स्वैच्छिक तबादला इच्छुक शिक्षकों को नई नीति के तहत पसंद का स्कूल तो मिलेगा, परंतु उन्हें अपनी वरिष्ठता खोनी पड़ सकती है। 19 से 23 जून तक ऑनलाइन आवेदन की प्रक्रिया होगी।
19 से 23 जून तक ऑनलाइन आवेदन, नई नीति पर शिक्षक संगठनों ने उठाए सवाल
स्कूल शिक्षा विभाग की नई तबादला नीति के तहत स्वैच्छिक स्थानांतरण की इच्छा रखने वाले शिक्षकों को अपनी पसंद के स्कूल में पदस्थापना के लिए 19 से 23 जून तक ऑनलाइन आवेदन करना होगा। हालांकि, इस प्रक्रिया में शामिल होने वाले जिला कैडर के सहायक शिक्षकों को वरिष्ठता खोने का जोखिम उठाना पड़ सकता है।
जानकारों के अनुसार, स्वैच्छिक तबादला लेने वाले जिला कैडर के सहायक शिक्षकों की वरिष्ठता नए पदस्थापन स्थल पर पहले से कार्यरत शिक्षकों के बाद मानी जाएगी। यानी उनका नाम नई वरिष्ठता सूची में सबसे नीचे दर्ज होगा। इसका असर भविष्य में मिलने वाले पदोन्नति और अन्य सेवा लाभों पर पड़ सकता है।
लोक शिक्षण संचालनालय ने ऐसे शिक्षकों के लिए 19 से 23 जून तक ऑनलाइन चॉइस फिलिंग की प्रक्रिया निर्धारित की है।
90 फीसदी शिक्षक तबादले से रह सकते हैं बाहर
विभागीय सूत्रों के अनुसार, नई तबादला नीति के कुछ प्रावधानों के कारण बड़ी संख्या में शिक्षक स्थानांतरण प्रक्रिया से बाहर हो सकते हैं। ई-अटेंडेंस की अनिवार्यता और वरिष्ठता समाप्त होने की शर्तों के चलते लगभग 90 प्रतिशत शिक्षकों के तबादले से वंचित रहने की आशंका जताई जा रही है।
प्रदेश में शिक्षकों के तीन कैडर हैं। प्राथमिक विद्यालयों के शिक्षक जिला स्तर, माध्यमिक विद्यालयों के शिक्षक संभाग स्तर तथा उच्च माध्यमिक विद्यालयों के व्याख्याता राज्य स्तर के कैडर में आते हैं।वरिष्ठता समाप्त होने का प्रावधान केवल प्राथमिक और माध्यमिक शिक्षकों पर लागू होगा। व्याख्याताओं पर यह नियम लागू नहीं होगा, क्योंकि उनका कैडर राज्य स्तर का है।
ई-अटेंडेंस की शर्त भी बनी बड़ी बाधा
नई तबादला नीति में ई-अटेंडेंस को लेकर भी शिक्षकों में नाराजगी है। विभाग जनवरी, फरवरी और मार्च 2026 की ई-अटेंडेंस के आधार पर 90 प्रतिशत उपस्थिति की गणना कर रहा है।इन महीनों में बोर्ड परीक्षाओं के चलते बड़ी संख्या में शिक्षक परीक्षा संबंधी कार्यों में व्यस्त रहे, जिससे कई शिक्षकों की ई-अटेंडेंस निर्धारित मानक तक नहीं पहुंच सकी। ऐसे में वे तबादला प्रक्रिया के लिए अपात्र हो सकते हैं। इसके अलावा, जनगणना ड्यूटी में लगे शिक्षक भी फरवरी 2027 तक स्वैच्छिक स्थानांतरण के लिए आवेदन नहीं कर सकेंगे, क्योंकि उनके संबंध में पहले से स्पष्ट आदेश जारी हैं।
शिक्षक संगठनों ने जताई आपत्ति
शासकीय शिक्षक संगठन के कार्यकारी प्रदेश अध्यक्ष उपेंद्र कौशल ने नई नीति का विरोध करते हुए कहा कि स्वैच्छिक स्थानांतरण के लिए ई-अटेंडेंस को अनिवार्य बनाना न्यायसंगत नहीं है।उनका कहना है कि यह प्रावधान प्रदेश के हजारों शिक्षकों के साथ अन्यायपूर्ण व्यवहार है और व्यावहारिक परिस्थितियों के अनुरूप नहीं है। प्रदेश के अनेक विद्यालय ऐसे क्षेत्रों में स्थित हैं, जहां इंटरनेट कनेक्टिविटी की समस्या बनी रहती है। ऐसे में केवल ई-अटेंडेंस के आधार पर पात्रता तय करना उचित नहीं माना जा सकता।