इंदौर में व्यापारी ने लोकायुक्त संगठन पर रिश्वत मांगने की रिकॉर्डिंग लीक करने और कार्रवाई न करने का आरोप लगाया है। मामले की शिकायत वरिष्ठ अधिकारियों तक पहुंची है और जांच की मांग की गई है।
इंदौर। मध्य प्रदेश के इंदौर शहर में लोकायुक्त संगठन की कार्यप्रणाली पर सवाल खड़े करने वाला एक मामला सामने आया है। इसमें एक व्यापारी ने रिश्वत मांगने की रिकॉर्डिंग लीक होने और कार्रवाई न होने को लेकर वरिष्ठ अधिकारियों से शिकायत की है। इस पूरे घटनाक्रम के बाद लोकायुक्त संगठन की भूमिका पर भी बहस शुरू हो गई है।
व्यापारी ने लगाए गंभीर आरोप
व्यापारी शेखर ने आरोप लगाया है कि उनके और उनके परिवार के खिलाफ इंदौर के जोन-1 थाने में दर्ज एक FIR के बाद मामला और बढ़ गया। उनका कहना है कि विवेचना के दौरान उनके नाबालिग बेटे का नाम भी जोड़ दिया गया था। इसी बीच 16 अप्रैल 2026 को थाने बुलाए जाने पर दो लोगों की मौजूदगी में एक मीडियाकर्मी ने मामले को सुलझाने के बदले पैसे की मांग की।
रिकॉर्डिंग और शिकायत का दावा
शिकायतकर्ता के अनुसार, उनसे पहले एक लाख रुपये और बाद में 70 हजार रुपये की मांग की गई। व्यापारी ने इस बातचीत की रिकॉर्डिंग अपने फोन में कर ली और उसे पेन ड्राइव के साथ 17 अप्रैल 2026 को लोकायुक्त कार्यालय में सौंप दिया। उन्होंने ट्रैप कार्रवाई की मांग भी की, लेकिन आरोप है कि इसके बजाय केवल बयान दर्ज किए गए और रिकॉर्डिंग जब्त कर ली गई।
कार्रवाई न होने पर उठे सवाल
व्यापारी का आरोप है कि शिकायत के बावजूद संबंधित लोगों के खिलाफ कोई ठोस कार्रवाई नहीं हुई। बाद में उसी मीडियाकर्मी ने उनसे संपर्क कर यह भी कहा कि शिकायत की जानकारी पहले ही लीक हो चुकी थी, जिससे संबंधित लोग सतर्क हो गए थे। इसी आधार पर शिकायतकर्ता ने लोकायुक्त संगठन पर गोपनीयता भंग होने का आरोप लगाया है।
वरिष्ठ अधिकारियों से जांच की मांग
शिकायतकर्ता ने लोकायुक्त भोपाल, उप लोकायुक्त और डीजी लोकायुक्त को पत्र भेजकर पूरे मामले की उच्च स्तरीय जांच की मांग की है। साथ ही यह भी कहा है कि यदि शिकायत से जुड़ी गोपनीय जानकारी लीक हुई है तो जिम्मेदार अधिकारियों और कर्मचारियों पर विभागीय कार्रवाई की जाए।
लोकायुक्त पक्ष और कानूनी स्थिति
लोकायुक्त के वकील आशीष खरे ने कहा है कि संगठन निजी व्यक्तियों के खिलाफ कार्रवाई नहीं करता और ऐसे मामलों में तभी संज्ञान लिया जा सकता है जब किसी लोक सेवक की भूमिका सामने आए। वहीं रिटायर्ड डीएसपी बीएस परिहार के अनुसार यह मामला फ्रॉड या चीटिंग की श्रेणी में आता है और इसकी शिकायत पुलिस से की जानी चाहिए थी।