मध्यप्रदेश कांग्रेस में बड़े बदलाव की आहट, हरीश चौधरी और जीतू पटवारी को हटाने की मांग। दिग्विजय सिंह के इशारे पर कांग्रेस में फूट की आशंका गहराई।
मध्यप्रदेश कांग्रेस का घमासान दिल्ली में
अनुराग उपाध्याय
मध्यप्रदेश कांग्रेस का घमासान दिल्ली पहुंच गया है। बात अब कांग्रेस के प्रदेश प्रभारी हरीश चौधरी और प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष जीतू पटवारी को हटाए जाने तक पहुंच गई है। कांग्रेस से जिस तरह के संकेत मिल रहे हैं, वे इशारा कर रहे हैं कि या तो मध्यप्रदेश में कांग्रेस एक बार फिर टूटेगी या फिर कांग्रेस में बड़ा बदलाव होगा। इस सबके पीछे पूर्व मुख्यमंत्री और वरिष्ठ कांग्रेस नेता दिग्विजय सिंह सक्रिय बताए जा रहे हैं।
कमलनाथ सरकार गिरने के बाद से मध्यप्रदेश में कांग्रेस रसातल की ओर जा रही है। ऐसे में एक बार फिर कांग्रेस टूटन के कगार पर है। कांग्रेस के भीतर की खदबदाहट को पूर्व मुख्यमंत्री दिग्विजय सिंह ने केंद्रीय नेतृत्व के सामने रखा है। बताया जाता है कि मध्यप्रदेश कांग्रेस को लेकर दिल्ली दरबार में कहा गया कि प्रदेश प्रभारी हरीश चौधरी और प्रदेश अध्यक्ष जीतू पटवारी कांग्रेस का सत्यानाश करने पर तुले हैं।
कांग्रेस की राज्यसभा प्रत्याशी मीनाक्षी नटराजन के नामांकन पत्र में हुई चूक और इस चुनाव में डमी उम्मीदवार खड़ा नहीं किए जाने को लेकर इन दोनों नेताओं को घेरा गया है। इस जोड़ी के प्रदर्शन को लेकर सात विधायकों ने भी हाईकमान से शिकायत की है।सूत्र बताते हैं कि कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खरगे को दिग्विजय सिंह ने मध्यप्रदेश की वस्तुस्थिति से अवगत कराया है और इन दोनों नेताओं को मध्यप्रदेश कांग्रेस के हित में पद से हटाने तक की सलाह दे दी है। सूत्रों का कहना है कि दिग्विजय सिंह की बातों को गंभीरता से सुना गया है।
एआईसीसी से जुड़े सूत्र बताते हैं कि इन कारणों से दिग्विजय सिंह ने पार्टी के कार्यक्रमों से कुछ दूरी भी बना ली है और अगर उनकी बात पर गौर नहीं किया गया तो वे कोई और कदम भी उठा सकते हैं। यह कदम क्या होगा, इस पर कांग्रेस नेता और दिग्विजय सिंह खेमा चुप्पी साधे हुए हैं।इधर, राज्यसभा चुनाव से पहले से ही एक दर्जन से ज्यादा कांग्रेस विधायक भाजपा के संपर्क में बताए जा रहे हैं। ये विधायक जीतू पटवारी की कार्यप्रणाली से संतुष्ट नहीं हैं। जीतू पटवारी भी इन विधायकों के साथ तालमेल नहीं बैठा पाए और ये अप्रत्यक्ष रूप से भाजपा के करीब पहुंच गए। बताया जा रहा है कि ये विधायक मौका देखकर भाजपा के पाले में जा सकते हैं।
इस बार भी कांग्रेस के ही नेता कांग्रेस के दो फाड़ होने की पटकथा लिख रहे हैं। कमलनाथ सरकार के गिरने के समय भी पर्दे के पीछे कांग्रेस की टूटन की एक बड़ी वजह दिग्विजय सिंह को माना गया था और कमोबेश इस बार भी इशारे उन्हीं की तरफ जा रहे हैं।फिलहाल, वरिष्ठ नेता राहुल गांधी को भी मध्यप्रदेश की ताजा गतिविधियों से अवगत करा दिया गया है। ऐसे में देखना होगा कि पहले कांग्रेस दो फाड़ होती है या फिर चौधरी और पटवारी हटाए जाते हैं। इस सबके बीच दिग्विजय सिंह की हर गतिविधि पर दिल्ली से नजर रखी जा रही है।