प्रधानमंत्री मोदी ने तीन बार की जीत के साथ भारत के विकास और सुशासन को नई दिशा दी, जिससे भारत ने वैश्विक पहचान बनाई।
डॉ. मोहन यादव
रत के इतिहास में श्री नरेन्द्र मोदी का लगातार 3 बार प्रधानमंत्री बनना देश के लय महत्वपूर्ण उपलब्धि है। लगातार 3 बार सत्ता में आना श्री मोदी की कार्यप्रणाली सभी को साथ लेकर चलना और देश को सुरक्षा देने के साथ आर्थिक रूप से मजबूत बनाना ही उनकी विशेषता रही है। यशस्वी प्रधानमंत्री जी की इन्हीं विशेष खूबियों ने नये भारत के निर्माण का स्वर्णिम अध्याय लिखा है.
यशस्वी श्री नरेन्द्र मोदी जी ने वर्ष 2014 में जब प्रधानमंत्री पद की शपथ ली थी, तब देश की जनता ने केवल एक सरकार नहीं चुनी थी, बल्कि शासन की एक नई कार्यशैली और राजनीतिक संस्कृति की अपेक्षा भी व्यक्त की थी। बारह वर्ष बाद इस यात्रा को केवल योजनाओं, आंकड़ों और उपलब्धियों के आधार पर नहीं, बल्कि उस व्यापक दृष्टिकोण के आधार पर समझना अधिक उचित होगा, जिसने शासन की सोच को प्रभावित किया। यदि इन बारह वर्षों को तीन शब्दों में समेटना हो, तो वे शब्द होंगे सेवा, सुशासन और संकल्प।
प्रधानमंत्री जी की सोच में सेवा का अर्थ केवल कल्याणकारी योजनाएं चलाना नहीं रहा, बल्कि सेवा का अर्थ शासन स्वयं को जनता का संरक्षक और सेवक के रूप में हैं। इस दृष्टि से पिछले बारह वर्षों में शासन की प्राथमिकताओं में अंतिम व्यक्ति तक पहुंचने की उन्होंने चिंता की है। गरीब, किसान, महिला, युवा और वंचित वर्ग को केवल वोट बैंक के रूप में नहीं, बल्कि विकास प्रक्रिया को केंद्र में रखने की कोशिश की जो सफलता के शिखर तक जा पहुंची। यही सोच पंडित दीनदयाल उपाध्याय जी के एकात्म मानववाद में भी दिखाई देती है। मोदीजी की सरकार ने बार-बार यह संदेश दिया है कि विकास का वास्तविक अर्थ तब है, जब उसका लाभ समाज के सबसे कमजोर व्यक्ति तक पहुंचे।
प्रधानमंत्री जी की प्रमुखता में सुशासन एक प्रमुख केन्द्र बना। सुशासन का अर्थ सरकार को अधिक पारदर्शी, उत्तरदायी और प्रभावी बनाना है। डिजिटल तकनीक का उपयोग इसी दर्शन का हिस्सा था। तकनीक को केवल आधुनिकता का प्रतीक नहीं, बल्कि सुशासन का माध्यम माना गया। शासन और नागरिक के बीच की दूरी कम करने, प्रक्रियाओं को सरल बनाने तथा निर्णयों को अधिक पारदर्शी बनाने की दिशा में लगातार प्रयास किये गये जो लगातार जारी हैं। इसका मूल ध्येय यह है कि आम नागरिक को सरल और सहज तरीके से उसके अधिकार मिलें और योजनाओं का लाभ सहजता से मिल सके।
मुझे यह बताते हुये खुशी है कि श्री मोदी जी देश के पहले ऐसे प्रधानमंत्री हैं जो लोकतंत्र में संवाद को आवश्यक मानते हैं। उनका समय समय पर अलग-अलग वर्गों से सीधा संवाद करना और उन्हें मार्गदर्शन देना अदभुत है। वे युवाओं के लिये अभिभावक की भूमिका भी निभाते हैं। छात्र-छात्राओं को परीक्षा के समय आत्म मजबूत करने के लिये परीक्षा पर चर्चा जैसे विषयों पर उनका संवाद लगातार जारी रहता है। इसी क्रम में उनकी मन की बात कार्यक्रम को पूरा देश बड़े आत्मीय तरीके से आत्मसात करता है। यही हमारे यशस्वी प्रधानमंत्री की विशेषता है।
हमारे यशस्वी प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदीजी की सरकार की कार्यशैली में यह स्पष्ट दिखाई दिया देता है कि बड़े निर्णयों से बचने के बजाय उन्हें समाधान तक कैसे पहुंचाया जाए? दरअसल, इसे ही निर्णायक नेतृत्व कहते हैं। यह निर्विवाद है कि निर्णय लेने की क्षमता इस शासनकाल की प्रमुख पहचान रही है।
इक्कीसवीं सदी के तीसरे दशक में मोदी सरकार ने विकसित भारत को राष्ट्रीय संकल्प के रूप में प्रस्तुत किया। यह संकल्प केवल आर्थिक प्रगति तक सीमित नहीं है। इसके भीतर आत्मविश्वास, आत्मनिर्भरता और राष्ट्रीय गौरव की भावना भी जुड़ी हुई है। पिछले बारह वर्षों में बार-बार यह संदेश दिया गया कि भारत को केवल विकासशील राष्ट्र के रूप में संतुष्ट नहीं होना चाहिए, बल्कि उसे विश्व की अग्रणी शक्तियों में स्थान प्राप्त करना चाहिए। यह दृष्टिकोण भारतीय समाज में एक नए आत्मविश्वास का निर्माण करता है।