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Exclusive Breastfeeding Falls Sharply In Madhya Pr

भागदौड़ भरी जिंदगी में छूट रहा मां का दूध

मध्यप्रदेश में नवजातों को मां का दूध पिलाने की दर में गिरावट आई है, जिसे कामकाजी दबाव और स्वास्थ्य समस्याएं प्रमुख कारण बताई जा रही हैं।


भागदौड़ भरी जिंदगी में छूट रहा मां का दूध

100 में से सिर्फ 56 बच्चों को ही मिल पा रहा मां का दूध 

बदलती जीवनशैली, कामकाजी दबाव और स्वास्थ्य संबंधी चुनौतियों के बीच मध्यप्रदेश में नवजातों को छह माह तक केवल मां का दूध पिलाने की परंपरा तेजी से कमजोर पड़ रही है। राष्ट्रीय परिवार स्वास्थ्य सर्वेक्षण (एनएफएचएस-6) के ताजा आंकड़ों ने चिंता बढ़ा दी है। प्रदेश में अब 100 में से केवल 56 बच्चों को ही छह माह तक मां का दूध मिल पा रहा है, जबकि 44 बच्चे इससे वंचित रह जाते हैं। चार साल पहले यह आंकड़ा 74 प्रतिशत था, जो अब घटकर 56.4 प्रतिशत पर पहुंच गया है। यानी प्रदेश में एक्सक्लूसिव ब्रेस्टफीडिंग में 17.6 प्रतिशत की गिरावट दर्ज हुई है।

विशेषज्ञों के मुताबिक मां का दूध बच्चों के लिए जरूरी

महिला एवं बाल रोग विशेषज्ञ डॉ. प्रीति देव पुजारी बताती हैं कि मां का दूध बच्चे के लिए पहला प्राकृतिक टीका होता है। इसमें मौजूद पोषक तत्व और एंटीबॉडी नवजात को संक्रमण और कई गंभीर बीमारियों से बचाने में मदद करते हैं। उन्होंने कहा कि यदि मां सीधे स्तनपान नहीं करा पा रही हो, तो दूध निकालकर सुरक्षित तरीके से स्टोर भी किया जा सकता है।

कामकाजी महिलाओं की व्यस्त दिनचर्या बड़ी वजह

विशेषज्ञों के अनुसार, कामकाजी महिलाओं की व्यस्त दिनचर्या, सीजेरियन डिलीवरी के बाद कमजोरी, पर्याप्त पारिवारिक सहयोग का अभाव और तनाव इसकी प्रमुख वजहें हैं। कई माताएं ऑफिस और घर की जिम्मेदारियों के बीच बच्चों को समय पर स्तनपान नहीं करा पा रहीं, जबकि कुछ महिलाओं को स्वास्थ्य कारणों से भी परेशानी होती है।

ऐसे में बच्चों को पैकेट या बोतल का दूध देना मजबूरी बनता जा रहा है।

महिला विशेषज्ञों ने स्तनपान के दौरान सही मुद्रा, नियमित अंतराल और स्वच्छता बनाए रखने की सलाह दी है। उनका कहना है कि मां और बच्चे दोनों के बेहतर स्वास्थ्य के लिए शुरुआती छह माह तक केवल स्तनपान बेहद जरूरी है।

 

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