रायसेन किले की पहाड़ी पर एक बाघ की लगातार मौजूदगी ने वन विभाग को हाई अलर्ट पर डाल दिया है। पर्यटकों की सुरक्षा के लिए कदम उठाए गए हैं।
कैमरे में कई बार कैद हुआ बाघ, पर्यटकों की आवाजाही सीमित
जिले के ऐतिहासिक रायसेन किले की पहाड़ी पर पिछले लगभग 15 दिनों से एक बाघ की लगातार मौजूदगी ने वन विभाग और स्थानीय प्रशासन की चिंता बढ़ा दी है। बाघ की गतिविधियां लगातार दर्ज होने के बाद पूरे क्षेत्र में हाई अलर्ट घोषित कर दिया गया है। पर्यटकों और स्थानीय नागरिकों की सुरक्षा को देखते हुए किले की ओर जाने वाले कई संवेदनशील मार्गों पर आवाजाही सीमित कर दी गई है, जबकि वन विभाग की विशेष टीमें चौबीसों घंटे निगरानी में जुटी हुई हैं।
वन विभाग द्वारा लगाए गए कैमरा ट्रैप में बाघ कई बार दिखाई दिया है। वन अधिकारियों के अनुसार, किले की पहाड़ी स्थित सोमेश्वर धाम मंदिर के पास मौजूद जलस्रोत के आसपास उसकी सबसे अधिक गतिविधियां रिकॉर्ड की गई हैं। कैमरों में वह जलस्रोत पर पानी पीते और आसपास आराम करते हुए भी नजर आया है।
सुबह की सैर के दौरान मिले थे बाघ के पगचिह्न
कुछ दिन पहले सुबह टहलने गए लोगों ने किले की पहाड़ी पर बाघ के पगचिह्न देखे थे। सूचना मिलते ही वन विभाग की टीम मौके पर पहुंची और क्षेत्र में सघन सर्च ऑपरेशन चलाया। इसके बाद रणनीतिक स्थानों पर कैमरा ट्रैप लगाए गए, जिनमें लगातार बाघ की मौजूदगी की पुष्टि होती रही। इससे स्पष्ट हो गया कि बाघ ने पहाड़ी क्षेत्र को अस्थायी रूप से अपना ठिकाना बना रखा है।
सुरक्षा के लिए बढ़ाई गई निगरानी
वन विभाग ने संवेदनशील क्षेत्रों में चेतावनी संबंधी पोस्टर लगवाए हैं और वनकर्मियों की विशेष ड्यूटी लगाई है। अधिकारियों का कहना है कि बाघ फिलहाल किसी पर हमला करने जैसी गतिविधि में नहीं देखा गया है, लेकिन एहतियात के तौर पर लोगों को सतर्क रहने की सलाह दी गई है।
पर्यटकों और स्थानीय लोगों से अपील
वन विभाग ने पर्यटकों एवं स्थानीय नागरिकों से प्रतिबंधित क्षेत्रों में प्रवेश न करने और जारी सुरक्षा निर्देशों का पालन करने की अपील की है। विभाग का कहना है कि बाघ की गतिविधियों पर लगातार नजर रखी जा रही है, ताकि किसी भी संभावित अप्रिय घटना को रोका जा सके।