उत्तर प्रदेश में 10% ईंधन अधिभार वसूली पर विवाद गहरा गया है। उपभोक्ता परिषद ने इसे अवैध बताया है। सीएम योगी की कल होने वाली बैठक में इस पर बड़ा फैसला संभव माना जा रहा है।
लखनऊ। उत्तर प्रदेश में बिजली उपभोक्ताओं से वसूले जा रहे 10 प्रतिशत ईंधन अधिभार को लेकर बड़ा विवाद खड़ा हो गया है। राज्य विद्युत उपभोक्ता परिषद ने इस वसूली को तुरंत रोकने की मांग की है और इसे नियमों के खिलाफ बताया है। मामला अब मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ की उच्च स्तरीय बैठक तक पहुंच गया है, जहां इस पर बड़ा फैसला लिया जा सकता है।
उपभोक्ता परिषद ने उठाए सवाल
उपभोक्ता परिषद के अध्यक्ष अवधेश कुमार वर्मा ने आरोप लगाया है कि उपभोक्ताओं से बिना उचित नियमों के अतिरिक्त शुल्क वसूला जा रहा है। उन्होंने कहा कि नियामक आयोग ने भी इस प्रक्रिया को नियमों के अनुरूप नहीं माना है, इसके बावजूद वसूली जारी है। परिषद ने मुख्यमंत्री को पत्र लिखकर इस मुद्दे को बैठक में गंभीरता से उठाने की मांग की है।
नियामक आयोग की सख्ती
उत्तर प्रदेश विद्युत नियामक आयोग ने इस मामले में सख्त रुख अपनाया है। आयोग ने विद्युत निगम से बार-बार आंकड़े, गणना और संबंधित दस्तावेज प्रस्तुत करने को कहा है। हालांकि अभी तक निगम की ओर से पूरी जानकारी जमा नहीं की गई है, जिससे इस वसूली की वैधता पर गंभीर सवाल बने हुए हैं।
ऊर्जा मंत्री ने भी जताई अनभिज्ञता
प्रदेश के ऊर्जा मंत्री ने भी कहा है कि उन्हें इस 10 प्रतिशत ईंधन अधिभार की जानकारी सोशल मीडिया के माध्यम से मिली थी और इस पर उनसे कोई औपचारिक राय नहीं ली गई। इसी बीच उपभोक्ता परिषद ने आरोप लगाया है कि लाखों उपभोक्ताओं पर अतिरिक्त बोझ डाला जा रहा है और अब सरकार से तुरंत हस्तक्षेप की मांग तेज हो गई है।