WTO रिपोर्ट: कृषि निर्यात में भारत की बड़ी उड़ान, टॉप-10 देशों में मजबूत मौजूदगी
भारत की खेती अब सिर्फ देश की जरूरतें पूरी नहीं कर रही, बल्कि दुनिया के बाजारों में भी अपनी पकड़ लगातार मजबूत कर रही है। डब्ल्यूटीओ की ताजा रिपोर्ट में दावा किया गया है कि भारत का कृषि निर्यात बीते वर्षों में दोगुना हो चुका है। इस उपलब्धि का जिक्र केंद्र सरकार ने आर्थिक सर्वे 2025–26 में भी किया है, जिसने भारत की बढ़ती वैश्विक भूमिका को रेखांकित किया है।
2024-25 में रिकॉर्ड निर्यात
रिपोर्ट के मुताबिक भारत ने वर्ष 2024–25 में 4.15 लाख करोड़ रुपये से अधिक के कृषि उत्पादों का निर्यात किया। इसमें बासमती और गैर-बासमती चावल, समुद्री उत्पाद और मसालों की अहम भूमिका रही। यही वजह है कि भारत कुछ साल पहले ही कृषि निर्यात करने वाले टॉप-10 देशों की सूची में शामिल हो चुका है.हाल के वर्षों में भारत ने चावल उत्पादन में चीन को भी पीछे छोड़ दिया है। अब सरकार की नजर नए देशों में भारतीय कृषि उत्पादों के लिए बाजार तलाशने पर है, ताकि निर्यात का दायरा और बढ़ाया जा सके।
डब्ल्यूटीओ ने मानी भारत की बढ़ती हिस्सेदारी
आर्थिक सर्वे में डब्ल्यूटीओ के हवाले से बताया गया है कि वर्ष 2000 में वैश्विक कृषि निर्यात में भारत की हिस्सेदारी जहां 1.1 फीसदी थी, वह 2024 तक बढ़कर 2.2 फीसदी हो गई है। यानी भारत की हिस्सेदारी बीते दो दशकों में दोगुनी हो चुकी है.रिपोर्ट यह भी संकेत देती है कि देश की उत्पादन क्षमता को देखते हुए कृषि निर्यात में अभी काफी संभावनाएं बाकी हैं।
किन उत्पादों का सबसे ज्यादा निर्यात
भारत के कृषि निर्यात में कुछ उत्पाद लगातार मजबूत बने हुए हैं।
समुद्री उत्पादों का निर्यात 62,625 करोड़ रुपये से ज्यादा रहा।
गैर-बासमती चावल करीब 55,408 करोड़ रुपये का निर्यात हुआ।
बासमती चावल से 50,312 करोड़ रुपये की कमाई हुई।
मसालों का निर्यात 36,765 करोड़ रुपये और भैंस के मांस का निर्यात 34,392 करोड़ रुपये से अधिक रहा।
इसके अलावा अन्य कृषि उत्पादों से भी 2.11 लाख करोड़ रुपये से ज्यादा का योगदान दर्ज किया गया।
नए बाजारों पर सरकार की नजर
केंद्र सरकार अब कृषि निर्यात को और रफ्तार देने के लिए कई देशों के साथ फ्री ट्रेड एग्रीमेंट (FTA) को आगे बढ़ा रही है। कुछ देशों के साथ समझौते हो चुके हैं, जबकि कई के साथ बातचीत जारी है. अब निगाहें इस बात पर टिकी हैं कि आने वाले वर्षों में भारत किस तरह इन नए समझौतों और बाजारों के जरिए कृषि निर्यात को नई ऊंचाई तक ले जाता है।