Breaking News
  • भारत-आयरलैंड टी-20 सीरीज, सचिन तेंदुलकर का रिकॉर्ड तोड़ सकते वैभव सूर्यवंशी
  • यूपी के कौशांबी में LPG टैंकर टोल प्लाजा से टकराने के बाद आग लग गई, हादसे में 5 कर्मचारी झुलस गए
  • लखनऊ में 2 दिन में 126 प्रतिष्ठान सील:दूसरे दिन भूमि IAS, विद्या कोचिंग समेत 55 पर कार्रवाई
  • वेनेजुएला भूकंप में अब तक 235 की मौत: 4300 से ज्यादा घायल; सरकार बोली- 39,000 लोग लापता
  • रतलाम में हाईटेंशन लाइन से ताजिया टकराया; दो लोगों की मौत; 15 झुलसे
  • EPFO पोर्टल आज से 28 जून तक बंद रहेगा, कई ऑनलाइन सेवाएं रहेंगी प्रभावित

होम > प्रदेश > मध्य प्रदेश

आयुष कॉलेजों पर नई सख्त नीति

फर्जी शिक्षक दिखाने पर 25 लाख तक जुर्माना, आयुष कॉलेजों पर एनसीआईएसएम की बड़ी सख्ती

आयुर्वेद, सिद्धा, यूनानी आयुष महाविद्यालयों पर एनसीआईएसएम ने नई दंडात्मक नीति लागू की। फर्जी शिक्षकों पर 25 लाख तक का जुर्माना, मान्यता रद्द करने के उपाय भी शामिल हैं।


फर्जी शिक्षक दिखाने पर 25 लाख तक जुर्माना आयुष कॉलेजों पर एनसीआईएसएम की बड़ी सख्ती 

मध्यप्रदेश सहित देशभर के आयुर्वेद, सिद्धा और यूनानी (एएसयू) आयुष मेडिकल कॉलेजों पर सख्ती बढ़ाते हुए सत्र 2026-27 से दंडात्मक नीति लागू कर दी गई है। इस संबंध में भारतीय चिकित्सा पद्धति राष्ट्रीय आयोग (एनसीआईएसएम) की 160वीं बैठक के बाद आयोग के अध्यक्ष डॉ. मुकुल पटेल ने परिपत्र जारी किया है।

परिपत्र जारी होने के बाद मध्यप्रदेश, राजस्थान, उत्तरप्रदेश, गुजरात, बिहार, उत्तराखंड, नई दिल्ली, हरियाणा, छत्तीसगढ़, पंजाब और महाराष्ट्र समेत देशभर के 700 से अधिक एएसयू महाविद्यालयों में से 200 से ज्यादा कॉलेजों की मान्यता पर संकट गहरा सकता है। साथ ही उनकी स्नातक (यूजी) सीटों में भी कटौती की जा सकती है।परिपत्र के अनुसार, यदि किसी संस्थान में शिक्षक, गैर-शिक्षकीय कर्मचारी और छात्रावास स्टाफ की उपस्थिति दर्ज करने के लिए एईबीएएस आइरिस सिस्टम नहीं पाया गया, तो उस संस्थान की निरीक्षण सत्र की मान्यता भी रद्द की जा सकती है।

यदि कोई महाविद्यालय निरीक्षण कराने से इनकार करता है, तो उसकी वर्तमान सत्र की अनुमति एवं मान्यता निरस्त कर दी जाएगी। वहीं, यदि कोई शिक्षक केवल कागजों पर (ऑन पेपर) कार्यरत पाया जाता है, तो संबंधित संस्थान पर प्रति शिक्षक 25 लाख का अर्थदंड लगाया जाएगा और उस शिक्षक को एक वर्ष के लिए प्रतिबंधित कर दिया जाएगा।परिपत्र में यह भी स्पष्ट किया गया है कि यदि कोई शिक्षक लगातार तीन वर्षों तक केवल ऑन-पेपर पाया जाता है, तो उसका शिक्षक कोड स्थायी रूप से रद्द कर दिया जाएगा।

शिक्षक स्टाफ की भारी कमी

देशभर के आयुर्वेद, सिद्धा और यूनानी आयुष महाविद्यालयों में शिक्षकों की कमी लंबे समय से बनी हुई है। मापदंडों के पालन में लापरवाही को देखते हुए अनुमान लगाया जा रहा है कि 200 से अधिक आयुष महाविद्यालयों की मान्यता प्रभावित हो सकती है।वर्तमान में देशभर में आयुर्वेद, सिद्धा और यूनानी के 700 से अधिक महाविद्यालय संचालित हैं, जिनमें दो लाख से ज्यादा छात्र अध्ययनरत हैं।

सीटों में भी होगी कटौती

नई नीति के तहत प्रत्येक अपर्याप्त शिक्षण संकाय (फैकल्टी) की कमी पर कुल स्वीकृत सीटों में से पांच सीटें कम कर दी जाएंगी। इसके अलावा अस्पताल संचालन में लापरवाही पाए जाने पर सीटों की संख्या में 30 प्रतिशत तक कटौती करने पर भी विचार किया जा सकता है।यह मापदंड शासकीय और निजी, दोनों प्रकार के संस्थानों पर समान रूप से लागू होंगे।

आयुष मेडिकल एसोसिएशन ने किया स्वागत

आयुष मेडिकल एसोसिएशन के राष्ट्रीय प्रवक्ता डॉ. राकेश पांडेय ने इस दंडात्मक नीति का स्वागत किया है। हालांकि उनका कहना है कि प्रदेश सहित देशभर के अधिकांश आयुष कॉलेज शिक्षकों की कमी से जूझ रहे हैं। ऐसे में एनसीआईएसएम और आयुष मंत्रालय को कुछ मापदंडों पर पुनर्विचार भी करना चाहिए।

 

Related to this topic: