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खून का काला कारोबार

ग्वालियर के सबसे बड़े सरकारी अस्पताल में 'खून का काला कारोबार'! 7-8 हजार में मिल रहा ब्लड, स्वदेश के स्टिंग में बड़ा खुल

ग्वालियर के जयारोग्य अस्पताल में ब्लड बैंक का दुरुपयोग, जरूरतमंदों को ऊंची कीमत पर बेचा जा रहा खून। स्टिंग ऑपरेशन में खुलासा।


ग्वालियर के सबसे बड़े सरकारी अस्पताल में खून का काला कारोबार 7-8 हजार में मिल रहा ब्लड स्वदेश के स्टिंग में बड़ा खुल

AI इमेज |

अंचल के सबसे बड़े सरकारी अस्पतालों में शामिल जयारोग्य चिकित्सालय समूह (जेएएच) में मरीजों की जिंदगी से खिलवाड़ करने वाला एक चौंकाने वाला मामला सामने आया है।

अस्पताल में जहां जरूरतमंद परिजनों को ब्लड बैंक से रक्त उपलब्ध नहीं होने की बात कहकर लौटा दिया जाता है, वहीं अस्पताल परिसर में सक्रिय दलाल कुछ ही मिनटों में हजारों रुपए लेकर रक्त उपलब्ध कराने का दावा कर रहे हैं। स्वदेश के स्टिंग ऑपरेशन में इस पूरे नेटवर्क की परतें खुलीं, जिसमें एम्बुलेंस चालक, पार्किंग कर्मचारी और कथित दलालों की भूमिका सामने आई है।सबसे गंभीर बात यह है कि यह पूरा खेल अस्पताल परिसर में खुलेआम संचालित हो रहा है, लेकिन अस्पताल प्रबंधन की निगरानी और कार्रवाई कहीं दिखाई नहीं देती।

"भटकने की जरूरत नहीं, पूरा इंतजाम हो जाएगा"

स्वदेश संवाददाता ने अस्पताल परिसर में सक्रिय एक कथित दलाल से संपर्क किया। उसने बिना किसी झिझक के कहा कि वह एक यूनिट ब्लड 7 हजार रुपए में उपलब्ध करा देगा। इसके अलावा 1050 रुपए की पर्ची अलग से कटवाने की बात भी कही।कथित दलाल ने दावा किया कि शहर के किसी भी ब्लड बैंक में डोनर भेजकर रक्त की व्यवस्था कराई जा सकती है और काम पूरा होने के बाद भुगतान किया जा सकता है। बातचीत के दौरान उसने यह भरोसा भी दिलाया कि मरीज के परिजनों को कहीं भटकने की जरूरत नहीं पड़ेगी, पूरा इंतजाम उसके पास है।

रात होते ही सक्रिय हो जाता है नेटवर्क

जानकारी के अनुसार, गंभीर मरीजों के परिजनों की मजबूरी का फायदा उठाकर उनसे मनमानी रकम वसूली जाती है। दलाल पहले मरीज और उसके परिजनों की स्थिति समझते हैं, फिर उसी आधार पर सौदा तय करते हैं। मरीज जितना गंभीर और परिजन जितने अधिक मजबूर, कीमत उतनी ही बढ़ जाती है।सूत्रों के अनुसार, रात होते ही यह नेटवर्क अधिक सक्रिय हो जाता है और अस्पताल परिसर में जरूरतमंद लोगों को अपना शिकार बनाता है।

ब्लड बैंक में कहा- रक्त उपलब्ध नहीं

स्वदेश के संवाददाता ने मरीज के परिजन बनकर जयारोग्य अस्पताल के ब्लड बैंक पहुंचकर बताया कि मरीज की हालत गंभीर है और उसे ओ-पॉजिटिव ब्लड की तत्काल आवश्यकता है। इस पर ब्लड बैंक में मौजूद कर्मचारी ने स्पष्ट शब्दों में कहा कि किसी भी ग्रुप का ब्लड उपलब्ध नहीं है।हालांकि, ब्लड बैंक से बाहर निकलते ही अस्पताल परिसर में मौजूद एक एम्बुलेंस कर्मचारी ने स्वयं संपर्क किया और रक्त उपलब्ध कराने का भरोसा दिया। उसने कहा कि ब्लड मिल जाएगा, लेकिन इसके लिए 7 से 8 हजार रुपए खर्च करने होंगे।

सवालों के घेरे में व्यवस्था

यह पूरा मामला सरकारी अस्पतालों में रक्त उपलब्धता और ब्लड बैंक की कार्यप्रणाली पर गंभीर सवाल खड़े करता है। यदि अस्पताल में रक्त उपलब्ध नहीं है, तो परिसर में सक्रिय लोग कुछ ही मिनटों में रक्त उपलब्ध कराने का दावा कैसे कर रहे हैं? यह जांच का विषय है कि आखिर यह रक्त कहां से आता है और इस पूरे नेटवर्क को संरक्षण कौन दे रहा है।जरूरत इस बात की है कि स्वास्थ्य विभाग और अस्पताल प्रशासन इस मामले की निष्पक्ष जांच कर दोषियों के खिलाफ सख्त कार्रवाई करे, ताकि मरीजों और उनके परिजनों की मजबूरी का फायदा उठाने वाले ऐसे नेटवर्क पर रोक लगाई जा सके।

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