मध्यप्रदेश में डेंगू नियंत्रण के लिए AI आधारित प्रेडिक्शन सिस्टम लागू किया गया है। इसकी मदद से पहले ही डेंगू प्रभावित क्षेत्रों की पहचान की जा सकेगी और रोकथाम के उपाय तेज किए जाएंगे।
मध्यप्रदेश में डेंगू और अन्य वेक्टर जनित रोगों के नियंत्रण के लिए स्वास्थ्य विभाग ने पहली बार आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (एआई) आधारित प्रेडिक्शन सिस्टम लागू किया है। इस नई तकनीक की मदद से संभावित डेंगू प्रभावित क्षेत्रों की पहले ही पहचान कर वहां रोकथाम के उपाय तेज किए जाएंगे। विभाग का दावा है कि यह मॉडल बीमारी फैलने से पहले ही चेतावनी देने में सक्षम होगा।
एआई से पहले ही मिलेगा जोखिम का संकेत
राष्ट्रीय वेक्टर जनित रोग नियंत्रण कार्यक्रम के राज्य कार्यक्रम अधिकारी डॉ. हिमांशु जायसवाल के अनुसार, इस सिस्टम में पिछले वर्षों के डेंगू मामलों, मौसम विभाग के वर्षा और तापमान संबंधी डेटा, जनसंख्या तथा शहरी-ग्रामीण परिस्थितियों का विश्लेषण किया जा रहा है। इससे यह अनुमान लगाया जा सकेगा कि अगले एक महीने में किन क्षेत्रों में डेंगू के मामले बढ़ सकते हैं।
38.70 लाख घरों में सर्वे, 303 डेंगू मरीज मिले
प्रदेशभर में डेंगू नियंत्रण के लिए व्यापक अभियान चलाया गया है। अब तक 38.70 लाख घरों का लार्वा सर्वे किया जा चुका है, जिनमें 20,238 घरों में मच्छरों का लार्वा मिला, जिसे मौके पर ही नष्ट कर दिया गया। इस अवधि में 18 हजार से अधिक जांचों में 303 डेंगू मरीज पाए गए हैं।
ड्रोन और एआई से मजबूत हो रहा सिस्टम
इंदौर जैसे जिलों में ड्रोन तकनीक से संवेदनशील क्षेत्रों की पहचान की जा रही है। अब इसमें एआई आधारित पूर्वानुमान प्रणाली को भी जोड़ा गया है, जिससे डेंगू नियंत्रण और अधिक प्रभावी होने की उम्मीद है।
तैयारी पहले से होगी
यदि किसी क्षेत्र में जोखिम की पहचान होती है, तो वहां पहले से लार्वा सर्वे, फॉगिंग, कीटनाशक छिड़काव और जनजागरूकता अभियान तेज कर दिए जाएंगे।
64 लैब में निःशुल्क जांच सुविधा
प्रदेश के 64 सेंटीनल लैब में डेंगू की निःशुल्क जांच सुविधा उपलब्ध है। इसके साथ ही 28 जिलों में लगभग 1,500 वालंटियर जागरूकता और सर्वे कार्यों में सक्रिय भूमिका निभा रहे हैं।
स्थिति अभी पूरी तरह नियंत्रण में
आंकड़ों के अनुसार, वर्ष 2025 की तुलना में वर्ष 2026 में अब तक डेंगू के मामलों में कमी दर्ज की गई है। विभाग का कहना है कि फिलहाल स्थिति नियंत्रण में है और बड़े स्तर पर संक्रमण नहीं फैला है।