देवास। मध्यप्रदेश के देवास जिले में सरकारी वन भूमि से अतिक्रमण हटाने पहुंची वन विभाग की टीम पर ग्रामीणों ने हमला कर दिया। कमलापुर क्षेत्र के भीलआमला गांव के पास करीब 100 ग्रामीणों ने वन अमले और पुलिस बल को घेरकर आधे घंटे तक पत्थरबाजी और गोफन से हमला किया। घटना में 6 वनकर्मी घायल हुए हैं, जबकि 8 वाहनों और एक ड्रोन को नुकसान पहुंचाया गया है।
ड्रोन वीडियो में दिखा हमला, खेतों की ओर भागे वनकर्मी
घटना शनिवार सुबह जिनवाणी वन परिक्षेत्र की कमलापुर बीट के कक्ष क्रमांक-94 में हुई। वन विभाग की टीम सरकारी वन भूमि पर किए गए अतिक्रमण को हटाने पहुंची थी। इसी दौरान बड़ी संख्या में ग्रामीण एकत्र हो गए और विरोध करते हुए पथराव शुरू कर दिया।घटना का ड्रोन वीडियो भी सामने आया है, जिसमें वनकर्मी और पुलिसकर्मी जान बचाने के लिए खेतों की ओर भागते दिखाई दे रहे हैं।
70 वनकर्मियों पर चारों तरफ से बरसाए पत्थर
जानकारी के अनुसार कार्रवाई के लिए सात रेंजों से करीब 70 वनकर्मियों का दल और पुलिस बल मौके पर पहुंचा था। ग्रामीणों ने टीम को चारों तरफ से घेर लिया और पत्थरबाजी शुरू कर दी। कई लोगों ने गोफन का इस्तेमाल कर दूर से भी लगातार हमला किया। स्थिति इतनी गंभीर हो गई कि कई कर्मचारियों को मौके से भागकर अपनी जान बचानी पड़ी।
एसडीओ की गाड़ी पर भी हमला
कार्रवाई का नेतृत्व कर रहे बागली के एसडीओ अंकित जामोद को भी पथराव के दौरान अपनी गाड़ी में शरण लेनी पड़ी। हमलावरों ने उनकी गाड़ी पर भी पत्थर बरसाए। बाद में वे सुरक्षित स्थान तक पहुंच सके। वन विभाग के मुताबिक हमले में विभाग के 6 वाहन और कार्रवाई में लगी 2 जेसीबी मशीनों को नुकसान पहुंचा है। ड्रोन को भी क्षतिग्रस्त कर दिया गया।
6 कर्मचारी घायल, 3 के सिर में गंभीर चोट
हमले में वनरक्षक मोहन पंचोनिया, ज्योति जाट, कमल राणा, देवकरण मालवीय, सूरज तथा परिक्षेत्र सहायक केके परमार घायल हुए हैं। इनमें तीन कर्मचारियों के सिर में गंभीर चोटें आई हैं। घायलों को पहले कमलापुर और चापड़ा के स्वास्थ्य केंद्रों में भर्ती कराया गया, बाद में गंभीर रूप से घायल कर्मचारियों को देवास जिला अस्पताल रेफर किया गया।
वनरक्षक बोलीं- संभलने का मौका तक नहीं मिला
घायल वनरक्षक ज्योति जाट ने बताया कि अचानक चारों तरफ से पथराव शुरू हो गया और कर्मचारियों को संभलने का मौका तक नहीं मिला। उन्होंने कहा कि उनके सहयोगी वनपाल कमल परमार के सिर में पत्थर लगने से गंभीर चोट आई और काफी खून बहने लगा।उन्होंने बताया कि जब वे घायल सहयोगी को सुरक्षित स्थान पर ले जाने की कोशिश कर रही थीं, तभी उनके सिर में भी पत्थर लगा।
तारबंदी में फंस गए कर्मचारी
वनकर्मियों के अनुसार मौके पर मौजूद तारों की बाउंड्री के कारण कई कर्मचारी समय पर बाहर नहीं निकल सके। इसी वजह से कई लोग पथराव की चपेट में आ गए। घायल वनकर्मी मोहन पंचोनिया ने बताया कि ग्रामीणों ने टीम को पूरी तरह घेर लिया था। कोई पत्थर फेंक रहा था तो कोई गोफन चला रहा था, जिससे बचाव करना मुश्किल हो गया।