मध्य प्रदेश में शिक्षकों को TET परीक्षा से आंशिक राहत मिली है। 2005 के बाद चयनित शिक्षकों को TET से छूट देने पर विचार, जल्द नया आदेश जारी होगा।
भोपाल। मध्य प्रदेश में शिक्षकों के लिए शिक्षक पात्रता परीक्षा (TET) को लेकर बड़ा अपडेट सामने आया है। स्कूल शिक्षा विभाग और लोक शिक्षण आयुक्त के बीच हुई बैठक के बाद TET की अनिवार्यता में आंशिक छूट देने की दिशा में कदम बढ़ाया गया है।
2005 के बाद चयनित शिक्षकों को राहत
बैठक में लिए गए फैसले के अनुसार, वर्ष 2005 और उसके बाद चयनित हुए शिक्षकों को TET परीक्षा देने से छूट मिल सकती है। इस प्रस्तावित निर्णय से प्रदेश के करीब डेढ़ लाख शिक्षकों को राहत मिलने की उम्मीद है।
लोक शिक्षण आयुक्त अभिषेक सिंह ने अधिकारियों को निर्देश दिए हैं कि इस संबंध में स्पष्ट और विस्तृत आदेश जल्द जारी किया जाए। जिसमें यह तय हो कि किन शिक्षकों को TET देना जरूरी होगा और किन्हें छूट मिलेगी।
प्रदर्शन की चेतावनी के बाद तेज हुई प्रक्रिया
TET अनिवार्यता के विरोध में शिक्षकों ने 18 अप्रैल को प्रदर्शन करने की चेतावनी दी थी। उनकी मांग थी कि इस परीक्षा को सभी के लिए अनिवार्य न रखा जाए। बैठक के बाद अब इस मुद्दे पर समाधान की उम्मीद बढ़ गई है।
वेतन वृद्धि पर भी चर्चा
बैठक में शिक्षकों की वेतनवृद्धि और समयमान वेतनमान पर भी चर्चा हुई। पात्र शिक्षकों को इसका लाभ देने के लिए जल्द आदेश जारी करने की बात कही गई है।
सुप्रीम कोर्ट के आदेश का प्रभाव
इस मामले में सुप्रीम कोर्ट के 1 सितंबर 2025 के आदेश का भी असर है। कोर्ट ने कहा था कि नौकरी में बने रहने और प्रमोशन के लिए शिक्षकों को TET पास करना जरूरी होगा। हालांकि, जिन शिक्षकों की सेवा में 5 साल से कम समय बचा है। उन्हें इस नियम में छूट दी जा सकती है। वहीं 5 साल से अधिक सेवा शेष रखने वाले शिक्षकों के लिए TET पास करना अनिवार्य माना गया था।
क्या है TET परीक्षा
TET एक पात्रता परीक्षा है, जिसके जरिए यह तय किया जाता है कि शिक्षक कक्षा 1 से 8 तक पढ़ाने के योग्य है या नहीं। वर्ष 2010 से इसे अनिवार्य किया गया है।
जल्द जारी होगा स्पष्ट आदेश
शिक्षा विभाग अब इस पूरे मामले पर स्पष्ट दिशा-निर्देश जारी करने की तैयारी में है। नए आदेश के बाद यह पूरी तरह साफ हो जाएगा कि किन शिक्षकों को TET से छूट मिलेगी और किन्हें परीक्षा देनी होगी।