अमेरिका और ईरान के बीच चले आ रहे तनाव के बाद दोनों देश शांति समझौते पर पहुंचे। 19 जून को स्विट्जरलैंड में हस्ताक्षर समारोह आयोजित होगा।
होर्मुज से हटे युद्ध के बादल, अमेरिका-ईरान के बीच समझौता
अमेरिका और ईरान के बीच लगभग 108 दिनों तक चले संघर्ष के बाद अब हालात पूरी तरह सामान्य होने की ओर हैं। अमेरिका और ईरान के बीच रविवार को जंग खत्म करने के लिए एक ऐतिहासिक शांति समझौते पर सहमति बन गई है। इस समझौते का आधिकारिक हस्ताक्षर समारोह आगामी शुक्रवार, 19 जून को स्विट्जरलैंड में आयोजित किया जाएगा। इसकी जानकारी अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने सोशल मीडिया पर दी है।
ट्रंप ने ट्रुथ सोशल पर लिखा, "इस्लामिक रिपब्लिक ऑफ ईरान के साथ समझौता अब पूरा हो गया है। सभी को बधाई। मैं इसके जरिए होर्मुज जलडमरूमध्य को बिना किसी शुल्क के खोलने और साथ ही अमेरिकी नौसेना की नाकेबंदी को तुरंत हटाने की मंजूरी देता हूं। दुनिया भर के जहाज अपने इंजन चालू करें। तेल का प्रवाह शुरू होने दो।"
इस समझौते के बाद दुनियाभर के कई देशों ने इसका स्वागत किया है। वहीं दूसरी ओर, इजराइल ने अमेरिका और ईरान के बीच होने वाले शांति समझौते को मानने से इनकार कर दिया है। रक्षा मंत्री इजराइल काट्ज ने कहा है कि उनकी सेना दक्षिणी लेबनान से पीछे नहीं हटेगी। वहीं, इजराइल के राष्ट्रीय सुरक्षा मंत्री इतमार बेन ग्वीर ने पीस डील पर नाराजगी जताते हुए कहा, "हम अमेरिका के गुलाम नहीं हैं।"
जेनेवा बैठक पर दुनिया की निगाहें
अब दुनिया की निगाहें 19 जून को जेनेवा में होने वाले औपचारिक हस्ताक्षर समारोह पर टिकी हैं। यदि यह समझौता सफलतापूर्वक लागू होता है, तो न केवल पश्चिम एशिया में स्थिरता बढ़ेगी, बल्कि वैश्विक व्यापार, ऊर्जा सुरक्षा और अंतरराष्ट्रीय कूटनीति पर भी इसके दूरगामी प्रभाव पड़ सकते हैं।
स्वदेश विश्लेषण
19 जून को शांति समझौते पर हस्ताक्षर करेंगे दोनों देश
फारस की खाड़ी में जंग समाप्त करने को लेकर अमेरिका और ईरान के बीच समझौते पर औपचारिक सहमति बन गई है। अगर यह समझौता परवान चढ़ता है, तो इस क्षेत्र में शांति और सुरक्षा का माहौल बनेगा।भारत सहित कई देशों की अर्थव्यवस्थाएं पटरी पर लौट आएंगी। खासतौर पर आयात-निर्यात सामान्य हो सकेगा। इससे दुनिया के आर्थिक हालात बेहतर होंगे।दुनिया पर ईरान युद्ध का सबसे अधिक प्रभाव होर्मुज स्ट्रेट के बंद होने की वजह से पड़ा। युद्ध समाप्त होने के बाद दुनिया भर में 20 प्रतिशत से अधिक तेल और गैस की आपूर्ति सामान्य हो जाएगी।खाड़ी देशों से लाखों लोगों का पलायन हुआ था। भारत सहित तमाम दक्षिण एशियाई देशों के लोग वहां वापस रोजगार हासिल कर सकेंगे। क्षेत्र में शांति रहने से रोजगार और सुरक्षा संबंधी चिंताएं भी कम होंगी।
भारत पर प्रभाव
तेल आपूर्ति होगी सामान्य
भारत अपनी तेल जरूरतों का बड़ा हिस्सा आयात करता है। युद्ध समाप्त होने पर तेल की आपूर्ति सामान्य होगी। इससे अंतरराष्ट्रीय बाजार में कीमतें कम हो सकती हैं।
रुपए को मिलेगी मजबूती
तेल आयात बिल घटने से भारत का व्यापार घाटा कम हो सकता है। विदेशी निवेशकों का भरोसा बढ़ने पर रुपए को मजबूती मिलेगी।
प्रधानमंत्री मोदी ने किया स्वागत
इधर, संघर्ष समाप्त करने को लेकर बनी सहमति का भारत के प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने भी स्वागत किया है। उन्होंने कहा कि वह अमेरिका और ईरान के बीच पश्चिम एशिया में संघर्ष समाप्त करने के लिए बनी सहमति का स्वागत करते हैं। इस संघर्ष के कारण दुनिया भर में गंभीर आर्थिक व्यवधान पैदा हुआ और कई देशों में लोगों की जान गई।उन्होंने उम्मीद जताई कि दोनों पक्षों के बीच शेष मुद्दों पर होने वाली बातचीत सकारात्मक दिशा में आगे बढ़ेगी और अंततः एक स्थायी तथा व्यापक समझौते तक पहुंचा जाएगा।