NCERT ने नई शिक्षा नीति के तहत 9वीं कक्षा की सामाजिक विज्ञान की किताबों में 1975 के आपातकाल को शामिल किया है, जिससे छात्र भारतीय लोकतंत्र के इस महत्वपूर्ण दौर को समझ सकेंगे।
नई शिक्षा नीति के तहत अब मध्यप्रदेश सहित देशभर के छात्र 9वीं कक्षा से ही 1975 के आपातकाल के बारे में पढ़ेंगे। राष्ट्रीय शैक्षिक अनुसंधान और प्रशिक्षण परिषद यानी एनसीईआरटी ने पहली बार कक्षा 9 की सामाजिक विज्ञान की पुस्तक में इमरजेंसी पर अलग से पाठ्य सामग्री शामिल की है। इससे पहले यह विषय मुख्य रूप से कक्षा 12 की राजनीति विज्ञान की किताबों तक सीमित था।
40 हजार से अधिक विद्यार्थियों को मिलेगा लाभ
मध्यप्रदेश के सरकारी और निजी स्कूलों के करीब 40 हजार विद्यार्थी इस नए पाठ्यक्रम के माध्यम से देश के लोकतांत्रिक इतिहास के महत्वपूर्ण दौर को समझ सकेंगे। जानकारी के अनुसार नई किताबें अगले सप्ताह से स्कूलों में उपलब्ध कराई जाएंगी।
लोकतंत्र की चुनौतियों वाले अध्याय में जोड़ा गया नया खंड
एनसीईआरटी ने इतिहास और सामाजिक विज्ञान की नई पुस्तक के अध्याय-6 में लोकतंत्र और उसके सामने मौजूद चुनौतियों पर विशेष फोकस किया है। इसी अध्याय में ‘इमरजेंसी’ शीर्षक से एक अलग खंड जोड़ा गया है। इसमें 1975 से 1977 के बीच लागू आपातकाल को भारतीय लोकतंत्र के सबसे चुनौतीपूर्ण दौरों में से एक बताया गया है।
50 साल पूरे होने के बीच आया बड़ा बदलाव
यह बदलाव ऐसे समय में किया गया है जब वर्ष 2025 में आपातकाल लागू होने के 50 वर्ष पूरे हुए हैं। शिक्षा विशेषज्ञों का मानना है कि लोकतांत्रिक संस्थाओं, नागरिक अधिकारों और संवैधानिक मूल्यों की समझ विकसित करने के लिए छात्रों को इस ऐतिहासिक घटना से परिचित कराना महत्वपूर्ण है।
क्या था 1975 का आपातकाल?
25 जून 1975 को तत्कालीन प्रधानमंत्री Indira Gandhi के नेतृत्व वाली सरकार ने देश में आपातकाल लागू किया था। उस समय बढ़ती महंगाई, बेरोजगारी, राजनीतिक असंतोष और सरकार विरोधी आंदोलनों को इसकी प्रमुख पृष्ठभूमि माना गया था।आपातकाल के दौरान कई मौलिक अधिकार निलंबित कर दिए गए थे। प्रेस पर सेंसरशिप लागू की गई और बड़ी संख्या में विपक्षी नेताओं व राजनीतिक कार्यकर्ताओं को गिरफ्तार किया गया था। मार्च 1977 में आपातकाल समाप्त हुआ और आम चुनाव कराए गए।
जयप्रकाश आंदोलन का भी मिलेगा अध्ययन
नई पुस्तक में आपातकाल के साथ-साथ जननायक Jayaprakash Narayan के नेतृत्व में चले छात्र और जन आंदोलनों का भी उल्लेख किया गया है। बिहार और गुजरात में हुए आंदोलनों को लोकतांत्रिक भागीदारी के महत्वपूर्ण उदाहरण के रूप में शामिल किया गया है।
‘Democracy and You’ नाम से नया सेक्शन भी जोड़ा गया
एनसीईआरटी ने छात्रों को लोकतंत्र की व्यावहारिक समझ देने के लिए ‘Democracy and You’ नाम से एक नया खंड भी जोड़ा है। इसका उद्देश्य पाठ्यपुस्तक के विषयों को छात्रों के वास्तविक सामाजिक और राजनीतिक अनुभवों से जोड़ना है।
शिक्षाविदों ने बताया सकारात्मक कदम
भोपाल के सुभाष एक्सीलेंस स्कूल के प्राचार्य सुधाकर पाराशर के अनुसार, नई किताब में पहली बार आपातकाल पर अलग खंड जोड़ा गया है। इससे विद्यार्थियों को भारतीय लोकतंत्र के महत्वपूर्ण अध्याय को समझने और उससे जुड़े ऐतिहासिक तथ्यों को जानने का अवसर मिलेगा।