भारत से निपाह वायरस फैलने के कोई संकेत नहीं: WHO, भारत को बदनाम करने की बड़ी साजिश

WHO ने कहा है कि भारत से निपाह वायरस फैलने के कोई संकेत नहीं हैं, 190 से ज्यादा संपर्कों में संक्रमण नहीं मिला, जोखिम फिलहाल कम।

Update: 2026-01-30 13:26 GMT

नई दिल्ली। निपाह वायरस को लेकर देश और विदेश में चल रही आशंकाओं के बीच विश्व स्वास्थ्य संगठन (WHO) ने राहत की बात कही है। WHO के एक वरिष्ठ अधिकारी ने साफ किया है कि भारत से निपाह वायरस के फैलने के फिलहाल कोई संकेत नहीं हैं और मौजूदा जोखिम को राष्ट्रीय, क्षेत्रीय और वैश्विक स्तर पर कम आंका गया है । यह बयान ऐसे समय आया है. जब भारत में संक्रमण के दो मामलों की पुष्टि के बाद एशिया के कई देशों ने अपने हवाई अड्डों पर स्क्रीनिंग सख्त कर दी है।

WHO ने क्यों कहा कि खतरा कम है

WHO के हेल्थ इमरजेंसी प्रोग्राम से जुड़ी अधिकारी अनाइस लेगैंड ने जिनेवा में प्रेस ब्रीफिंग के दौरान बताया कि भारत में संक्रमित पाए गए दोनों मरीजों के संपर्क में आए 190 से अधिक लोगों की जांच की गई, लेकिन किसी में भी संक्रमण की पुष्टि नहीं हुई उन्होंने यह भी बताया कि दोनों मरीजों में से किसी ने भी लक्षण सामने आने के बाद यात्रा नहीं की । दोनों अस्पताल में भर्ती हैं और जीवित हैं, जिनमें से एक की हालत में सुधार के संकेत मिले हैं लेगैंड ने कहा कि WHO भारत द्वारा जारी किए जाने वाले वायरस के जीनोमिक सिक्वेंस का इंतजार कर रहा है, लेकिन अभी तक ऐसा कोई ठोस सबूत नहीं है जो चिंता बढ़ाए।

कई देशों में एयरपोर्ट पर अलर्ट

भारत में निपाह संक्रमण की पुष्टि के बाद हांगकांग, मलेशिया, सिंगापुर, थाईलैंड और वियतनाम सहित कई एशियाई देशों ने एहतियात के तौर पर हवाई अड्डों पर जांच प्रक्रिया को और कड़ा कर दिया है। हालांकि WHO का कहना है कि यह कदम सावधानी के तौर पर हैं, न कि किसी तत्काल खतरे की वजह से।

निपाह वायरस क्या है और कितना खतरनाक

निपाह वायरस एक जूनोटिक वायरस है, जो मुख्य रूप से फल खाने वाले चमगादड़ों (Pteropus प्रजाति) से फैलता है। यह वायरस सूअरों जैसे जानवरों के जरिए भी इंसानों तक पहुंच सकता है संक्रमण होने पर मरीज को तेज बुखार, सिरदर्द और गंभीर मामलों में मस्तिष्क में सूजन (एन्सेफेलाइटिस) हो सकती है. निपाह वायरस की मृत्यु दर 40% से 75% तक बताई जाती है, जो इसे बेहद खतरनाक बनाती है। फिलहाल इसका कोई निश्चित इलाज नहीं है। कुछ वैक्सीन विकास के चरण में हैं, लेकिन अभी उनका व्यापक उपयोग नहीं हो रहा।


वायरस का स्रोत अभी पूरी तरह साफ नहीं

WHO के मुताबिक भारत में मौजूदा मामलों के स्रोत को लेकर जांच जारी है। शुरुआती अनुमानों में ताड़ के रस का सेवन या स्वास्थ्य सुविधाओं में संपर्क जैसे कारणों पर विचार किया जा रहा है, लेकिन अभी कुछ भी पुख्ता तौर पर नहीं कहा गया है निपाह वायरस की पहचान पहली बार 1998-99 में मलेशिया के सुंगई निपाह गांव में हुई थी। तब यह सूअर पालकों और बूचड़खानों से जुड़े लोगों में फैला और एक बड़े सार्वजनिक स्वास्थ्य संकट का कारण बना। हालात ऐसे बने कि संक्रमण रोकने के लिए लाखों सूअरों को मारना पड़ा। 

भारत के खिलाफ साजिश?

हाल के दिनों में कुछ अंतरराष्ट्रीय रिपोर्ट्स में इस तरह का माहौल बनाया गया, मानो भारत से निपाह वायरस के वैश्विक फैलाव का खतरा हो। विशेषज्ञ मानते हैं कि यह तस्वीर पूरी तरह तथ्यपरक नहीं है WHO का ताजा बयान साफ संकेत देता है कि स्थिति नियंत्रण में है और फिलहाल घबराने की नहीं बल्कि सतर्क रहने की जरूरत है।

Tags:    

Similar News