पश्चिम बंगाल की राजनीति में बड़ा घटनाक्रम सामने आया है। TMC के बागी सांसदों ने अलग गुट बनाकर NCP में विलय का दावा किया है। NDA को समर्थन देने के ऐलान के बाद सियासी हलचल तेज हो गई है।
कोलकाता। पश्चिम बंगाल की राजनीति में बड़ा सियासी भूचाल आने का दावा किया जा रहा है। तृणमूल कांग्रेस (TMC) के बागी सांसदों ने पार्टी नेतृत्व के खिलाफ खुला मोर्चा खोलते हुए खुद को अलग गुट के रूप में पेश किया है। इस गुट ने नेशनलिस्ट सिटिजंस पार्टी (NCP) में विलय और राष्ट्रीय जनतांत्रिक गठबंधन (NDA) के साथ काम करने की घोषणा कर दी है।
इस घटनाक्रम ने मुख्यमंत्री ममता बनर्जी के नेतृत्व वाली TMC के सामने नई चुनौती खड़ी कर दी है। मामला केवल सांसदों के असंतोष तक सीमित नहीं दिख रहा, बल्कि पार्टी के भीतर शक्ति संतुलन पर भी सवाल उठने लगे हैं।
काकोली घोष ने किया बड़ा दावा
बागी गुट की अगुवाई कर रहीं सांसद काकोली घोष दस्तीदार ने दावा किया कि उनके साथ TMC के 20 लोकसभा सांसद हैं। बाद में उन्होंने यह संख्या बढ़ाकर 22 सांसदों का समर्थन होने का भी दावा किया। उनके मुताबिक यह संख्या पार्टी की लोकसभा ताकत के दो-तिहाई से अधिक है, इसलिए प्रस्तावित विलय को संवैधानिक मान्यता मिलनी चाहिए।
दिल्ली में हुई अहम बैठक
रविवार को बागी सांसदों का एक समूह दिल्ली में पश्चिम बंगाल भाजपा प्रभारी भूपेंद्र यादव के आवास पहुंचा। बैठक के बाद सांसदों ने लोकसभा अध्यक्ष ओम बिरला से मुलाकात की। इसी क्रम में NCP में विलय और NDA के समर्थन का ऐलान किया गया। इस घटनाक्रम ने राष्ट्रीय राजनीति में भी चर्चा तेज कर दी है।
ममता से अलग हुए 20 बागी सांसदों के नाम
| क्रमांक |
लोकसभा सीट |
सांसद का नाम |
| 1 |
बारासात |
काकोली घोष दस्तीदार |
| 2 |
कूचबिहार |
जगदीश चंद्र बसुनिया |
| 3 |
जांगीपुर |
खलीलुर रहमान |
| 4 |
बहरामपुर |
यूसुफ पठान |
| 5 |
मुर्शिदाबाद |
अबू ताहेर खान |
| 6 |
बैरकपुर |
पार्थ भौमिक |
| 7 |
मथुरापुर |
बापी हलदार |
| 8 |
जादवपुर |
सायोनी घोष |
| 9 |
कोलकाता दक्षिण |
माला रॉय |
| 10 |
आरामबाग |
मिताली बाग |
| 11 |
घाटाल |
दीपक अधिकारी (देव) |
| 12 |
कोलकाता उत्तर |
सुदीप बंद्योपाध्याय |
| 13 |
झाड़ग्राम |
कालीपद सोरेन |
| 14 |
मेदिनीपुर |
जून मालिया |
| 15 |
बांकुड़ा |
अरूप चक्रवर्ती |
| 16 |
बर्धमान पूर्व |
डॉ. शर्मिला सरकार |
| 17 |
हावड़ा |
प्रसून बंद्योपाध्याय |
| 18 |
बोलपुर |
असित कुमार माल |
| 19 |
बीरभूम |
शताब्दी रॉय |
| 20 |
हुगली |
रचना बनर्जी |
चुनाव चिन्ह पर भी दावेदारी
बागी सांसद सुदीप बंद्योपाध्याय ने कहा कि असली तृणमूल कांग्रेस कौन है, इसका फैसला अब कानूनी प्रक्रिया के जरिए होगा। उन्होंने संकेत दिया कि उनका गुट पार्टी के चुनाव चिन्ह ‘जुड़वा फूल’ पर भी दावा करेगा। यदि ऐसा होता है तो मामला चुनाव आयोग और अदालत तक पहुंच सकता है।
ममता खेमे की बढ़ी चिंता
बागी नेताओं के दावों के अनुसार केवल सांसद ही नहीं, बल्कि पार्टी के कई विधायक भी उनके साथ हैं। पश्चिम बंगाल विधानसभा में TMC के 80 विधायकों में से 60 से अधिक विधायकों के अलग गुट के साथ होने का दावा किया जा रहा है। हालांकि इन दावों की आधिकारिक पुष्टि अभी नहीं हुई है। इधर पार्टी नेतृत्व ने भी सख्त रुख दिखाना शुरू कर दिया है। कुछ नेताओं को संगठनात्मक पदों से हटाने के फैसले लिए गए हैं। वहीं पार्टी के वरिष्ठ नेताओं ने बागी सांसदों के खिलाफ लोकसभा अध्यक्ष को औपचारिक शिकायत भी सौंप दी है।
कानूनी और राजनीतिक लड़ाई साथ-साथ
इस पूरे विवाद में राजनीतिक आरोप-प्रत्यारोप के साथ कानूनी मोर्चा भी खुलता दिखाई दे रहा है। काकोली घोष दस्तीदार के बेटे बैद्यनाथ ने ममता बनर्जी, महुआ मोइत्रा और कल्याण बनर्जी को कानूनी नोटिस भेजा है। इससे संकेत मिल रहे हैं कि आने वाले दिनों में यह विवाद और गहरा सकता है।
बंगाल की राजनीति पर पड़ सकता है असर
लोकसभा चुनाव के बाद पश्चिम बंगाल की राजनीति में यह सबसे बड़ा आंतरिक संकट माना जा रहा है। यदि बागी गुट अपने समर्थन के दावों को साबित कर देता है, तो इसका असर केवल संसद तक सीमित नहीं रहेगा बल्कि राज्य की सियासत और संगठनात्मक समीकरण भी बदल सकते हैं। फिलहाल सभी की नजर लोकसभा अध्यक्ष, चुनाव आयोग और अदालतों में होने वाली अगली कार्रवाई पर टिकी हुई है।