आज बैंक यूनियंस की हड़ताल, चेक करें क्या आपके शहर के बैंक बंद हैं या खुले हैं

Update: 2026-01-27 03:55 GMT

अगर आप आज यानी 27 जनवरी को बैंक से जुड़ा कोई जरूरी काम निपटाने की सोच रहे हैं, तो थोड़ा रुकना पड़ सकता है. देशभर में बैंक यूनियंस की हड़ताल पर यूनाइटेड फोरम ऑफ बैंक यूनियंस (UFBU) ने फाइव डे वर्क-वीक को तुरंत लागू करने की मांग को लेकर यह देशव्यापी हड़ताल बुलाई है. ऐसे में पहले से छुट्टियों के कारण बंद रहे बैंकों के बाद आज लगातार तीसरे दिन भी बंद रहेगी जिसका असर सार्वजनिक क्षेत्र के बैंकों में साफ दिख सकता है. नकद लेन-देन से लेकर चेक क्लियरेंस तक, कई सेवाएं प्रभावित रहने की आशंका है.

ये बैंक रह सकते हैं बंद?

देशभर के सभी प्रमुख सरकारी बैंक शामिल हैं

स्टेट बैंक ऑफ इंडिया, पंजाब नेशनल बैंक

बैंक ऑफ बड़ौदा, बैंक ऑफ इंडिया

केनरा बैंक और इंडियन बैंक समेत कई अन्य सार्वजनिक क्षेत्र के बैंक इसमें शामिल हैं

इन बैंकों की शाखाओं में नकद जमा-निकासी, चेक क्लियरेंस और कई प्रशासनिक काम बाधित रह सकते हैं. काउंटर पर लंबी कतारें या आंशिक सेवाएं मिलने की स्थिति भी बन सकती है.

ATM और डिजिटल सेवाए

प्राइवेट सेक्टर के बैंक जैसे एचडीएफसी बैंक, आईसीआईसीआई बैंक और एक्सिस बैंक पर हड़ताल का सीधा असर नहीं पड़ने की उम्मीद है, क्योंकि उनके कर्मचारी इसमें शामिल नहीं हैं. डिजिटल बैंकिंग सेवाएं UPI, इंटरनेट बैंकिंग और मोबाइल ऐप सामान्य रूप से चालू रहेंगी. हालांकि, कुछ इलाकों में ATM में कैश की उपलब्धता लॉजिस्टिक कारणों से प्रभावित हो सकती है.

SBI का बयान

एसबीआई समेत कई सरकारी बैंकों ने हड़ताल के संभावित असर को लेकर पहले ही स्टॉक एक्सचेंज को सूचित कर दिया है. एसबीआई ने कहा है कि शाखाओं और कार्यालयों में सामान्य कामकाज बनाए रखने की कोशिश की गई है, लेकिन कर्मचारियों की हड़ताल के चलते सेवाओं पर असर से इनकार नहीं किया जा सकता.

क्यों हो रही है हड़ताल

UFBU से जुड़ी नौ यूनियनों ने 23 जनवरी को मुख्य श्रम आयुक्त के साथ हुई सुलह बैठक के बेनतीजा रहने के बाद हड़ताल का फैसला लिया था. यूनियनें सभी शनिवारों को अवकाश घोषित करने की मांग कर रही हैं, जिसे मार्च 2024 में आईबीए के साथ हुए 12वें द्विपक्षीय समझौते में सहमति बताया जाता है. फिलहाल बैंक हर महीने पहले, तीसरे और पांचवें शनिवार को ही खुले रहते हैं.

‘यह आंदोलन ग्राहकों के खिलाफ नहीं’

ऑल इंडिया बैंक एम्प्लॉइज एसोसिएशन (AIBEA) के महासचिव सीएच वेंकटाचलम का कहना है कि लंबी बातचीत के बावजूद कोई ठोस आश्वासन नहीं मिला, इसी वजह से हड़ताल का रास्ता चुना गया. वहीं, ऑल इंडिया बैंक ऑफिसर्स कॉन्फेडरेशन (AIBOC) के महासचिव रूपम रॉय ने कहा कि सरकार की ओर से देरी दुर्भाग्यपूर्ण है. उन्होंने यह भी स्पष्ट किया कि सोमवार से शुक्रवार तक रोजाना 40 मिनट अतिरिक्त काम करने पर सहमति दी गई है, जिससे कार्य घंटों का नुकसान नहीं होगा. NCBE के महासचिव एल. चंद्रशेखर के मुताबिक, यह आंदोलन ग्राहकों के खिलाफ नहीं बल्कि एक टिकाऊ और मानवीय बैंकिंग व्यवस्था के लिए है. अब निगाहें सरकार और बैंक प्रबंधन की अगली प्रतिक्रिया पर टिकी हैं, ताकि कामकाज जल्द सामान्य हो सके.

Similar News