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ट्विशा शर्मा मौत केस में नया मोड़

ट्विशा शर्मा केस में बड़ा सुराग! मोबाइल डेटा से खुल सकता है मौत का राज, डिलीट चैट्स खंगाल रही CBI

ट्विशा शर्मा मौत मामले में CBI अब डिजिटल सबूतों पर फोकस कर रही है। डिलीट चैट्स, कॉल रिकॉर्ड्स और वॉट्सऐप बैकअप की गहन जांच जारी है।


ट्विशा शर्मा केस में बड़ा सुराग मोबाइल डेटा से खुल सकता है मौत का राज डिलीट चैट्स खंगाल रही cbi

राजधानी के चर्चित ट्विशा शर्मा मौत मामले में केंद्रीय अन्वेषण ब्यूरो (सीबीआई) ने जांच का फोकस अब पूरी तरह डिजिटल साक्ष्यों पर केंद्रित कर दिया है। लैपटॉप की तकनीकी जांच लगभग पूरी होने के बाद एजेंसी मोबाइल फोन से जुड़े हर डिजिटल रिकॉर्ड की गहन पड़ताल कर रही है। डिलीट किए गए मैसेज, कॉल लॉग्स, सोशल मीडिया गतिविधियां और वॉट्सऐप बैकअप जांच की सबसे अहम कड़ी बन गए हैं।

सूत्रों के अनुसार, ट्विशा शर्मा की मौत से जुड़ी परिस्थितियों की कड़ियां धीरे-धीरे जुड़ रही हैं और मामले में जल्द महत्वपूर्ण खुलासा होने की संभावना जताई जा रही है। जांच एजेंसी घटना से पहले और बाद की पूरी डिजिटल टाइमलाइन तैयार कर रही है, ताकि यह पता लगाया जा सके कि आखिरी दिनों में ट्विशा किन लोगों के संपर्क में थीं और घटनाक्रम किस तरह आगे बढ़ा।

डिलीट डेटा रिकवर करने में जुटी फोरेंसिक टीम

जांच में एनकेस (EnCase) और सेलेब्राइट (Cellebrite) जैसे अत्याधुनिक डिजिटल फोरेंसिक सॉफ्टवेयर का उपयोग किया जा रहा है। इन तकनीकों की मदद से डिलीट चैट, फोटो, ऑडियो और अन्य डेटा को दोबारा प्राप्त करने का प्रयास किया जा रहा है।इसके साथ ही वॉट्सऐप बैकअप फाइल्स को डिक्रिप्ट कर उनकी सामग्री की भी बारीकी से जांच की जा रही है। सूत्रों का कहना है कि मोबाइल में बड़ी संख्या में चैट रिकॉर्ड मौजूद थे, जिनमें से कई हटाए जा चुके हैं। एजेंसी यह भी पता लगाने का प्रयास कर रही है कि डेटा कब और किन परिस्थितियों में डिलीट किया गया।

डिजिटल टाइमलाइन से जुड़ेगी पूरी कहानी

सीबीआई अब डिजिटल टाइमलाइन एनालिसिस के जरिए यह जानने की कोशिश कर रही है कि घटना से पहले किन लोगों से बातचीत हुई, कौन-कौन संपर्क में था और घटनाक्रम किस दिशा में बढ़ा।इस हाई-प्रोफाइल मामले में पहले ही कई एंगल सामने आ चुके हैं। ऐसे में एजेंसी किसी भी संभावित कड़ी को नजरअंदाज नहीं करना चाहती। जांचकर्ता मोबाइल डेटा, कॉल डिटेल्स और ऑनलाइन गतिविधियों का मिलान कर घटनाओं का क्रम तैयार कर रहे हैं।

सुरक्षित क्लोनिंग के बाद शुरू हुआ डेटा रिकवरी ऑपरेशन

सीबीआई ने मृतका के मोबाइल की पहले ही सुरक्षित क्लोनिंग कर ली थी, ताकि मूल डिवाइस के डेटा से किसी प्रकार की छेड़छाड़ न हो सके। अब विशेषज्ञों की टीम एडवांस डिजिटल फोरेंसिक तकनीकों की मदद से मोबाइल में मौजूद और हटाए जा चुके डेटा को रिकवर करने का प्रयास कर रही है। जांच एजेंसी किसी भी निष्कर्ष पर पहुंचने से पहले प्रत्येक तकनीकी साक्ष्य की कई स्तरों पर पुष्टि कर रही है। अधिकारियों का मानना है कि मोबाइल से मिलने वाले डिजिटल संकेत इस मामले की जांच की दिशा तय कर सकते हैं।

लैपटॉप से मिले निजी और प्रोफेशनल दस्तावेज

अब तक की जांच में लैपटॉप से कुछ निजी तस्वीरें, व्यक्तिगत जानकारियां और मृतका की पूर्व कंपनी से जुड़े कार्य संबंधी दस्तावेज सामने आए हैं। हालांकि एजेंसी को उम्मीद है कि मोबाइल डेटा से ऐसे तथ्य सामने आ सकते हैं, जो अब तक जांच के दायरे में नहीं आए हैं। इसी वजह से विशेषज्ञ लगातार डेटा विश्लेषण में जुटे हुए हैं और हर डिजिटल गतिविधि का क्रॉस-वेरिफिकेशन किया जा रहा है। जांच एजेंसी को उम्मीद है कि डिजिटल सबूत इस चर्चित मामले की गुत्थी सुलझाने में अहम भूमिका निभाएंगे।

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