मध्य प्रदेश में राज्य पुलिस सेवा के 8 अधिकारियों को आईपीएस में पदोन्नति के लिए चयनित किया गया है। डीपीसी ने इस पर मुहर लगा दी है।
मध्य प्रदेश में राज्य पुलिस सेवा के आठ अधिकारियों को भारतीय पुलिस सेवा (आईपीएस) में पदोन्नति देने की प्रक्रिया में बड़ा फैसला हुआ। गुरुवार को मंत्रालय में संघ लोक सेवा आयोग की विभागीय पदोन्नति समिति (डीपीसी) की बैठक आयोजित की गई, जिसमें राज्य पुलिस सेवा के अधिकारियों के नामों पर विस्तार से विचार किया गया।
जांच के कारण अटका एक नाम
सूत्रों के अनुसार, एसपीएस अधिकारी राजेश मिश्रा का मामला विभागीय जांच लंबित होने के कारण सीलबंद लिफाफे में रखा गया है। ऐसे मामलों में डीपीसी अधिकारी के रिकॉर्ड पर विचार तो करती है, लेकिन अंतिम निर्णय जांच या अनुशासनात्मक कार्रवाई के परिणाम आने तक सुरक्षित रखा जाता है।
जल्द जारी होगी अधिसूचना
डीपीसी की अनुशंसा अब केंद्र सरकार और संबंधित औपचारिक प्रक्रियाओं के बाद अधिसूचना के रूप में जारी की जाएगी। अधिसूचना जारी होते ही चयनित अधिकारियों को आईपीएस कैडर आवंटित किया जाएगा और वे भारतीय पुलिस सेवा के अधिकारी के रूप में पदस्थ माने जाएंगे।
इन अधिकारियों को मिला आईपीएस अवार्ड
बैठक में 27 अधिकारियों के नामों पर मंथन
बैठक यूपीएससी सदस्य संजय वर्मा की अध्यक्षता में आयोजित हुई। इसमें राज्य पुलिस सेवा के कुल 27 अधिकारियों के सेवा रिकॉर्ड, वरिष्ठता, गोपनीय चरित्रावली और अन्य मानकों का परीक्षण किया गया। लंबी चर्चा के बाद 9 रिक्त पदों के लिए विचार किए गए नामों में से 8 अधिकारियों को आईपीएस अवार्ड के लिए मंजूरी दे दी गई।
आईपीएस पदोन्नति की मंजूरी मिलने के बाद पुलिस मुख्यालय और संबंधित अधिकारियों के बीच उत्साह का माहौल है। लंबे समय से पदोन्नति की प्रतीक्षा कर रहे अधिकारियों को अब भारतीय पुलिस सेवा में शामिल होने का अवसर मिलेगा। वहीं, राजेश मिश्रा के मामले पर सभी की नजरें टिकी हुई हैं, क्योंकि विभागीय जांच पूरी होने के बाद उनके भविष्य पर अंतिम फैसला होगा।