न ही उन्हें तत्काल फांसी दी जाएगी। उन्हें स्वतंत्र न्यायिक व्यवस्था के अंतर्गत अपना पक्ष रखने का अवसर दिया जाएगा, जहां उन्हें अपनी बेगुनाही साबित करनी होगी। अमेरिका के प्रमुख शहर न्यूयॉर्क में सदर्न डिस्ट्रिक्ट कोर्ट है। इसी सदर्न डिस्ट्रिक्ट कोर्ट में निकोलस मादुरो और उनकी पत्नी पर मुकदमा चलेगा।

अमेरिका के इस कदम का दुनिया में विरोध भी हुआ है। डोनाल्ड ट्रंप की दादागिरी और हिटलरशाही स्पष्ट हो गई है। खासकर रूस और कोलंबिया ने अमेरिका को निशाने पर लिया है और कहा है कि यह अंतरराष्ट्रीय चार्टर का घोर उल्लंघन है तथा दुनिया की शांति के लिए बेहद खतरनाक है। कमजोर और विकासशील देशों पर अमेरिकी दबाव और सैन्य हमलों की आशंका भी तेज हो गई है। अमेरिका के इस कदम से दुनिया में अराजकता फैलेगी और विश्व युद्ध जैसी परिस्थितियां उत्पन्न हो सकती हैं। खासकर संयुक्त राष्ट्र संघ और विश्व न्यायालय की साख और विश्वसनीयता कसौटी पर आ गई है। केवल आलोचना करने से इन संस्थाओं की विश्वसनीयता बचने वाली नहीं है।

सबसे महत्वपूर्ण प्रश्न यह है कि निकोलस मादुरो का अपराध क्या है? डोनाल्ड ट्रंप किन कारणों और किन उद्देश्यों से निकोलस मादुरो की गिरफ्तारी और सजा जैसे खतरनाक कदम उठाने के लिए प्रेरित हुए? डोनाल्ड ट्रंप के सलाहकार और अधिकारी इस कदम के प्रबंधन के लिए आगे आए हैं और रणनीतियां बनाई हैं तथा अपना पक्ष भी रखा है। अमेरिका की अटॉर्नी जनरल पामेला बॉन्डी ने साफ तौर पर निकोलस मादुरो के अपराध गिनाए हैं और कहा है कि वह अमेरिका के लिए खतरनाक दुश्मन है। वह अमेरिका की संप्रभुता के लिए गंभीर खतरा है।

आरोप है कि निकोलस मादुरो ने अमेरिका के खिलाफ साजिशें रचीं, अमेरिकी युवाओं को नष्ट करने के लिए कार्य किए, अमेरिका में मादक पदार्थों की अवैध तस्करी करवाई, नार्को टेररिज्म को बढ़ावा दिया और कोकीन के व्यापार को संरक्षण दिया। अवैध घुसपैठ को लेकर भी अमेरिका की नाराजगी रही है। वेनेजुएला के हजारों लोग प्रतिवर्ष अमेरिका में घुसपैठ कर अराजकता फैलाते रहे हैं। इसी कारण अमेरिका ने वेनेजुएला सीमा पर लंबी तारबंदी और पक्की दीवारें भी खड़ी की थीं। इस मुद्दे पर अमेरिका बार-बार चेतावनी देता रहा है। खासकर डोनाल्ड ट्रंप इस प्रकरण को लेकर काफी आक्रामक थे और वेनेजुएला की तानाशाही सरकार को सबक सिखाना चाहते थे।

हालांकि अमेरिका के इन आरोपों को वेनेजुएला की उपराष्ट्रपति डेल्सी रोड्रिगेज ने खारिज कर दिया है। उन्होंने कहा है कि वेनेजुएला अपनी संप्रभुता की रक्षा के लिए हर आवश्यक कदम उठाएगा। डेल्सी रोड्रिगेज ने यह भी कहा कि अमेरिका का सामना करने के लिए सैन्य व्यवस्था लागू कर दी गई है और हर मोर्चे पर वेनेजुएला की सेनाएं तैनात हैं।

निकोलस मादुरो पर सबसे बड़ा आरोप वह है, जिसे अमेरिका खुलकर जाहिर नहीं कर रहा है—लोकतंत्र का दमन। मादुरो के खिलाफ लोकतांत्रिक आंदोलन चल रहा था। अमेरिका इस आंदोलन को समर्थन और गति दे रहा था। अमेरिका ने चेतावनी दी थी कि लोकतांत्रिक आंदोलन को कुचला न जाए और उसके नेताओं का उत्पीड़न न किया जाए। इसके साथ ही अमेरिका वेनेजुएला के लोकतांत्रिक नेताओं को आर्थिक सहायता और संरक्षण भी दे रहा था।

वेनेजुएला की विपक्षी नेता मारिया कोरीना मचाडो ने निकोलस मादुरो की तानाशाही के खिलाफ लंबे समय तक संघर्ष किया और लोकतांत्रिक आंदोलन को जीवित रखा। इसी कारण उन्हें शांति का नोबेल पुरस्कार मिला और दुनिया को यह पता चला कि वेनेजुएला में लोकतंत्र के खिलाफ कितनी बड़ी तानाशाही मौजूद है। मारिया कोरीना मचाडो अमेरिका और डोनाल्ड ट्रंप की समर्थक मानी जाती हैं। उन्हें वेनेजुएला से बाहर निकालने के लिए अमेरिका ने विशेष सैन्य अभियान चलाया था, जिसमें सफलता मिली। वह फिलहाल विदेश में रह रही हैं और लगातार मादुरो के खिलाफ सक्रिय रही हैं। मादुरो की गिरफ्तारी पर उन्होंने खुशी जाहिर की है, जिसे अमेरिका अपने लिए उपलब्धि मानता है।

दुनिया का एक वर्ग यह भी मानता है कि यह पूरा खेल तेल का है। वेनेजुएला के पास प्रचुर मात्रा में तेल भंडार है। इतना बड़ा भंडार कि वहां तेल पानी से भी सस्ता बताया जाता है। अमेरिका शुरू से वेनेजुएला के तेल भंडार पर नियंत्रण और हिस्सेदारी चाहता था, जैसा उसने अरब देशों में किया। लेकिन वेनेजुएला की तत्कालीन कम्युनिस्ट सरकार ने अमेरिका की यह इच्छा पूरी नहीं की और उसके सामने डटकर खड़ी हो गई।

अब सवाल यह है कि अमेरिका की वेनेजुएला तेल नीति क्या होगी। अमेरिका वेनेजुएला के तेल निर्यात पर प्रतिबंध लगा सकता है। वेनेजुएला की अर्थव्यवस्था पहले से ही कमजोर है। अब हालात और बिगड़ेंगे और जनता भूखमरी के कगार पर पहुंच सकती है।

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