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Amarnath Yatra 2026 Guide

अमरनाथ यात्रा 2026 पर जाने का बना रहे हैं प्लान? रजिस्ट्रेशन से रूट तक जानें पूरी गाइड

अमरनाथ यात्रा 2026 पर जाने से पहले रजिस्ट्रेशन, यात्रा की तारीख, पहलगाम और बालटाल रूट, हेल्थ सर्टिफिकेट, RFID कार्ड और जरूरी नियमों की पूरी जानकारी यहां पढ़ें।


अमरनाथ यात्रा 2026 पर जाने का बना रहे हैं प्लान रजिस्ट्रेशन से रूट तक जानें पूरी गाइड

Amarnath Yatra Schedule and Rules |

अगर आप अमरनाथ यात्रा 2026 की तैयारी कर रहे हैं, तो सिर्फ रजिस्ट्रेशन कर लेना ही काफी नहीं है। सही रूट चुनने से लेकर हेल्थ सर्टिफिकेट, यात्रा परमिट और सुरक्षा नियमों तक कई ऐसी बातें हैं, जिनकी जानकारी पहले से होना जरूरी है। इस बार यात्रा 57 दिनों तक चलेगी। ऐसे में बड़ी संख्या में श्रद्धालुओं के पहुंचने की उम्मीद है। यात्रा को सुरक्षित और व्यवस्थित बनाने के लिए श्री अमरनाथजी श्राइन बोर्ड ने रजिस्ट्रेशन और स्वास्थ्य संबंधी नियम पहले से तय कर दिए हैं।

यात्रा कब शुरू होगी और रजिस्ट्रेशन कैसे करें

अमरनाथ यात्रा 3 जुलाई 2026 से शुरू होकर 28 अगस्त 2026 तक चलेगी। यात्रा के लिए रजिस्ट्रेशन 15 अप्रैल से शुरू हो चुका है। श्रद्धालु श्री अमरनाथजी श्राइन बोर्ड की आधिकारिक वेबसाइट के जरिए ऑनलाइन आवेदन कर सकते हैं। इसके अलावा एसबीआई, पीएनबी, आईसीआईसीआई, एक्सिस बैंक और यस बैंक की अधिकृत शाखाओं से भी रजिस्ट्रेशन कराया जा सकता है। सीटें प्रतिदिन तय कोटे के अनुसार उपलब्ध रहती हैं, इसलिए तय तारीख पर यात्रा करने के इच्छुक श्रद्धालुओं को समय रहते आवेदन करना चाहिए।

यात्रा से पहले ये नियम जानना जरूरी

अमरनाथ यात्रा के लिए श्रद्धालु की आयु 13 से 70 वर्ष के बीच होनी चाहिए। इसके साथ किसी अधिकृत डॉक्टर या मेडिकल संस्थान से 8 अप्रैल 2026 के बाद जारी किया गया कंपल्सरी हेल्थ सर्टिफिकेट (CHC) अनिवार्य है। स्वास्थ्य प्रमाण-पत्र के सत्यापन के बाद ही यात्रा परमिट जारी किया जाता है, इसलिए मेडिकल जांच को नजरअंदाज नहीं करना चाहिए।

पहलगाम या बालटाल कौन सा रूट बेहतर

श्रद्धालु अपनी सुविधा के अनुसार दो मार्गों में से किसी एक का चयन कर सकते हैं। पहलगाम रूट करीब 48 किलोमीटर लंबा है और इसकी चढ़ाई अपेक्षाकृत आसान होने के कारण पहली बार यात्रा करने वालों के लिए बेहतर माना जाता है। वहीं बालटाल रूट लगभग 14 किलोमीटर का है, लेकिन यह ज्यादा खड़ी चढ़ाई वाला है और शारीरिक रूप से अधिक चुनौतीपूर्ण माना जाता है।

RFID कार्ड और सुरक्षा व्यवस्था

रजिस्ट्रेशन पूरा होने के बाद श्रद्धालुओं को यात्रा परमिट के साथ RFID कार्ड भी दिया जाता है। इसकी मदद से प्रशासन यात्रा के दौरान श्रद्धालुओं की लोकेशन पर नजर रख सकता है और किसी भी आपात स्थिति में तेजी से राहत पहुंचाई जा सकती है। सभी पंजीकृत यात्रियों को 10 लाख रुपये का दुर्घटना बीमा भी दिया जाएगा। इसके अलावा दोनों मार्गों पर रेस्क्यू टीमों और आपातकालीन सेवाओं की विशेष व्यवस्था की गई है।

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