आसमान छू रहा मिर्च का भाव, टूटा तीन साल का रिकॉर्ड

Update: 2026-01-28 04:58 GMT

मिर्च की खेती घटने, फसल को नुकसान और अंतरराष्ट्रीय मांग बढ़ने से मिर्च के दाम तेजी से बढ़े

भारत में इस समय मिर्च के दाम तेजी से बढ़ गए हैं। खासकर तेलंगाना के वारंगल और खम्मम की कृषि मंडियों में मिर्च की कीमतें बहुत ऊँची हो गई हैं। किसानों और व्यापारियों का कहना है कि पिछले तीन सालों में मिर्च के दाम इतने ऊँचे नहीं रहे। मिर्च की कमी और मांग ज्यादा होने की वजह से इसके दाम लगातार बढ़ रहे हैं।

पिछले हफ्ते मिर्च की कीमत 22,000 रुपये प्रति क्विंटल तक पहुँच गई थी, जो अब तक के उच्चतम स्तरों में से एक है। फिलहाल मिर्च के दाम थोड़े कम हुए हैं, लेकिन यह अभी भी 15,000 से 18,500 रुपये प्रति क्विंटल के बीच बने हुए हैं। इतने ऊँचे दाम किसानों और खरीदारों दोनों के लिए खास हैं।

मिर्च की खेती कम होने का सबसे बड़ा कारण यह है कि अब पहले की तरह ज्यादा जमीन पर मिर्च नहीं बोई जा रही है। लगभग पांच साल पहले जहां 1.25 लाख एकड़ जमीन में मिर्च की खेती होती थी, वह अब घटकर केवल 30 हजार एकड़ रह गई है। इसके साथ ही मिर्च की फसल पर ‘थ्रिप्स’ नाम के कीड़े और ‘विल्ट’ जैसी बीमारियों का हमला हुआ, जिससे बहुत सी फसल खराब हो गई।

इस साल मिर्च की नई फसल पर अधिक बारिश और नमी का बुरा असर पड़ा। बारिश के कारण मिर्च में नमी आ गई और उसकी गुणवत्ता खराब हो गई। इसी वजह से व्यापारी मिर्च खरीदने में सतर्क हैं और बाजार में खरीद-बिक्री कम रही है। इसका परिणाम मंडियों में मिर्च की स्पष्ट कमी के रूप में देखा जा रहा है। कृषि विश्वविद्यालय के विशेषज्ञों का कहना है कि आने वाले समय में मिर्च के दाम बहुत अधिक ऊपर नहीं जाएंगे। जनवरी 2026 में मिर्च की कीमत 13,500 से 15,500 रुपये प्रति क्विंटल के बीच रह सकती है। हालांकि दामों में थोड़ा-बहुत बदलाव हो सकता है और बाजार धीरे-धीरे सामान्य होगा।

विदेशों में मिर्च की बढ़ी मांग

भारत की मिर्च विदेशों में बहुत पसंद की जाती है। इस साल अंतरराष्ट्रीय बाजारों में भारतीय मिर्च की मांग काफी बढ़ गई है। जब विदेश ज्यादा मिर्च खरीदते हैं, तो देश के अंदर मिर्च कम हो जाती है। यही वजह है कि मिर्च के दाम और ऊपर चले गए हैं।

कोल्ड स्टोरेज से भी निकाली जा रही मिर्च

मिर्च की कमी को देखते हुए व्यापारी अब कोल्ड स्टोरेज यानी ठंडे गोदामों में रखी मिर्च भी बाजार में ला रहे हैं। पहले जो मिर्च बाद के लिए बचाई गई थी, उसे अब बेचा जा रहा है। इससे साफ पता चलता है कि बाजार में मिर्च की कितनी कमी है।

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