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ओंकार पीठम् का 19वां दीक्षांत समारोह

ओंकार पीठम् का 19वां दीक्षांत समारोह संपन्न, 25 से अधिक विद्यार्थियों को मिली उपाधियाँ

ओंकार पीठम् में आयोजित 19वें दीक्षांत समारोह में 25 से अधिक विद्यार्थियों को उपाधियाँ प्रदान की गईं। इस अवसर पर निःशुल्क ज्योतिष प्रशिक्षण की भी घोषणा की गई।


ओंकार पीठम् का 19वां दीक्षांत समारोह संपन्न 25 से अधिक विद्यार्थियों को मिली उपाधियाँ

ज्योतिष जीवन को दिशा देने वाली विद्या : विष्णु राजौरिया

भोपाल। ओंकार पीठम् सेवा संस्थान द्वारा संचालित निःशुल्क ज्योतिष कक्षाओं के पाठ्यक्रम की पूर्णता पर एकोनविंशति (19वां) दीक्षांत समारोह रविवार, 14 जून 2026 को आरोग्य भारती सभागार, तुलसी नगर, भोपाल में आयोजित किया गया। समारोह में 25 से अधिक विद्यार्थियों को उपाधियाँ प्रदान की गईं।

कार्यक्रम के मुख्य अतिथि वरिष्ठ ज्योतिषाचार्य एवं परशुराम कल्याण बोर्ड के अध्यक्ष विष्णु राजौरिया ने अपने उद्बोधन में कहा कि काल पुरुष मानव जीवन की प्रत्येक गतिविधि का साक्षी और नियामक है। ज्योतिष ऐसी विद्या है जो किसी व्यक्ति को सफलता और ऊँचाइयों तक पहुँचा सकती है, बशर्ते उसे योग्य एवं सत्यनिष्ठ ज्योतिषी का मार्गदर्शन प्राप्त हो। उन्होंने कहा कि सनातन परंपरा में वर्ण का निर्धारण कर्म के आधार पर किया गया है। जो व्यक्ति ज्योतिष के अध्ययन और साधना में समर्पित है, वह ब्राह्मणत्व के गुणों को धारण करता है। उन्होंने नवोदित ज्योतिषियों को निरंतर अध्ययन एवं विनम्र आचरण की प्रेरणा देते हुए कहा कि कालचक्र और ग्रह निरंतर गतिमान हैं, इसलिए ज्योतिषी को भी सतत अध्ययनशील रहना चाहिए।

समारोह के मुख्य वक्ता क्रियायोगाचार्य, ज्योतिष एवं आध्यात्मिक मार्गदर्शक स्वामी कृष्णप्रेमानंद गिरि (दौंड गुरुजी) ने कहा कि भाग्य हमारे शरीर और मन की स्थिति के अनुरूप कार्य करता है। यदि व्यक्ति शारीरिक और मानसिक रूप से सक्रिय है तो उसका भाग्य भी सक्रिय रहता है। उन्होंने ज्योतिष को “काल पुरुष का नेत्र” बताते हुए कहा कि ज्योतिषी को फलादेश करते समय अत्यंत सावधानी, संवेदनशीलता और करुणा का परिचय देना चाहिए। उन्होंने गोस्वामी तुलसीदास की पंक्ति— “सियाराममय सब जग जानी, करहुँ प्रणाम जोरि जुग पानी” का स्मरण कराते हुए सभी में ईश्वर के दर्शन करने का संदेश दिया।

ओंकार पीठम् सेवा संस्थान के प्रमुख एवं वरिष्ठ ज्योतिषाचार्य *डॉ. राजेश कुमार मिश्रा* ने बताया कि संस्थान वर्ष 1994 से निःशुल्क ज्योतिष प्रशिक्षण प्रदान कर रहा है। उन्होंने कहा कि उनके गुरु, प्रख्यात ज्योतिषाचार्य प्रहलाद पांड्या के मार्गदर्शन में 17 दीक्षांत समारोह सम्पन्न हुए थे। उनके पश्चात पिछले वर्ष 18वाँ तथा इस वर्ष 19वाँ दीक्षांत समारोह आयोजित किया गया है।

डॉ. मिश्रा ने भारतीय ज्ञान परंपरा में ज्योतिष एवं कर्मकांड की महत्ता पर प्रकाश डालते हुए कहा कि मानव जीवन में जन्म से पूर्व और मृत्यु के पश्चात तक इनकी आवश्यकता बनी रहती है। उन्होंने बिना समुचित अध्ययन के ज्योतिषीय फलादेश करने की प्रवृत्ति पर चिंता व्यक्त करते हुए कहा कि इससे ज्योतिष विद्या की प्रतिष्ठा को नुकसान पहुँचता है। संस्थान का उद्देश्य समाज तक शुद्ध एवं प्रमाणिक ज्योतिषीय ज्ञान पहुँचाना है।

उन्होंने घोषणा की कि आगामी सत्र से ज्योतिष के साथ-साथ पूजा एवं कर्मकांड का प्रशिक्षण भी निःशुल्क प्रदान किया जाएगा। सम्पूर्ण पाठ्यक्रम निःशुल्क है तथा विद्यार्थियों से केवल दीक्षांत समारोह के आयोजन हेतु सहयोग राशि ली जाती है।कार्यक्रम में विशिष्ट अतिथि के रूप में सुप्रसिद्ध ज्योतिषाचार्य राजेश दुबे उपस्थित रहे। कार्यक्रम का आभार प्रदर्शन डॉ. अभयशंकर मिश्रा ने किया।

इस अवसर पर भोपाल सहित अन्य नगरों से आए प्रतिष्ठित विद्वानों, ज्योतिषाचार्यों एवं सामाजिक कार्यकर्ताओं का सम्मान भी किया गया।साथ ही, 29 जुलाई 2026 (गुरु पूर्णिमा) से प्रारम्भ होने वाले आगामी निःशुल्क ज्योतिष प्रशिक्षण सत्र के लिए पंजीयन भी प्रारम्भ कर दिया गया है। इच्छुक अभ्यर्थी मोबाइल नंबर 9826472505 एवं  9826097472 पर संपर्क कर सकते हैं।

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