सरगुजा के दरिमा में शराब दुकान के विरोध में महिलाओं ने कलेक्टर को ज्ञापन सौंपा। उन्होंने कहा कि यदि शराब की कमाई से योजनाएं चलती हैं तो उन्हें ऐसा लाभ नहीं चाहिए और 3 दिन का अल्टीमेटम दिया।
सरगुजा के दरिमा में खुली एक अंग्रेजी शराब दुकान अब स्थानीय विरोध का बड़ा केंद्र बन गई है। गांव की महिलाओं ने सीधे प्रशासन को चेतावनी दी है कि दुकान नहीं हटी तो आंदोलन शुरू होगा। विरोध सिर्फ शराब बिक्री का नहीं, बल्कि उससे जुड़ी सामाजिक कीमत का भी है। मामले ने तब और राजनीतिक रंग ले लिया जब आबकारी मंत्री के एक बयान को लेकर महिलाओं ने खुलकर नाराजगी जताई।
शराब दुकान के खिलाफ दूसरी बार पहुंचीं महिलाएं
दरिमा क्षेत्र की महिलाएं एक सप्ताह के भीतर दूसरी बार अंबिकापुर पहुंचीं। उनका कहना है कि पहले भी प्रशासन को आवेदन दिया गया था, लेकिन कोई कार्रवाई नहीं हुई। सोमवार को कलेक्टर को सौंपे गए ज्ञापन में महिलाओं ने तीन दिन के भीतर शराब दुकान हटाने की मांग रखी। उन्होंने साफ कहा कि समयसीमा पूरी होने के बाद धरना और आंदोलन शुरू किया जाएगा।
योजनाओं से ज्यादा परिवारों की चिंता
प्रदर्शन में शामिल महिलाओं का कहना है कि शराब से मिलने वाली आय के बदले समाज को भारी नुकसान झेलना पड़ता है। उनका तर्क है कि यदि सरकारी योजनाओं का वित्तपोषण शराब बिक्री से हो रहा है, तो वे ऐसे लाभ को स्वीकार नहीं करना चाहतीं। महिलाओं ने घरेलू कलह, आर्थिक संकट, युवाओं में बढ़ती लत और सड़क हादसों जैसे मुद्दों को भी अपने विरोध का आधार बनाया।
मंत्री के बयान के बाद बढ़ा विवाद
आबकारी मंत्री लखनलाल देवांगन ने हाल ही में कहा था कि आबकारी विभाग से मिलने वाली आय का उपयोग महतारी वंदन योजना, आवास योजनाओं और अन्य कल्याणकारी कार्यक्रमों में किया जाता है। इसी बयान के बाद महिलाओं का विरोध और मुखर हो गया। उनका कहना है कि सरकार को केवल राजस्व नहीं, बल्कि शराब के सामाजिक प्रभाव का भी आकलन करना चाहिए।
युवाओं के भविष्य का मुद्दा बना आंदोलन का केंद्र
महिलाओं का दावा है कि जिस इलाके में पहले युवा प्रतियोगी परीक्षाओं और सरकारी नौकरियों की तैयारी पर ध्यान देते थे, वहां अब शराब की आसान उपलब्धता नई समस्या बन रही है। उनका कहना है कि दुकान खुलने से युवाओं तक शराब की पहुंच बढ़ेगी और इसका असर पूरे क्षेत्र के सामाजिक माहौल पर पड़ेगा। इसी वजह से वे किसी भी स्थिति में दुकान संचालित नहीं होने देने की बात कह रही हैं।
तीन दिन बाद आंदोलन की चेतावनी
करीब 30 महिलाओं के प्रतिनिधिमंडल ने प्रशासन को स्पष्ट संदेश दिया है कि यदि निर्धारित समय में कार्रवाई नहीं हुई तो विरोध प्रदर्शन तेज किया जाएगा। फिलहाल निगाहें प्रशासन के अगले कदम पर हैं, क्योंकि यह मुद्दा अब सिर्फ एक शराब दुकान तक सीमित नहीं रह गया है, बल्कि स्थानीय समाज और सरकारी नीतियों के बीच टकराव का विषय बनता जा रहा है।