भारतीय सुप्रीम कोर्ट ने गृहिणियों की आय को 30,000 रुपए प्रति माह निर्धारित करते हुए उन्हें 'राष्ट्र निर्माता' कहा है।
उच्चतम न्यायालय ने सड़क हादसों में जान गंवाने वाली गृहिणियों को 'राष्ट्र निर्माता' बताते हुए ऐतिहासिक फैसला सुनाया।अब मुआवजे के लिए उनके घरेलू काम की न्यूनतम कीमत 30,000 रुपए प्रतिमाह मानी जाएगी। साथ ही कहा गया है कि मुआवजे की गणना करते समय इस राशि को आधार बनाया जाना चाहिए। देशभर में मोटर दुर्घटना के मामलों में मुआवजा तय करने के तरीके को बदलने वाले इस अहम फैसले में न्यायमूर्ति संजय करोल और न्यायमूर्ति एन. कोटिश्वर सिंह की पीठ ने गृहिणियों की काल्पनिक आय को कुशल मजदूरों की मजदूरी के बराबर मानने की पुरानी न्यायिक प्रथा को खारिज कर दिया।
अब तक गृहिणियों की आय को कुशल मजदूरों की दिहाड़ी के बराबर माना जाता था। अदालत ने कहा कि घर के कामों की सामाजिक और आर्थिक अहमियत बहुत अधिक है। इसे केवल सामान्य मजदूरी के तराजू में नहीं तौला जा सकता। अदालत ने यह भी कहा कि मोटर दुर्घटना से जुड़े दावों का निपटारा सामान्यतः एक वर्ष के भीतर हो जाना चाहिए।
महिला की हादसे में मौत पर आया फैसला
यह फैसला पंजाब में एक मोटर दुर्घटना दावे से जुड़ी अपील पर आया, जिसमें नवंबर 2001 में रेशमा नाम की एक महिला की सड़क दुर्घटना में मौत हो गई थी। उसके पति और तीन बच्चों ने मुआवजे के लिए मोटर दुर्घटना दावा न्यायाधिकरण का दरवाजा खटखटाया था। न्यायाधिकरण ने वर्ष 2003 में मुआवजा दिया, लेकिन मामला वर्षों तक मुकदमेबाजी में उलझा रहा।
फैसला पूरे देश में मुआवजे का तरीका बदल देगा
अब तक अदालतें गृहिणियों की आय न्यूनतम मजदूरी के आधार पर तय करती थीं। उच्चतम न्यायालय ने स्पष्ट किया कि घर के काम को सामान्य श्रम बाजार के पैमानों से नहीं मापा जा सकता। इससे पहले भी 'कीर्ति बनाम ओरिएंटल इंश्योरेंस' और 'अरुण कुमार अग्रवाल' जैसे मामलों में अदालत कह चुकी है कि गृहिणियों का योगदान अमूल्य है। नया फैसला मुआवजे की राशि को काफी बढ़ा सकता है और पीड़ित परिवारों को आर्थिक मजबूती प्रदान करेगा।
गृहिणियों की कोई तय कमाई नहीं होती
दुर्घटना में जब किसी व्यक्ति की मौत होती है, तब उसकी आय या वेतन के आधार पर मुआवजा तय किया जाता है। लेकिन गृहिणियों से जुड़े मामलों में यह प्रश्न जटिल हो जाता है, क्योंकि उनकी कोई निर्धारित आय नहीं होती। अदालत ने कहा कि जब किसी दुर्घटना में गृहिणी की मृत्यु हो जाती है, तब मुआवजा तय करते समय परिवार और समाज के प्रति उनके योगदान का उचित आकलन किया जाना आवश्यक है।