अरब सागर में कमजोर मौसमी गतिविधियों के कारण भारत में मानसूनी बारिश पर प्रभाव पड़ने की आशंका है। अल नीनो की स्थिति और बंगाल की खाड़ी में संभावित सर्कुलेशन से आगे की स्थिति पर नज़र।
अरब सागर इस समय असामान्य रूप से शांत है। हिंद महासागर के इस हिस्से में मौसमीय गतिविधियां कमजोर होने से देशभर में मानसूनी बारिश प्रभावित होने की आशंका खड़ी हो गई है। दरअसल, अरब सागर ही पश्चिमी और दक्षिणी भारत में मानसून के आगमन और उसकी प्रगति का प्रमुख आधार होता है। यदि अरब सागर में नमी और बादलों के बनने की प्रक्रिया कमजोर होती है, तो इसका असर भारत के विभिन्न क्षेत्रों में होने वाली मानसूनी बारिश पर पड़ता है।
हालात यह हैं कि भारतीय मानचित्र से सटे अरब सागर के आसमान में बादल छिटपुट ही दिखाई दे रहे हैं। किसी भी बारिश-प्रेमी के लिए इस तरह की तस्वीर देखना पीड़ादायक है। खासतौर पर भारतीय किसानों के लिए यह भावनात्मक रूप से बेहद कठिन समय होता है। हालांकि, सुखद संकेत यह है कि 20 जून के बाद मानसून की स्थिति में कुछ सुधार होने की संभावना है।
यहां नहीं हैं बादल
अल नीनो का मौसमी हस्तक्षेप शुरू
अल नीनो इंडेक्स उस सीमा तक पहुंच गया है, जहां ऑस्ट्रेलियाई मौसम विभाग की ओर से कभी भी आधिकारिक तौर पर अल नीनो प्रभावी होने की घोषणा की जा सकती है। पिछले सप्ताह अंतरराष्ट्रीय मौसम एजेंसी ने अल नीनो की आधिकारिक शुरुआत की घोषणा कर दी है।अद्यतन जानकारी के अनुसार, बीते दिन अल नीनो इंडेक्स का ग्राफ 0.8 डिग्री सेल्सियस के स्तर को छू गया, जिसे अल नीनो की शुरुआत का मानक माना जाता है।
बंगाल की खाड़ी में संभावित सर्कुलेशन से मानसून को मिल सकती है रफ्तार
जून के चौथे सप्ताह में उत्तरी बंगाल की खाड़ी में संभावित चक्रवाती परिसंचरण (सर्कुलेशन) बनने के कारण सोमाली जेट के मजबूत होने की संभावना है। इसके साथ ही इंडो-गंगा के मैदानी क्षेत्रों में मानसूनी पूर्वी हवाओं के स्थापित होने से मौसमी द्रोणी (ट्रफ लाइन) को भी मजबूती मिलने के संकेत हैं।इसी दौरान मानसून उत्तर-पश्चिम और मध्य भारत के कुछ अन्य हिस्सों में भी आगे बढ़ सकता है। इस संभावित सर्कुलेशन की तीव्रता और उसका मार्ग (ट्रैक) 20 जून के आसपास भारत में मानसून के समग्र प्रदर्शन को काफी हद तक निर्धारित करेगा।
दक्षिण-पश्चिम मानसून की प्रगति की अद्यतन स्थिति
दक्षिण-पश्चिम मानसून ने 15 जून को आंध्र प्रदेश के शेष हिस्सों, पश्चिम बंगाल तथा पश्चिम-मध्य बंगाल की खाड़ी में और आगे बढ़त दर्ज की है। इसके अलावा मानसून तेलंगाना, ओडिशा, झारखंड और बिहार के कुछ और क्षेत्रों तक पहुंच गया है।मौसम विभाग के अनुसार अगले 4 से 5 दिनों के दौरान परिस्थितियां दक्षिण-पश्चिम मानसून के और आगे बढ़ने के लिए अनुकूल बनी हुई हैं। इस दौरान मानसून के मध्य अरब सागर के कुछ और हिस्सों में, महाराष्ट्र के कई क्षेत्रों में, कर्नाटक के शेष भागों में, तेलंगाना, ओडिशा, झारखंड और बिहार के बाकी इलाकों में तथा छत्तीसगढ़ के कुछ हिस्सों में आगे बढ़ने की संभावना है।
कुल मिलाकर, हाल के दिनों में कुछ सुस्ती के बावजूद मानसून की प्रगति धीमी गति से ही सही, जारी है। आगामी दिनों में मध्य और पूर्वी भारत के अधिक क्षेत्रों को मानसूनी हवाएं अपनी जद में ले सकती हैं।बता दें कि भारत मौसम विज्ञान विभाग ने हाल ही में अपने पूर्वानुमान में बताया था कि इस वर्ष भारत में सामान्य से कम मानसूनी बारिश हो सकती है। फिलहाल मौसमी परिस्थितियां इस पूर्वानुमान को सही साबित करती नजर आ रही हैं।
नोट: इस खबर के स्रोत भारतीय मौसम विज्ञान विभाग, अंतरराष्ट्रीय मौसम एजेंसी एनओएए (NOAA) तथा अन्य मौसम एजेंसियों के आधिकारिक एक्स हैंडल हैं।