मोबाइल पर तेज अलार्म के साथ आने वाले इमरजेंसी अलर्ट फिलहाल बंद हो गए हैं। एनडीएमए ने सेल ब्रॉडकास्ट सेवा को समीक्षा और तकनीकी सुधार के लिए अस्थायी रूप से रोक दिया है। जानिए इसका असर और आगे की योजना।
अगर पिछले कुछ दिनों से आपके मोबाइल पर अचानक बजने वाला इमरजेंसी अलार्म नहीं आया है। तब इसकी वजह तकनीकी खराबी नहीं बल्कि सरकार का एक अहम फैसला है। राष्ट्रीय आपदा प्रबंधन प्राधिकरण (NDMA) ने फिलहाल सेल ब्रॉडकास्ट अलर्ट सिस्टम को अस्थायी रूप से रोक दिया है। यह वही सेवा है जिसके जरिए लोगों को मौसम और आपदा से जुड़ी चेतावनियां सीधे मोबाइल फोन पर भेजी जाती थीं।
बीते कुछ हफ्तों में करोड़ों मोबाइल यूजर्स ने तेज अलार्म के साथ आने वाले सरकारी अलर्ट देखे थे। कई लोगों के लिए यह अनुभव नया था, लेकिन इसका मकसद आपात स्थिति में लोगों तक कुछ ही सेकंड में चेतावनी पहुंचाना था। अब इस सेवा के रुकने के बाद सवाल उठ रहे हैं कि आखिर ऐसा क्यों किया गया। फिलहाल उपलब्ध जानकारी के मुताबिक यह फैसला स्थायी नहीं है। संबंधित एजेंसियां सिस्टम की समीक्षा और तकनीकी सुधार पर काम कर रही हैं, जिसके बाद इसे दोबारा शुरू किया जा सकता है।
क्यों महत्वपूर्ण थी यह सेवा
सेल ब्रॉडकास्ट अलर्ट सिस्टम को लोगों तक प्राकृतिक आपदा, भारी बारिश, आंधी, तूफान या अन्य आपात स्थितियों की जानकारी पहुंचाने के लिए शुरू किया गया था। इसकी सबसे बड़ी खासियत यह थी कि संदेश सीधे मोबाइल स्क्रीन पर दिखाई देता था और साथ में तेज अलार्म भी बजता था। इसका उद्देश्य यह सुनिश्चित करना था कि महत्वपूर्ण चेतावनी किसी सामान्य एसएमएस की तरह नजरअंदाज न हो जाए।
इंटरनेट के बिना भी पहुंचता था अलर्ट
इस तकनीक को पारंपरिक मैसेजिंग सिस्टम से अलग माना जाता है। सामान्य तौर पर कई सेवाएं इंटरनेट या मोबाइल डेटा पर निर्भर रहती हैं, लेकिन सेल ब्रॉडकास्ट तकनीक बिना इंटरनेट कनेक्शन के भी काम करती है। यही कारण है कि नेटवर्क उपलब्ध होने पर अलर्ट तुरंत प्रभावित क्षेत्र के मोबाइल फोन तक पहुंच जाता था। आपदा प्रबंधन के नजरिए से यह इसकी सबसे बड़ी ताकत मानी जाती है।
समीक्षा के पीछे क्या वजह मानी जा रही है
अधिकारियों की ओर से सेवा रोकने की विस्तृत वजह सार्वजनिक नहीं की गई है। हालांकि तकनीकी विशेषज्ञों का मानना है कि सिस्टम की सटीकता और प्रभावशीलता को और बेहतर बनाने के लिए इसका मूल्यांकन किया जा रहा है। संभावना है कि भविष्य में अलर्ट की लोकेशन पहचान, संदेशों की प्रासंगिकता और वितरण प्रक्रिया में कुछ सुधार किए जाएं ताकि केवल प्रभावित क्षेत्रों के लोगों तक अधिक सटीक चेतावनी पहुंच सके।
मौसम अलर्ट में निभाई थी अहम भूमिका
सेवा शुरू होने के बाद कई राज्यों में लोगों को तेज आंधी, भारी बारिश और खराब मौसम की चेतावनियां समय रहते मिली थीं। उत्तर भारत में आए तूफानी मौसम के दौरान भी बड़ी संख्या में मोबाइल फोन पर अलर्ट भेजे गए थे। इससे लोगों को पहले से सतर्क रहने और जरूरी सावधानी बरतने का अवसर मिला।
कैसे काम करती है यह तकनीक
सेल ब्रॉडकास्ट सिस्टम किसी एक नंबर पर संदेश भेजने के बजाय एक निश्चित भौगोलिक क्षेत्र में मौजूद सभी मोबाइल डिवाइस तक एक साथ सूचना पहुंचाता है। यही वजह है कि इसे आपदा प्रबंधन के लिए प्रभावी माध्यम माना जाता है। इस तकनीक को सी-डॉट और गृह मंत्रालय के सहयोग से विकसित किया गया है ताकि संकट की स्थिति में सूचना प्रसार की गति और पहुंच दोनों को मजबूत बनाया जा सके।
लोगों के लिए क्या बदलेगा
सेवा के अस्थायी रूप से बंद होने का मतलब यह नहीं है कि आपदा चेतावनी व्यवस्था पूरी तरह रुक गई है। मौसम विभाग और अन्य एजेंसियां अपने नियमित प्लेटफॉर्म के जरिए अलर्ट जारी करती रहेंगी। हालांकि मोबाइल पर अचानक बजने वाले आपातकालीन अलार्म फिलहाल दिखाई नहीं देंगे। अब नजर इस बात पर है कि समीक्षा पूरी होने के बाद सरकार इस प्रणाली को किस नए स्वरूप और बेहतर सुविधाओं के साथ दोबारा शुरू करती है।