पश्चिम बंगाल में टीएमसी और कांग्रेस के संभावित विलय की चर्चा तेज हो गई है। सूत्रों के मुताबिक ममता बनर्जी तैयार हैं, लेकिन अभिषेक बनर्जी की शर्तों ने सियासी हलचल और बढ़ा दी है।
कोलकाता। पश्चिम बंगाल की राजनीति में बड़ी उथल-पुथल के बीच तृणमूल कांग्रेस और कांग्रेस के बीच संभावित राजनीतिक समीकरणों को लेकर चर्चाएं तेज हो गई हैं। लोकसभा और विधानसभा स्तर पर कथित टूट के बाद ममता बनर्जी की पार्टी नए सियासी मोड़ पर पहुंचती दिख रही है। सूत्रों के हवाले से दावा किया जा रहा है कि कांग्रेस की ओर से विलय का प्रस्ताव सामने आने के बाद ममता बनर्जी इस पर सहमति बनाने की दिशा में आगे बढ़ रही हैं। हालांकि, इस पूरे समीकरण में अब अभिषेक बनर्जी की भूमिका ने मामला और जटिल कर दिया है।
कांग्रेस से टीएमसी तक पहुंचा विलय का प्रस्ताव
बताया जा रहा है कि सोनिया गांधी से ममता बनर्जी की मुलाकात के दौरान राजनीतिक पुनर्संयोजन को लेकर बातचीत हुई थी। इस दौरान कथित तौर पर टीएमसी के कांग्रेस में विलय की संभावना पर भी चर्चा सामने आई। सूत्रों के अनुसार, इस प्रस्ताव में ममता बनर्जी को राष्ट्रीय स्तर पर उपाध्यक्ष बनाए जाने की बात कही गई है। वहीं अभिषेक बनर्जी को संगठन में महासचिव स्तर की जिम्मेदारी देने का संकेत बताया जा रहा है। इसी बीच राहुल गांधी और अभिषेक बनर्जी की दिल्ली में हुई मुलाकात को भी इसी राजनीतिक समीकरण से जोड़कर देखा जा रहा है। हालांकि इस पर किसी भी पक्ष ने आधिकारिक पुष्टि नहीं की है।
अभिषेक बनर्जी की मांग से बढ़ा सियासी पेच
सूत्रों के मुताबिक, अभिषेक बनर्जी ने कांग्रेस नेतृत्व के सामने अपनी अलग राजनीतिक भूमिका को लेकर कुछ अहम शर्तें रखी हैं। दावा है कि उन्होंने संगठन में मल्लिकार्जुन खरगे जैसे मौजूदा शीर्ष पद के बराबर भूमिका की मांग की है। इसके साथ ही यह भी चर्चा है कि उन्होंने ममता बनर्जी को राज्यसभा भेजने और वहां विपक्ष के नेता की भूमिका देने की बात रखी है। फिलहाल राज्यसभा में यह पद कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खरगे के पास है, ऐसे में यह मांग राजनीतिक रूप से बेहद संवेदनशील मानी जा रही है।
टीएमसी में अंदरूनी टूट ने बढ़ाई हलचल
यह पूरा घटनाक्रम ऐसे समय सामने आया है जब टीएमसी में बड़े स्तर पर असंतोष की खबरें लगातार सामने आ रही हैं। विधानसभा चुनाव के बाद पार्टी के कई विधायक और सांसद अलग रुख अपनाते दिखे हैं। सूत्रों के अनुसार, कुछ विधायकों ने अलग गुट बनाकर नेतृत्व पर सवाल उठाए हैं। वहीं लोकसभा और राज्यसभा स्तर पर भी कई सांसदों के इस्तीफे और दूरी बनाने की खबरों ने पार्टी की अंदरूनी स्थिति को लेकर चर्चाएं तेज कर दी हैं। इसी राजनीतिक अस्थिरता के बीच कांग्रेस और टीएमसी के संभावित समीकरणों को लेकर अटकलों ने जोर पकड़ लिया है।
विपक्षी गठबंधन में नए संतुलन की कोशिश
दिल्ली में राहुल गांधी और अभिषेक बनर्जी की मुलाकात को विपक्षी गठबंधन INDIA ब्लॉक के भीतर समन्वय मजबूत करने की कोशिश के रूप में भी देखा जा रहा है। इससे पहले सोनिया गांधी और ममता बनर्जी की मुलाकात ने भी राजनीतिक संकेतों को और मजबूत किया था। हालांकि, इस पूरे घटनाक्रम पर न तो टीएमसी और न ही कांग्रेस की ओर से कोई आधिकारिक बयान सामने आया है। फिलहाल यह पूरा मामला राजनीतिक चर्चाओं और सूत्रों पर आधारित दावों तक सीमित है, लेकिन इससे पश्चिम बंगाल से लेकर दिल्ली तक सियासी हलचल जरूर तेज हो गई है।