भोपाल के हलालपुर में पटाखा दुकानों में आग लगने के बाद घनी आबादी में दहशत फैल गई। पेट्रोल पंपों के बीच स्थित दुकानों में आग से बड़ी दुर्घटना का खतरा बढ़ गया।
प्रमोद दुवे
शुक्रवार की सुबह लगभग 4:00 बजे 3 वर्ष बाद एक बार फिर से हलालपुर बस स्टैंड के पास इंदौर भोपाल हाईवे को एक बार फिर पूरी तरह से जाम कर दिया गया , लगभग 8:00 बजे तक उपरोक्त रोड पर स्थित पटाखों की दुकानों पर लगी आग के बाद दहशत का माहौल आसपास स्थित चार पेट्रोल पंप की दुकानों तक जा पहुंचा । हजारों की भीड़ आगजनी के स्थान पर मौजूद थी । शासन प्रशासन की बड़ी कामयाबी यह रही कि समय रहते फायर ब्रिगेड की गाड़ियां पहुंच गई और एक बार फिर चार पेट्रोल पंपों के बीच स्थित यह पटाखे की दुकानों से भड़की आग पर कंट्रोल पा लिया गया । परंतु एक बार लगभग तीन वर्ष बाद फिर से यह आगजनी ने प्रशासन की तैयारी और अवैध पटाखा कारोबार के साथ-साथ बड़ी दुर्घटना को लेकर यक्ष प्रश्न खड़े कर दिए । घटनास्थल पर इन प्रश्नों की चर्चा स्थानीय लोग भी करते हुए दिखाई दिए ।

1 लाख से अधिक की आबादी , चार पेट्रोल पंपों के बीच हाईवे पर फटाका कारोबार
इंदौर भोपाल हाईवे पर स्थित हलालपुर बस स्टैंड और बैरागढ़ क्षेत्र से लगी हुई लगभग एक लाख से अधिक की आबादी के साथ-साथ चार से पांच पटाखा कारोबारीयो की इन दुकानों के आसपास चार-पांच पेट्रोल पंप , होटल कारोबार एवं 5 मैरिज गार्डन स्थित है । एक लाख की आबादी के बीच इस हाइवे से हलालपुर बस स्टैंड एवं इंदौर आने जाने वाले हजारों यात्री या मौजूद रहते हैं। लगभग तीन से चार वर्ष पूर्व इस तरह की घटना होने के बाद इन कारोबारी को यहां से अलग कारोबार करने के लिए प्रशासन द्वारा नोटिस जारी किए गए थे, परंतु दीपावली के लगभग 1 महीने पूर्व प्रशासन द्वारा एक बार पुनः लाइसेंस जारी कर दिए गए । ऐसी स्थिति में लगभग 3 वर्ष से यह कारोबार फलता रहा और किसी भी प्रशासनिक अधिकारी ने ध्यान नहीं दिया । कुल मिलाकर आज की घटना ने एक बार फिर साबित कर दिया है कि यह हाईवे बारूद के ढेर पर बैठा हुआ है ।
घनी आबादी के बीच फलता- फूलता कारोबार
राजधानी भोपाल की बात करें तो भदभदा, नीलबड़, खजूरी गांव, खजूरीकलां, आदमपुर, भौंरी, बैरागढ़ और हलालपुर में अवैध पटाखा कारखाने संचालित होने की जानकारी सामने आई है। ये सभी घनी आबादी वाले आवासीय इलाके हैं, जो एक तरह से बारूद के ढेर पर बसे हुए हैं। इसके अलावा राजधानी के चौक बाजार क्षेत्र में भी आधा दर्जन पटाखों की दुकानें हैं। जांच एजेंसियों के मुताबिक इन दुकानों के पीछे बने आवासीय हिस्सों में पटाखे तैयार किए जाते हैं। इस मामले में सरकार की ओर से कई तरह के दिशानिर्देश लगातार जारी किए जाते रहे हैं परंतु किसी भी तरह का परिणाम पिछले एक वर्ष में सामने नहीं आ सका । नगर निगम दमकल विभाग की ओर से भी किसी भी तरह की जांच रूटीन में नहीं की जाती है । परिणाम स्वरूप त्यौहार एवं शादियों के समय आबादी वाले क्षेत्र में बिना किसी लाइसेंस के पटाखा व्यापार चालू रहता है ।
- पटाखा फैक्ट्रियों, दुकानों के लिए सुरक्षा गाइडलाइन।
- फैक्ट्री और दुकानें आबादी से दूर हों
- आसपास के मकानों से कम से कम 100 मीटर दूरी हो
- बिजली विभाग की एनओसी अनिवार्य हो
- पर्याप्त फायर सेफ्टी उपकरण मौजूद हों
- बालू और पानी की पर्याप्त व्यवस्था हो
- आसपास तालाब या नलकूप जैसी सुविधा उपलब्ध हो
- परिसर में चाय, खाना बनाने और धूम्रपान पर प्रतिबंध हो
- गोदाम में पर्याप्त रोशनी हो
- खुली बिजली लाइनें नहीं होनी चाहिए