भोपाल में 3 करोड़ के बैंक ऋण घोटाले का खुलासा। संपत्तियां गिरवी रखकर फर्जी कंपनियों के जरिए रकम ट्रांसफर, ईओडब्ल्यू ने कई आरोपियों पर दर्ज की एफआईआर
भोपाल में बैंक ऋण के नाम पर की गई बड़ी जालसाजी का मामला सामने आया है। आर्थिक अपराध प्रकोष्ठ (ईओडब्ल्यू) ने करीब 3 करोड़ रुपए के बैंक ऋण घोटाले में आरोपियों के खिलाफ एफआईआर दर्ज की है। आरोप है कि सुनियोजित साजिश के तहत शिकायतकर्ता को विश्वास में लेकर कंपनी बनाई गई, फिर उसकी तीन बहुमूल्य अचल संपत्तियों को बैंक में गिरवी रखवाकर ऋण लिया गया और रकम का दुरुपयोग किया गया।
शिकायत के बाद हुई जांच
मामले की लिखित शिकायत 12 जून 2019 को भोपाल निवासी दीपक भावसार ने ईओडब्ल्यू से की थी। शिकायत में बताया गया कि राहुल दुबे, संगीता दुबे, प्रताप नारायण दुबे, अतुल दुबे, भुवनेश्वर पाण्डे और स्वाति शुक्ला सहित अन्य लोगों ने मिलकर षड्यंत्र रचा. जांच में शिकायत सही पाए जाने पर आर्थिक अपराध प्रकोष्ठ ने आरोपियों के खिलाफ धोखाधड़ी, आपराधिक साजिश, गंभीर दस्तावेजी जालसाजी और जाली दस्तावेज के उपयोग की धाराओं में मामला दर्ज किया है।
बैंक में गिरवी रखी गई तीन संपत्तियां
ईओडब्ल्यू के अनुसार आरोपियों ने शिकायतकर्ता की भोपाल स्थित तीन संपत्तियों एक फ्लैट, एक दुकान और मेंडोरी क्षेत्र की कृषि भूमि को पंजाब नेशनल बैंक, सियागंज शाखा, इंदौर में को-लेटरल के रूप में बंधक रखा. इसके आधार पर लगभग 3 करोड़ रुपए की कैश क्रेडिट लिमिट स्वीकृत कराई गई। बैंक शुल्क कटने के बाद करीब 2.81 करोड़ रुपए की राशि जून 2017 से अक्टूबर 2017 के बीच अलग-अलग खातों में ट्रांसफर कर दी गई।
फर्जी कंपनियों के जरिए रकम ट्रांसफर
जांच में सामने आया है कि 14 मार्च 2017 को ‘स्पेक्ट्रो फर्टकेम इंडिया प्राइवेट लिमिटेड’ नाम से कंपनी पंजीकृत कराई गई, जिसमें शिकायतकर्ता को डायरेक्टर बनाया गया। हालांकि कंपनी का वास्तविक संचालन प्रताप नारायण दुबे और भुवनेश्वर पाण्डे कर रहे थे. ऋण की राशि को डीडी सुपर बायो ऑर्गेनिक प्रायवेट लिमिटेड, डीडी केमिकल्स, स्वाति इंजीकॉम, मृत्युंजय केमटेक, अमेया एजेंसी, रिधिमा ऑर्गेनिक और महाकाल केमिकल्स जैसी कंपनियों में ट्रांसफर कराया गया। इनमें से कुछ कंपनियां निष्क्रिय पाई गईं, जबकि कुछ का कोई वास्तविक व्यापार ही नहीं था.सबसे अधिक करीब 2.06 करोड़ रुपए डीडी सुपर बायो ऑर्गेनिक प्रायवेट लिमिटेड में भेजे गए।
निजी खर्चों में भी उड़ाया पैसा
ईओडब्ल्यू की जांच में यह भी सामने आया कि शेष राशि का उपयोग कार्यालय और गोदाम के किराए, वेतन भुगतान और आरोपी राहुल दुबे की निजी सुरक्षा पर किया गया। यानी बैंक से लिया गया ऋण व्यावसायिक उपयोग की बजाय निजी और पारिवारिक हितों में खर्च हुआ.फिलहाल ईओडब्ल्यू मामले की विस्तृत जांच कर रही है। अधिकारियों का कहना है कि आगे पूछताछ के दौरान और भी तथ्य सामने आ सकते हैं, साथ ही आरोपियों की भूमिका के आधार पर कार्रवाई को आगे बढ़ाया जाएगा।