यूरोप को रूस से बात करनी ही होगी: इटली PM मेलोनी के बयान से नई बहस

इटली की PM मेलोनी बोलीं- यूक्रेन युद्ध खत्म करने के लिए यूरोप को रूस से भी बातचीत करनी चाहिए, सिर्फ एक पक्ष से बात काफी नहीं।

Update: 2026-01-10 06:30 GMT

यूक्रेन युद्ध को लेकर यूरोप में बेचैनी कोई नई बात नहीं है लेकिन इस बार बात सिर्फ चिंता तक सीमित नहीं रही । इटली की प्रधानमंत्री जॉर्जिया मेलोनी ने ऐसा बयान दिया है जिसने यूरोपीय राजनीति के गलियारों में हलचल पैदा कर दी है। उनका सीधा संदेश है अगर शांति चाहिए तो बातचीत से भागा नहीं जा सकता और वह बातचीत रूस से भी होनी चाहिए मेलोनी का यह रुख ऐसे वक्त सामने आया है जब युद्ध लंबा खिंचता जा रहा है और किसी ठोस नतीजे की उम्मीद कमजोर पड़ती दिख रही है ।

 क्या बिना संवाद के युद्ध खत्म हो सकता है?

शुक्रवार को PM मेलोनी ने कहा कि यूरोप अगर सिर्फ यूक्रेन की बात सुनता रहा, तो वह खुद को एक सीमित भूमिका में कैद कर लेगा. उनका तर्क सीधा था जब तक दोनों पक्षों से बात नहीं होगी, तब तक कोई टिकाऊ समाधान निकलने की उम्मीद कम ही है. लगभग चार साल से चल रहे इस युद्ध ने न सिर्फ यूक्रेन और रूस को थकाया है बल्कि यूरोप की अर्थव्यवस्था और राजनीति पर भी गहरा असर डाला है, ऊर्जा संकट से लेकर सुरक्षा चिंताओं तक, आम यूरोपीय नागरिक इसकी कीमत चुका रहा है । 

मैक्रों की सोच से मेलोनी की हामी 

मेलोनी ने फ्रांस के राष्ट्रपति इमैनुएल मैक्रों के हालिया बयान से भी सहमति जताई, मैक्रों पहले ही कह चुके हैं कि रूस से दूरी बनाए रखना अब समाधान नहीं, बल्कि समस्या बनता जा रहा है. मेलोनी के मुताबिक यह सिर्फ कूटनीतिक शिष्टाचार का सवाल नहीं है। यह इस बात का फैसला है कि यूरोप खुद शांति प्रक्रिया को दिशा देना चाहता है या सिर्फ बाहर से लिए गए फैसलों पर प्रतिक्रिया देता रहेगा । 

पुतिन से सीधे संवाद की वकालत 

मेलोनी ने एक कदम और आगे बढ़ते हुए सुझाव दिया कि यूरोपीय संघ को रूस के राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन से सीधे बात करने के लिए एक विशेष दूत नियुक्त करना चाहिए. उनका मानना है कि इससे यूरोप अमेरिका की छाया से बाहर निकलकर अपनी स्वतंत्र कूटनीतिक पहचान बना सकता है। हालांकि  उन्होंने यह भी माना कि यह रास्ता आसान नहीं होगा और राजनीतिक जोखिम से भरा है । 

 G7 में रूस की वापसी? इटली अभी तैयार नहीं

अमेरिका ने नवंबर में यह प्रस्ताव रखा था कि रूस को फिर से G7 में शामिल कर पुराने G8 फॉर्मेट को बहाल किया जाए, लेकिन मेलोनी इस मुद्दे पर खासा सतर्क नजर आईं । उन्होंने  कहा कि रूस की वापसी पर बात करना फिलहाल जल्दबाजी होगी, उनके मुताबिक संवाद और वैश्विक मंचों पर पूर्ण स्वीकार्यता दोनों अलग बातें हैं । 

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