भगवान बुद्ध के शिष्यों, अरहंत सारिपुत्र और अरहंत महा मौद्गल्यायन के पवित्र अवशेष मंगोलिया से भारत लौट आए हैं।
भगवान बुद्ध के दो प्रमुख शिष्यों अरहंत सारिपुत्र और अरहंत महा मौद्गल्यायन के पवित्र अवशेष मंगोलिया में प्रदर्शनी के बाद भारत लौट आए। सांची ले जाए जाने से पहले भोपाल के राजा भोज एयरपोर्ट पर इन अवशेषों का श्रद्धापूर्वक स्वागत किया गया। इस दौरान भाजपा के राष्ट्रीय महासचिव तरुण चुग और सांसद कंगना रनौत ने पवित्र अवशेषों के दर्शन कर उन्हें नमन किया।
दर्शन को बताया आध्यात्मिक अनुभूति
भाजपा के राष्ट्रीय महासचिव तरुण चुग ने कहा कि भगवान बुद्ध के महान शिष्यों के पवित्र अवशेषों के दर्शन करना उनके लिए बेहद सौभाग्य और आध्यात्मिक अनुभूति का विषय है। उन्होंने बताया कि वे उसी विमान में यात्रा कर रहे थे, जिससे इन पवित्र अवशेषों को मंगोलिया से भारत लाया गया। यह अनुभव उनके लिए अत्यंत भावुक, प्रेरणादायक और आत्मिक शांति प्रदान करने वाला रहा।उन्होंने कहा कि अरहंत सारिपुत्र और अरहंत महा मौद्गल्यायन के पवित्र अवशेष केवल धार्मिक धरोहर नहीं हैं, बल्कि वे ज्ञान, करुणा, निस्वार्थ सेवा और विश्व शांति के संदेश के प्रतीक हैं। इन महान शिष्यों का जीवन आज भी मानवता को सही मार्ग पर चलने की प्रेरणा देता है।
बुद्ध का संदेश आज भी प्रासंगिक
उन्होंने कहा कि तथागत बुद्ध और उनके महान शिष्यों का संदेश आज भी पूरी दुनिया के लिए प्रासंगिक है। यह संदेश शांति, सद्भाव, करुणा और भाईचारे की भावना को मजबूत करता है। उन्होंने पवित्र अवशेषों के प्रति अपनी श्रद्धा व्यक्त करते हुए कामना की कि बुद्ध का यह अमर संदेश पूरी मानवता को प्रेरित करता रहे।
भारत और मंगोलिया के बीच आध्यात्मिक संबंध
भाजपा महासचिव ने कहा कि मंगोलिया में इन पवित्र अवशेषों की प्रदर्शनी के दौरान वहां के लोगों ने जिस श्रद्धा और सम्मान का परिचय दिया, वह भारत और मंगोलिया के बीच मजबूत आध्यात्मिक एवं सांस्कृतिक संबंधों को दर्शाता है। भगवान बुद्ध की शिक्षाओं ने दोनों देशों को सदियों से एक-दूसरे से जोड़े रखा है।उल्लेखनीय है कि मंगोलिया से लौटे इन पवित्र अवशेषों के सांची पहुंचने को बौद्ध श्रद्धालुओं के लिए एक महत्वपूर्ण और ऐतिहासिक अवसर माना जा रहा है। इनके दर्शन के लिए बड़ी संख्या में श्रद्धालु सांची पहुंच रहे हैं।