TMC में बड़ी टूट का दावा सामने आया है। 19 लोकसभा सांसदों की बागी सूची में शत्रुघ्न सिन्हा और यूसुफ पठान जैसे नाम शामिल हैं। जानिए पूरी राजनीतिक हलचल।
तृणमूल कांग्रेस (TMC) में अंदरूनी संकट लगातार गहराता दिख रहा है। ताजा राजनीतिक घटनाक्रम में पार्टी के भीतर बगावत के दावे और तेज हो गए हैं, जहां 19 लोकसभा सांसदों की एक सूची सामने आने से हलचल बढ़ गई है। इस सूची में कई ऐसे नाम शामिल बताए जा रहे हैं, जिनकी पहचान पार्टी के बड़े और प्रभावशाली चेहरों के रूप में होती रही है। दावा है कि यह गुट अब अलग राजनीतिक रुख अपनाने की दिशा में आगे बढ़ रहा है।
19 सांसदों की सूची से बढ़ी राजनीतिक हलचल
न्यूज एजेंसी IANS के अनुसार काकोली घोष के नेतृत्व वाले बागी गुट ने 19 सांसदों की एक सूची जारी की है। इससे पहले भी इस गुट की ओर से लोकसभा स्पीकर को समर्थन पत्र सौंपने की बात सामने आ चुकी है। बताया जा रहा है कि इस सूची के बाद TMC के अंदर संगठनात्मक तनाव और बढ़ गया है और राजनीतिक समीकरण तेजी से बदल रहे हैं।
शत्रुघ्न सिन्हा और यूसुफ पठान के नाम पर चर्चा
इस कथित सूची में शत्रुघ्न सिन्हा और यूसुफ पठान जैसे नाम शामिल होने से मामला और संवेदनशील हो गया है। दोनों ही नेता अलग-अलग समय पर TMC के टिकट पर लोकसभा पहुंच चुके हैं। शत्रुघ्न सिन्हा ने 2022 में TMC जॉइन किया था और आसनसोल से सांसद बने। वहीं यूसुफ पठान ने 2024 में बेहरामपुर से जीत दर्ज की थी, जहां उन्होंने कांग्रेस के वरिष्ठ नेता को हराया था।
सायोनी घोष का नाम भी चर्चा में
सूची में सायोनी घोष का नाम भी सामने आने से राजनीतिक हलकों में हैरानी जताई जा रही है। वह जादवपुर से सांसद हैं और 2021 के बाद TMC में तेजी से उभरी युवा चेहरा मानी जाती रही हैं। पार्टी संगठन में उनकी भूमिका को लेकर पहले भी चर्चा रही है, खासकर यूथ विंग में उनकी जिम्मेदारी के बाद उनका कद बढ़ा था।
राज्यसभा और विधानसभा में भी टूट के दावे
इस पूरे घटनाक्रम के बीच राज्यसभा और विधानसभा स्तर पर भी अलग-अलग गुट बनने के दावे सामने आ रहे हैं। कुछ सांसदों के इस्तीफे और अलग रुख अपनाने की खबरों ने स्थिति को और जटिल बना दिया है। हालांकि अभी तक इस पूरे मामले में आधिकारिक तौर पर पार्टी की ओर से कोई अंतिम पुष्टि नहीं की गई है।
काकोली घोष गुट की भूमिका पर नजर
बागी गुट की ओर से काकोली घोष को नेतृत्वकर्ता बताया जा रहा है। उनके अनुसार पार्टी की नीतियों और कामकाज को लेकर असंतोष बढ़ा है, जिसकी वजह से यह राजनीतिक बदलाव सामने आ रहा है। फिलहाल यह पूरा घटनाक्रम राजनीतिक हलचल और दावों के बीच घूम रहा है, लेकिन इससे TMC की आंतरिक स्थिति पर गंभीर सवाल जरूर खड़े हो गए हैं।