उज्ज्वला योजना में अब सालाना 9 की बजाय 4 LPG सिलेंडरों पर ही सब्सिडी मिलेगी। सरकार ने बताया कि यह फैसला दुरुपयोग रोकने और पारदर्शिता बढ़ाने के लिए लिया गया है।
उज्ज्वला योजना के तहत LPG सब्सिडी में हुए बदलाव को लेकर देशभर में चर्चा तेज हो गई है। पहले जहां लाभार्थियों को साल में 9 सिलेंडरों पर सब्सिडी मिलती थी। अब इसे घटाकर 4 सिलेंडर कर दिया गया है। इस बदलाव के बाद सवाल उठने लगे कि आखिर सरकार ने इतनी बड़ी कटौती क्यों की और इसका सीधा असर आम उपभोक्ताओं पर क्या पड़ेगा।
सरकार ने बताया क्यों बदला नियम
इस मुद्दे पर केंद्रीय पेट्रोलियम और प्राकृतिक गैस मंत्री हरदीप सिंह पुरी ने स्थिति स्पष्ट की है। उन्होंने कहा कि सरकार को ऐसे संकेत मिले थे कि कुछ लोग उज्ज्वला योजना के तहत मिलने वाले सब्सिडी वाले सिलेंडरों का व्यावसायिक इस्तेमाल कर रहे थे। उनके अनुसार, कई मामलों में घरेलू गैस सिलेंडर का गलत उपयोग और पुनः बिक्री की शिकायतें सामने आईं, जिसके बाद पूरी व्यवस्था की समीक्षा की गई और नियमों में बदलाव किया गया।
दुरुपयोग रोकना और पारदर्शिता बढ़ाना लक्ष्य
मंत्री ने साफ किया कि सरकार का उद्देश्य गरीब परिवारों को सस्ती रसोई गैस उपलब्ध कराना है। इसके साथ ही यह भी जरूरी है कि सब्सिडी का गलत इस्तेमाल रोका जाए। इसी वजह से पात्रता और वितरण व्यवस्था की समीक्षा की गई ताकि लाभ सिर्फ वास्तविक जरूरतमंदों तक ही पहुंचे और किसी तरह की लीकेज या दुरुपयोग न हो।
ऊर्जा सुरक्षा पर सरकार का फोकस
हरदीप सिंह पुरी ने कहा कि सरकार देश की ऊर्जा सुरक्षा को मजबूत करने पर लगातार काम कर रही है। उन्होंने बताया कि भारत की LPG और कच्चे तेल की आपूर्ति विभिन्न स्रोतों से सुनिश्चित की जा रही है। उन्होंने यह भी कहा कि वैश्विक तेल बाजार में उतार-चढ़ाव के बावजूद भारत स्थिति को संभालने में सक्षम है और लगातार ऊर्जा विकल्पों को मजबूत किया जा रहा है।
महंगाई और पेट्रोल-डीजल पर भी बयान
पेट्रोल-डीजल की कीमतों को लेकर मंत्री ने कहा कि अंतरराष्ट्रीय बाजार में उतार-चढ़ाव के बावजूद देश में कीमतें पहले की तुलना में नियंत्रित हैं। उन्होंने इसका श्रेय समय-समय पर की गई एक्साइज ड्यूटी कटौती और सरकार की ऊर्जा नीति को दिया, जिससे उपभोक्ताओं पर दबाव कम रखने की कोशिश की गई है।
स्वच्छ ऊर्जा की दिशा में कदम
सरकार ने यह भी बताया कि देश में एथेनॉल ब्लेंडिंग, बायोफ्यूल और सोलर एनर्जी जैसे विकल्पों को तेजी से बढ़ावा दिया जा रहा है। इसके साथ ही घरेलू तेल और गैस उत्पादन बढ़ाने के लिए बड़े स्तर पर निवेश और परियोजनाएं चलाई जा रही हैं, ताकि भविष्य में आयात पर निर्भरता कम की जा सके।